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पश्चिम एशिया तनाव के बीच भारत को राहत: 46 हजार टन LPG लेकर मुंद्रा पोर्ट पहुंचा जहाज ‘शिवालिक’ | The Politics Again

‘पश्चिम एशिया के तनाव के बीच भारत को बड़ी राहत: 46 हजार टन LPG लेकर सुरक्षित मुंद्रा पोर्ट पहुंचा जहाज ‘शिवालिक ‘

नई दिल्ली/मुंद्रा (The Politics Again): श्रीमती शिल्पा की रिपोर्ट 

पश्चिम एशिया (Middle East) में युद्ध के मंडराते बादलों और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही पर छाए गहरे संकट के बीच भारत के लिए एक बेहद सुकून देने वाली खबर आई है।

भारतीय शिपिंग कॉरपोरेशन (SCI) द्वारा संचालित विशाल एलपीजी (LPG) टैंकर जहाज ‘शिवालिक’ रविवार शाम करीब 5 बजे सुरक्षित रूप से गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पहुंच गया है।

इस जहाज के सुरक्षित भारत पहुंचने को देश की ऊर्जा आपूर्ति और घरेलू गैस वितरण के लिहाज से एक बड़ी कूटनीतिक और रणनीतिक सफलता माना जा रहा है।

ईरान की विशेष अनुमति और ‘शिवालिक’ का सफर

फरवरी के अंत में अमेरिका और इस्राइल द्वारा ईरान पर किए गए सैन्य हमलों के बाद से ही इस पूरे क्षेत्र में तनाव अपने चरम पर है।

ईरान ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी देते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को लेकर बेहद सख्त रुख अपना लिया था, जिससे दुनिया भर के कई टैंकरों ने इस रास्ते से गुजरने से परहेज किया।

  • भारत को मिली छूट: इस भारी तनाव के बीच भी ईरान ने भारत के साथ अपने कूटनीतिक संबंधों को तरजीह देते हुए दो भारतीय जहाजों (शिवालिक और नंदा देवी) को इस खतरनाक रास्ते से गुजरने की विशेष अनुमति दी।

  • 46 हजार टन गैस की खेप: ‘शिवालिक’ जहाज लगभग 46 हजार मीट्रिक टन एलपीजी लेकर भारत पहुंचा है।

  • वहीं, दूसरा भारतीय जहाज ‘नंदा देवी’ भी सुरक्षित रूप से जलडमरूमध्य पार कर चुका है और इसके 17 मार्च तक कांडला पोर्ट पहुंचने की संभावना है। दोनों जहाजों पर कुल मिलाकर करीब 92,700 मीट्रिक टन गैस लदी है।

क्यों दुनिया की ‘दुखती रग’ है होर्मुज जलडमरूमध्य?

होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला एक बेहद संकरा और दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है।

  • 20% ऊर्जा की सप्लाई: दुनिया भर में कच्चे तेल और गैस की कुल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है।

  • यहाँ किसी भी तरह का सैन्य तनाव या ब्लॉकेड (नाकेबंदी) पूरी दुनिया में तेल और गैस की कीमतों में आग लगा सकता है।

  • भारत भी अपनी ऊर्जा जरूरतों (विशेषकर कच्चे तेल और एलपीजी) के लिए इसी मार्ग पर सबसे ज्यादा निर्भर है।

आम जनता के लिए क्यों अहम है यह खबर?

भारत में घरेलू रसोई गैस और व्यावसायिक उपयोग के लिए एलपीजी की मांग हमेशा उच्च स्तर पर रहती है।

‘शिवालिक’ के मुंद्रा पोर्ट पहुंचने के बाद गैस को उतारने (Unloading) की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जल्द ही इस गैस को देश के विशाल एलपीजी वितरण नेटवर्क और गैस सिलेंडरों के जरिए आम जनता तक पहुंचाया जाएगा, जिससे त्योहारी या आम दिनों में देश के भीतर गैस की कोई किल्लत नहीं होगी।

Santosh SETH

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