National

पीएम मोदी ने साझा किया संस्कृत सुभाषितम्, बताया सदाचार का महत्व

पीएम मोदी ने ‘एक्स’ पर साझा किया संस्कृत सुभाषितम्: देशवासियों को दिया ज्ञान के साथ ‘अच्छे चरित्र और सदाचार’ का संदेश”

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

भारत की प्राचीन संस्कृति और ज्ञान-परंपरा को वैश्विक पटल पर स्थापित करने के आग्रही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (6 अक्टूबर 2026) को देशवासियों के साथ जीवन के एक अत्यंत महत्वपूर्ण मूल्य को साझा किया।

 

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक संस्कृत सुभाषितम् (Sanskrit Subhashitam) पोस्ट कर यह संदेश दिया कि मानव जीवन में बुद्धिमत्ता और कार्यकुशलता के साथ-साथ अच्छे चरित्र (Character) और सदाचार का होना कितना अनिवार्य है।

क्या है सुभाषितम् और उसका अर्थ?

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने आधिकारिक ‘एक्स’ हैंडल पर जो श्लोक साझा किया, वह इस प्रकार है:

“ज्ञानवांश्च तथा वाग्मि कर्मस्वपि च निश्चितः।

एवं युक्तोऽपि न श्रेयान् यदि शीलविवर्जितः॥”

इस प्राचीन सुभाषितम् का अर्थ स्पष्ट करते हुए बताया गया है कि जो व्यक्ति बुद्धिमान (Intelligent), वाक्पटु (Eloquent) और दृढ़ निश्चयी होता है, और इन सभी गुणों के साथ अच्छे चरित्र एवं सदाचार से युक्त होता है, वही समाज में वास्तव में श्रेष्ठ कहलाता है।

इसका गूढ़ अर्थ यह है कि यदि किसी व्यक्ति के पास अपार ज्ञान, बोलने की बेहतरीन कला और काम करने की क्षमता हो, लेकिन उसका चरित्र (शील) ठीक न हो, तो वह महान या श्रेष्ठ नहीं बन सकता।

युवाओं और समाज के लिए एक बड़ा संदेश

राजनीतिक और सामाजिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा साझा किया गया यह सुभाषितम् आज के परिदृश्य में युवाओं और समाज के लिए एक बड़ा मार्गदर्शन है।

वर्तमान दौर में जहां केवल पेशेवर सफलता और बौद्धिक क्षमता को ही महानता का पैमाना मान लिया जाता है,

वहां यह श्लोक याद दिलाता है कि सफलता की असली नींव ‘नैतिक मूल्यों’ (Moral Values) और ‘सदाचार’ पर टिकी होती है।

प्रधानमंत्री अपने संबोधनों में अक्सर भारत के प्राचीन ग्रंथों, उपनिषदों और सुभाषितों का उल्लेख करते हैं ताकि नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ी रहे और एक मूल्य-आधारित समाज (Value-based Society) का निर्माण हो सके।

उनका यह ताज़ा पोस्ट भी ‘राष्ट्र निर्माण में चरित्र निर्माण’ की उसी सोच का एक मजबूत हिस्सा माना जा रहा है।

पीएम मोदी का सुभाषितम् संदेश: मुख्य बिंदु

विषय / पहलू महत्वपूर्ण जानकारी
प्लेटफॉर्म सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X)
साझा किया गया श्लोक “ज्ञानवांश्च तथा वाग्मि कर्मस्वपि च निश्चितः। एवं युक्तोऽपि न श्रेयान् यदि शीलविवर्जितः॥”
सुभाषितम् का मुख्य संदेश ज्ञान और कार्यकुशलता के साथ अच्छे चरित्र (शील) और सदाचार का महत्व।
श्लोक में वर्णित गुण बुद्धिमत्ता (ज्ञान), वाक्पटुता (अच्छा वक्ता), कर्म में निश्चय और उत्तम चरित्र।
वास्तविक श्रेष्ठता का पैमाना बिना अच्छे चरित्र के केवल ज्ञान और वाक्पटुता व्यक्ति को महान नहीं बनाती।
सामाजिक प्रासंगिकता युवाओं को नैतिक मूल्यों और चरित्र निर्माण के प्रति प्रेरित करना।
Santosh SETH

Recent Posts

छोटे उद्योगों के लिए 10,000 करोड़ रुपये के SME ग्रोथ फंड को मंजूरी

कैबिनेट का ऐतिहासिक फैसला: MSME सेक्टर के लिए 10,000 करोड़ रुपये के 'SME ग्रोथ फंड'…

52 minutes ago

ब्रह्मांडीय रहस्य : रिसर्च में बाइनरी ब्लैक होल ‘ओजे 287’ का अहम खुलासा

ब्रह्मांडीय रहस्य से उठा पर्दा: 10 साल की रिसर्च में विशाल 'बाइनरी ब्लैक होल' (ओजे…

59 minutes ago

VB-G RAM G के तहत आपदा सहित 375 नए कार्यों की अनुसूची जारी

ग्रामीण विकास मंत्रालय का बड़ा कदम: VB-G RAM G के तहत 375 नए ग्रामीण कार्यों…

1 hour ago

विशेष रिपोर्ट : ई-संजीवनी ने पार किया 50 करोड़ टेलीकंसल्टेशन का आंकड़ा

ई-संजीवनी ने रचा इतिहास: 50 करोड़ टेलीकंसल्टेशन का आंकड़ा पार, एआई (AI) और इमरजेंसी सर्विस…

1 hour ago

ESTIC 2026 का उद्घाटन: महासागर विज्ञान और समुद्री प्रौद्योगिकी को बढ़ावा

महासागर विज्ञान को मिलेगा बढ़ावा: कोच्चि में ईएसटीआईसी-2026 (ESTIC 2026) का हुआ भव्य उद्घाटन, इंडोओबिस…

1 hour ago

नौसेना : स्वदेशी फ्लीट सपोर्ट शिप ‘आईएनएस सूर्य’ का जलावतरण

नौसेना की ताकत में ऐतिहासिक इजाफा: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्वदेशी फ्लीट सपोर्ट शिप…

1 hour ago