“प्रयागराज में संगम की रेती पर माघ मेला 2026 का औपचारिक और भव्य शुभारंभ हो गया है”
प्रयागराज 03 / 01 / 2026 संतोष सेठ की रिपोर्ट
साल के पहले स्नान पर्व पौष पूर्णिमा के अवसर पर कड़ाके की ठंड और कोहरे के बावजूद श्रद्धालुओं की अटूट आस्था देखने को मिली। संगम तट पर सुबह से ही ‘हर-हर गंगे’ के जयघोष के साथ लाखों भक्तों ने त्रिवेणी में आस्था की डुबकी लगाई।
| क्रम | स्नान पर्व | तिथि (हिन्दी तिथि) | दिन |
| 1. | पौष पूर्णिमा | 03 जनवरी, 2026 | शनिवार |
| 2. | मकर संक्रांति | 14 जनवरी, 2026 | बुधवार |
| 3. | मौनी अमावस्या | 18 जनवरी, 2026 | रविवार |
| 4. | बसंत पंचमी | 22 जनवरी, 2026 | गुरुवार |
| 5. | माघी पूर्णिमा | 01 फरवरी, 2026 | रविवार |
| 6. | महाशिवरात्रि | 15 फरवरी, 2026 | रविवार |
माघ मेले के प्रथम स्नान पर्व पौष पूर्णिमा के साथ ही संगम तट पर एक महीने के कठिन कल्पवास की शुरुआत हो गई है। लाखों कल्पवासी अब अगले एक माह तक संगम के किनारे झोपड़ियों (तंबुओं के नगर) में रहकर संयम, साधना और भजन-पूजन करेंगे। मेला प्रशासन के अनुसार, आज के दिन 20 से 30 लाख श्रद्धालुओं के स्नान करने का अनुमान है।
मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने स्वयं मेला क्षेत्र का निरीक्षण किया और सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस बार श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं:
घाटों की लंबाई में वृद्धि: श्रद्धालुओं की सुगमता के लिए इस बार 10 स्नान घाट बनाए गए हैं, जिनकी कुल लंबाई 10,000 फुट है। यह पिछले वर्ष की तुलना में 2,000 फुट अधिक है।
डिजिटल मदद: बिजली विभाग ने ‘मेला सेवा ऐप’ लॉन्च किया है। यदि किसी श्रद्धालु को बिजली संबंधी समस्या होती है, तो वह खंभों पर लगे QR कोड को स्कैन कर अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है।
प्रतीक चिह्न (Logo): इस वर्ष पहली बार माघ मेले का अपना आधिकारिक ‘लोगो’ जारी किया गया है, जो इसकी एक विशिष्ट पहचान को दर्शाता है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ के माध्यम से देश-दुनिया से आए तीर्थयात्रियों का अभिनंदन किया। उन्होंने लिखा:
“पवित्र संगम में आस्था की डुबकी लगाने हेतु पधारे सभी पूज्य साधु-संतों, कल्पवासियों और श्रद्धालुओं का हार्दिक स्वागत। मां गंगा, यमुना और सरस्वती की कृपा से सभी की मनोकामनाएं पूर्ण हों।”
मेला क्षेत्र को विभिन्न सेक्टरों में विभाजित किया गया है। भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल, जल पुलिस और गोताखोरों की तैनाती की गई है। जगह-जगह चिकित्सा शिविर और पेयजल की व्यवस्था की गई है ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
माघ मेला 2026 अध्यात्म, संस्कृति और आधुनिक तकनीक का एक अनूठा संगम बनकर उभरा है। “डिजिटल मेला” की अवधारणा और बेहतर घाट प्रबंधन ने इस धार्मिक आयोजन को और अधिक सुगम बना दिया है।
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