पीएम मोदी की मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक: पश्चिम एशिया संघर्ष पर चर्चा
“पश्चिम एशिया संघर्ष: पीएम मोदी की मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक में ‘टीम इंडिया’ की भावना पर जोर”
नई दिल्ली : द पॉलिटिक्स अगेन : श्रीमती शिल्पा की रिपोर्ट
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को देश भर के राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ एक महत्वपूर्ण डिजिटल बैठक की अध्यक्षता की।
यह बैठक 28 फरवरी को अमेरिका-इस्राइल के ईरान पर हमले से शुरू हुए और बाद में ईरान की जवाबी कार्रवाई के बाद बढ़े पश्चिम एशिया संघर्ष से पैदा हुई चुनौतियों पर केंद्रित थी।
बैठक का मुख्य उद्देश्य ‘टीम इंडिया’ की भावना के तहत राज्यों और केंद्र के बीच तालमेल सुनिश्चित करना था ताकि देश इस भू-राजनीतिक स्थिति से सफलतापूर्वक उबर सके।
प्रधानमंत्री ने बैठक के दौरान राज्यों की तैयारियों और योजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकार की प्राथमिकताओं में आर्थिक और व्यापारिक स्थिरता बनाए रखना, ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना, नागरिकों के हितों की रक्षा करना और उद्योग व आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करना शामिल है।
उन्होंने राज्यों से आपूर्ति श्रृंखलाओं के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने और जमाखोरी व मुनाफाखोरी के खिलाफ सख्त कदम उठाने का आग्रह किया।
प्रधानमंत्री ने कृषि क्षेत्र में अग्रिम योजना बनाने की जरूरत पर भी जोर दिया, खासकर उर्वरक भंडारण और वितरण की निगरानी में।
आदर्श आचार संहिता लागू होने के कारण चुनावी राज्य इस बैठक में शामिल नहीं हुए। कैबिनेट सचिवालय के माध्यम से तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम, केरल और पुडुचेरी के मुख्य सचिवों के साथ एक अलग बैठक आयोजित की जाएगी।
बैठक में आंध्र प्रदेश के एन चंद्रबाबू नायडू, उत्तर प्रदेश के योगी आदित्यनाथ, तेलंगाना के रेवंत रेड्डी, पंजाब के भगवंत मान, गुजरात के भूपेंद्र पटेल, जम्मू-कश्मीर के उमर अब्दुल्ला, हिमाचल प्रदेश के सुखविंदर सिंह सुक्खू और अरुणाचल प्रदेश के पेमा खांडू सहित कई मुख्यमंत्री शामिल हुए। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह भी इस बैठक में मौजूद थे।
मुख्यमंत्रियों ने बैठक में स्थिति से निपटने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की ओर से उठाए जा रहे कदमों की सराहना की।
उन्होंने वैश्विक अनिश्चितता के बीच ईंधन पर उत्पाद शुल्क कम करने और राज्यों को वाणिज्यिक एलपीजी आवंटन बढ़ाने के फैसलों का स्वागत किया।
मुख्यमंत्रियों ने भरोसा जताया कि उनके राज्यों में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता के कारण स्थिति स्थिर बनी हुई है।
साथ ही, उन्होंने केंद्र के साथ मिलकर प्रभावी प्रबंधन के लिए तालमेल बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।
सरकार ने नागरिकों को आश्वस्त किया है कि देश के पास 60 दिनों का ईंधन भंडार उपलब्ध है और तेल की आपूर्ति स्थिर है।












