मधुबनी 24 / 04 / 2025 संतोष सेठ की रिपोर्ट
पीएम मोदी ने कहा कि यह हमला सिर्फ निहत्थे पर्यटकों पर नहीं हुआ है, देश के दुश्मनों ने भारत की आत्मा पर हमला करने का दुस्साहस किया है। मैं बहुत स्पष्ट शब्दों में कहना चाहता हूं कि जिन्होंने यह हमला किया है, उन आतंकियों को और इस हमले की साजिश रचने वालों को उनकी कल्पना से भी बड़ी सजा मिलेगी। सजा मिलकर रहेगी। अब आतंकियों की बची-खुची जमीन को भी मिट्टी में मिलाने का समय आ गया है। 140 करोड़ भारतीयों की इच्छाशक्ति अब आतंक के आकाओं की कमर तोड़कर रहेगी।
22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों ने मासूम देशवासियों को जिस बेरहमी से मारा है, उससे पूरा देश व्यथित है। कोटि-कोटि देशवासी दुखी हैं। सभी पीड़ित परिवारों के इस दुख में पूरा देश उनके साथ खड़ा है। इन परिवारजनों का अभी इलाज चल रहा है। वे जल्द स्वस्थ हों, इसके लिए भी सरकार हर प्रयास कर रही है।
इस आतंकी हमले में किसी ने अपना बेटा खोया, किसी ने अपना भाई खोया, किसी ने अपना जीवनसाथी खोया। इनमें से कोई बांग्ला बोलता था, कोई कन्नड़ बोलता था, कोई मराठी, कोई गुजराती था, कोई यहां बिहार का लाल था। आज उन सभी की मृत्यु पर करगिल से कन्याकुमारी तक हमारा दुख और आक्रोश एक जैसा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि बिहार देश का पहला राज्य था, जहां पंचायतों मे 50% आरक्षण की सुविधा दी गए और इसलिए मैं नितीश का अभिनंदन करता हूं। आज बहुत बड़ी संख्या में गरीब, दलित, महादलित, पिछड़े, अति पिछड़े समाज की बहन बेटियां बिहार में जनप्रतिनिधि बनाकर सेवाएं दे रही हैं यही सच्चा सामाजिक न्याय है।
हजारों करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट का शिलान्यास और लोकार्पण
आज पंचायती राज दिवस के मौके पर पूरा देश बिहार से जुड़ा है। यहां बिहार के विकास से जुड़े हजारों करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट का शिलान्यास और लोकार्पण हुआ है। बिजली रेल और इन्फ्रास्ट्रक्चर के विभिन्न कार्यों से बिहार में रोजगार के नए मौके बनेंगे।
बीते दशक में 2 लाख से ज्यादा ग्राम पंचायत को इंटरनेट से जोड़ा गया है 5.30 लाख से ज्यादा कॉमन सर्विस सेंटर गांव में बने हैं। पंचायत के डिजिटल होने से एक और फायदा हुआ है जीवन-मृत्यु प्रमाण पत्र, भूमि धारण प्रमाण पत्र ऐसे कई दस्तावेज आसानी से प्राप्त कर सकते हैं।
भूमि विवाद की समस्या सुलझाने में मदद मिली
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ग्राम पंचायत की एक और समस्या भूमि विवाद से जुड़ी रही है। कौन सी जमीन आबादी की। कौन सी जमीन खेती की है। पंचायत की कौन सी है। सरकारी जमीन कौन सी है। इन सारे विषयों पर अक्सर विवाद रहता था। इसके समाधान के लिए जमीनों का डिजिटलकरण किया जा रहा है, इससे अनावश्यक विवादों को सुलझाने में मदद मिली है।
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