PM Modi Somnath Amrit Mahotsav

सोमनाथ में पीएम मोदी: पोखरण और अटल जी को किया याद

सोमनाथ में पीएम मोदी की हुंकार: ‘1951 में प्राण-प्रतिष्ठा ने किया था स्वतंत्र चेतना का उद्घोष, पोखरण ने दिखाई अटल इच्छाशक्ति’

सोमनाथ (गुजरात): द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को गुजरात के गिर सोमनाथ जिले में ऐतिहासिक सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित ‘सोमनाथ अमृत महोत्सव’ में हिस्सा लिया।

भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम इस मंदिर का यह महोत्सव भारत की समृद्ध सभ्यता और आध्यात्मिक विरासत का एक भव्य उत्सव रहा।

1951 में देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा इस मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा की गई थी, जिसकी याद में यह आयोजन किया गया।

भव्य रोड शो में उमड़ा जनसैलाब

कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी ने हेलीपैड से वीर हमीरजी सर्कल तक लगभग डेढ़ किलोमीटर लंबा रोड शो किया।

इस दौरान हजारों की संख्या में लोगों का हुजूम उनका स्वागत करने के लिए उमड़ पड़ा। सड़कों के दोनों ओर खड़े नागरिकों ने झंडे लहराए, नारे लगाए और प्रधानमंत्री का गर्मजोशी से अभिनंदन किया।

‘हजार वर्षों की अमृत यात्रा का शिवजी ने दिया मौका’

जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने खुद को ‘दादा सोमनाथ का अनन्य भक्त’ बताया। उन्होंने कहा:

“समय खुद जिनकी इच्छा से प्रकट होता है, आज उन देवाधिदेव महादेव की विग्रह प्रतिष्ठा के हम 75 वर्ष मना रहे हैं। जो हलाहल पीकर नीलकंठ हो गए, आज उन्हीं की शरण में यहां सोमनाथ अमृत महोत्सव हो रहा है।”

प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि प्रथम विध्वंस के 1,000 वर्ष बाद भी सोमनाथ के अविनाशी होने का गर्व और आज इस आधुनिक स्वरूप की प्राण प्रतिष्ठा के 75 वर्ष पूरे होना एक ऐतिहासिक संयोग है।

उन्होंने कहा, “75 साल पहले आज के ही दिन सोमनाथ मंदिर की पुनर्स्थापना कोई साधारण अवसर नहीं था।

1947 में भारत आजाद हुआ था, तो 1951 में सोमनाथ की प्राण प्रतिष्ठा ने भारत की स्वतंत्र चेतना का उद्घोष किया था।”

पोखरण का जिक्र: ‘दुनिया की कोई ताकत भारत को झुका नहीं सकती’

अपने संबोधन में पीएम मोदी ने 11 मई के ऐतिहासिक महत्व को एक और घटना से जोड़ा। उन्होंने 11 मई 1998 को राजस्थान के पोखरण में हुए परमाणु परीक्षणों का जिक्र करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साहस को याद किया।

पीएम मोदी ने कहा, “देश ने 11 मई को पहले 3 परमाणु परीक्षण किए। दुनिया में तूफान आ गया और तमाम शक्तियां भारत को दबोचने के लिए मैदान में उतर आईं।

आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए गए। लेकिन 13 मई को फिर 2 और परीक्षण हुए, जिससे दुनिया को पता चला कि भारत की राजनीतिक इच्छाशक्ति कितनी अटल है।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि अटल जी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने दिखा दिया था कि हमारे लिए ‘राष्ट्र प्रथम’ है।

पोखरण परीक्षण को ‘ऑपरेशन शक्ति’ नाम दिया गया था, क्योंकि शिव के साथ ‘शक्ति’ की आराधना ही भारत की सनातन परंपरा रही है।

We don’t spam! Read our privacy policy for more info.