PM मोदी ने साझा किया संस्कृत सुभाषितम्, पूर्ण समर्पण का संदेश
पीएम मोदी ने साझा किया प्रेरणादायक संस्कृत सुभाषितम्: ‘कर्तव्य के प्रति समर्पण ही दिलाता है सर्वोच्च सिद्धि’, दिया कर्मयोग का संदेश”
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को देशवासियों के साथ एक अत्यंत प्रेरक और ज्ञानवर्धक संस्कृत सुभाषितम् (Sanskrit Subhashitam) साझा किया है।
स्वे स्वे कर्मण्यभिरतः संसिद्धिं लभते नरः।
स्वकर्मनिरतः सिद्धिं यथा विन्दति तच्छृणु।। pic.twitter.com/oiFIO7nmRv
— Narendra Modi (@narendramodi) September 30, 2026
इस श्लोक के माध्यम से प्रधानमंत्री ने जीवन में सफलता के मूल मंत्र— ‘कर्तव्यों के प्रति पूर्ण समर्पण और सत्यनिष्ठा’ को रेखांकित किया है।
उनका यह संदेश हर उस व्यक्ति के लिए एक मार्गदर्शक है, जो अपने कार्यक्षेत्र में निरंतर लगन के साथ जुड़ा हुआ है।
‘स्वे स्वे कर्मण्यभिरतः…’ – क्या है इस सुभाषितम् का अर्थ?
प्रधानमंत्री द्वारा साझा किया गया मूल संस्कृत श्लोक इस प्रकार है: “स्वे स्वे कर्मण्यभिरतः संसिद्धिं लभते नरः। स्वकर्मनिरतः सिद्धिं यथा विन्दति तच्छृणु॥”
इस प्राचीन सुभाषितम् का गहरा अर्थ समझाते हुए पीएम मोदी ने कहा कि जो व्यक्ति अपने कर्तव्यों के प्रति सदैव समर्पित रहते हैं, वे जीवन में सर्वोच्च सिद्धि (Highest Perfection) प्राप्त करते हैं।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पूरी लगन, ईमानदारी और सत्यनिष्ठा के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने वाले व्यक्तियों को यह अवश्य सीखना और जानना चाहिए कि ‘समर्पित कर्म’ (Dedicated Action) किस प्रकार से उन्हें सफलता के सर्वोच्च शिखर तक ले जा सकता है।
राष्ट्र निर्माण के लिए कर्मयोग की प्रेरणा
प्रधानमंत्री मोदी अक्सर अपने संवादों में ‘कर्मयोग’ और राष्ट्र निर्माण में प्रत्येक नागरिक के योगदान की बात करते हैं।
यह सुभाषितम् भी उसी विचार को पुष्ट करता है कि चाहे व्यक्ति किसी भी क्षेत्र में काम कर रहा हो, यदि वह अपने काम को ही पूजा मानकर पूर्ण निष्ठा से करता है,
तो न केवल उसका व्यक्तिगत विकास होता है, बल्कि वह समाज और राष्ट्र की प्रगति में भी अपनी सर्वश्रेष्ठ भूमिका निभाता है।











