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विशेष रिपोर्ट : ई-संजीवनी ने पार किया 50 करोड़ टेलीकंसल्टेशन का आंकड़ा

ई-संजीवनी ने रचा इतिहास: 50 करोड़ टेलीकंसल्टेशन का आंकड़ा पार, एआई (AI) और इमरजेंसी सर्विस (112) से भी जुड़ी सुविधा”

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

भारत के डिजिटल स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में एक नई क्रांति आ गई है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार, भारत की राष्ट्रीय टेलीमेडिसिन सेवा ‘ई-संजीवनी’ (eSanjeevani) ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज करते हुए 50 करोड़ (500 मिलियन) टेलीकंसल्टेशन (Teleconsultation) का आंकड़ा पार कर लिया है।

15 सितंबर 2026 तक यह प्लेटफॉर्म देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में नागरिकों को घर बैठे विशेषज्ञ डॉक्टरों की सुविधा उपलब्ध करा रहा है, जो ‘विकसित भारत’ की ओर एक बड़ा कदम है।

महिलाओं और बुजुर्गों की सबसे बड़ी भागीदारी

ई-संजीवनी ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के लिए एक वरदान साबित हो रही है, जहां लोगों को अस्पतालों तक पहुंचने में बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था।

जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, इस प्लेटफॉर्म का सबसे ज्यादा लाभ महिलाओं और बुजुर्गों ने उठाया है:

  • महिलाओं की हिस्सेदारी: कुल परामर्शों में 57.14 प्रतिशत हिस्सेदारी महिलाओं की रही।

  • वरिष्ठ नागरिक और बुजुर्ग: 40.15 प्रतिशत परामर्श 46 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोगों ने लिए, जिनमें 16.25 प्रतिशत 60 वर्ष से अधिक के वरिष्ठ नागरिक शामिल हैं।

यह अंग्रेजी और 14 अन्य भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है, और वर्तमान में यह 1.42 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिरों और 19,473 चिकित्सा केंद्रों के जरिए प्रतिदिन लगभग 2.5 से 3 लाख परामर्श की सुविधा दे रही है।

एआई (AI) और ईआरएसएस-112 (ERSS-112) का सफल एकीकरण

ई-संजीवनी को अब सिर्फ सामान्य ओपीडी तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे अत्याधुनिक तकनीकों से भी जोड़ा गया है:

  1. AI संचालित निर्णय सपोर्ट सिस्टम: प्लेटफॉर्म में अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) से संचालित नैदानिक ​​निर्णय सहायता प्रणाली को एकीकृत किया गया है।

  2. यह तकनीक डॉक्टरों को सटीक और त्वरित निर्णय लेने में मदद करती है। इस नवाचार के लिए हाल ही में इसे ‘राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस स्वर्ण पुरस्कार 2026’ भी मिला है।

  3. ईआरएसएस-112 से जुड़ाव: आपातकालीन स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाने के लिए इसे ‘आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली’ (ERSS-112) से जोड़ दिया गया है, ताकि डिजिटल स्वास्थ्य और आपातकालीन सेवाओं के बीच मजबूत तालमेल स्थापित हो सके।

अब एम्स (AIIMS) और बड़े संस्थानों में विशेषज्ञ ओपीडी

ई-संजीवनी अब केवल प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा तक सीमित नहीं है। सरकार ने इसे प्रमुख चिकित्सा संस्थानों से जोड़ दिया है।

अब एम्स जोधपुर, एम्स जम्मू और एम्स पटना के विशेषज्ञ डॉक्टरों से भी मरीज सीधे घर बैठे टेलीकंसल्टेशन ले सकते हैं।

जल्द ही इस सुविधा का विस्तार एम्स दिल्ली, JIPMER और PGIMER चंडीगढ़ जैसे बड़े संस्थानों में भी किया जाएगा, जिससे मरीजों का बड़े शहरों की ओर यात्रा करने का खर्च और समय बचेगा।

‘सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग’ (C-DAC) मोहाली द्वारा पूरी तरह से भारत में (Made in India) विकसित यह प्लेटफॉर्म ‘आत्मनिर्भर भारत’ का एक उत्कृष्ट उदाहरण बन गया है, जो देश भर में भौगोलिक बाधाओं को तोड़कर न्यायसंगत स्वास्थ्य सेवा प्रदान कर रहा है।

ई-संजीवनी (eSanjeevani): 50 करोड़ टेलीकंसल्टेशन का सफर

विषय / तथ्य महत्वपूर्ण आंकड़े और जानकारी
ऐतिहासिक उपलब्धि 50 करोड़ (500 मिलियन) टेलीकंसल्टेशन (15 सितंबर 2026 तक)
भौगोलिक पहुंच देश के सभी 36 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश
प्रतिदिन परामर्श लगभग 2.5 लाख से 3 लाख (एक दिन का उच्चतम रिकॉर्ड: 6,30,315)
उपयोगकर्ता जनसांख्यिकी महिलाएं: 57.14% | 46+ आयु वर्ग: 40.15% | 60+ आयु वर्ग: 16.25%
नवीनतम तकनीकी अपडेट एआई (AI) डिसीजन सपोर्ट सिस्टम और ईआरएसएस-112 (ERSS-112) का एकीकरण
उपलब्ध भाषाएं 15 भाषाएं (अंग्रेजी + 14 भारतीय भाषाएं)
विशेषज्ञ परामर्श (OPD) एम्स जोधपुर, एम्स जम्मू, एम्स पटना (JIPMER व PGIMER में विस्तार जल्द)
डेवलपर (निर्माता) C-DAC मोहाली (Made in India डिजिटल स्वास्थ्य प्लेटफॉर्म)
सम्मान / अवार्ड राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस स्वर्ण पुरस्कार 2026