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मद्रास हाई कोर्ट से उदयनिधि स्टालिन को राहत, मिली स्टेशन बेल

मद्रास हाई कोर्ट से उदयनिधि स्टालिन को बड़ी राहत, तृषा विवाद में स्टेशन बेल पर रिहाई का आदेश”

चेन्नई: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट

तमिलनाडु विधानसभा में विपक्ष के नेता और DMK के दिग्गज नेता उदयनिधि स्टालिन को मद्रास हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है।

मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय और अभिनेत्री तृषा पर कथित रूप से विवादित और द्विअर्थी टिप्पणी करने के मामले में हिरासत में लिए गए उदयनिधि को अदालत ने उसी दिन ‘स्टेशन बेल’ (Station Bail) पर रिहा करने का निर्देश दिया है।

कोर्ट का यह फैसला उनके हिरासत में लिए जाने के कुछ ही समय बाद आया है।

पुलिस रिमांड नहीं मांग रही: एडवोकेट जनरल

नीलांकरई स्थित उदयनिधि के आवास पर पुलिस के पहुंचने के तुरंत बाद, उनकी कानूनी टीम ने सक्रियता दिखाते हुए मद्रास हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका दायर कर दी थी।

सुनवाई के दौरान, तमिलनाडु के एडवोकेट जनरल विजय नारायण ने अदालत को सूचित किया कि तंजावुर पुलिस ने उदयनिधि को गिरफ्तार कर लिया है और उन्हें केवल पूछताछ के लिए तंजावुर ले जाया जा रहा है।

उन्होंने अदालत को स्पष्ट किया कि पुलिस उनकी न्यायिक रिमांड (Judicial Remand) नहीं मांग रही है और पूछताछ पूरी होने के तुरंत बाद उन्हें स्टेशन बेल पर रिहा करने का इरादा रखती है।

इस स्पष्टीकरण को स्वीकार करते हुए, मद्रास हाई कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया कि उदयनिधि को मंगलवार को ही स्टेशन बेल पर रिहा कर दिया जाए।

क्या था पूरा विवाद? कैसे शुरू हुआ हंगामा?

यह पूरा सियासी बवाल सोमवार को कावेरी जल-बंटवारे के मुद्दे पर तंजावुर में आयोजित एक रैली से शुरू हुआ।

  • अपने भाषण के दौरान उदयनिधि स्टालिन राज्य के मुख्यमंत्री विजय पर निशाना साध रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि सीएम तमिलनाडु के हिस्से का नदी का पानी हासिल करने में विफल रहे हैं और चुप हैं।

  • जब वह भाषण दे रहे थे, तभी भीड़ का एक हिस्सा बार-बार अभिनेत्री “तृषा” का नाम पुकारने लगा, जो मुख्यमंत्री विजय के साथ उनकी चर्चित दोस्ती की ओर एक सीधा इशारा था।

  • इस पर उदयनिधि रुके, मुस्कुराए और टिप्पणी करते हुए कहा कि ‘कावेरी का पानी कहीं और पहुंचे या न पहुंचे, उसे “वहां पहुंचना चाहिए”।’ इसके तुरंत बाद उन्होंने बात संभालते हुए कहा कि वे नदी के पानी की बात कर रहे थे।

हालाँकि, आलोचकों और विपक्षी दलों ने इस बयान को एक भद्दी यौन टिप्पणी (Sexual innuendo) के तौर पर लिया, जिसके बाद पूरे राज्य में भारी राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया और सत्ता पक्ष के साथ-साथ अन्य दलों ने भी इस बयान की कड़ी निंदा की।

Santosh SETH

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