PM Modi on AI: ‘भारत बनेगा दुनिया का AI हब’; पीएम मोदी ने दिग्गजों के साथ मंथन में दिया ‘एथिकल एआई’ का मंत्र
“टाटा, अंबानी से लेकर विप्रो तक… पीएम मोदी ने AI एक्सपर्ट्स और सीईओ के साथ की हाई-लेवल मीटिंग। कहा- यूपीआई की तरह अब एआई में भी बजना चाहिए भारत का डंका”
[नई दिल्ली] — The Politics Again ब्यूरो: संतोष सेठ की रिपोर्ट
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के भविष्य को लेकर एक उच्चस्तरीय बैठक की।
7, लोक कल्याण मार्ग स्थित प्रधानमंत्री आवास पर हुई इस बैठक में देश की दिग्गज आईटी कंपनियों के सीईओ और एआई विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।
‘पीएम मोदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत को एआई के क्षेत्र में भी दुनिया का नेतृत्व करना होगा, ठीक वैसे ही जैसे हमने यूपीआई (UPI) के जरिए दुनिया को अपनी तकनीकी ताकत दिखाई है।
मीटिंग की 5 बड़ी बातें (Key Highlights):
पारदर्शी और सुरक्षित एआई: पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि एआई का विकास ‘पारदर्शी, निष्पक्ष और सुरक्षित’ होना चाहिए।
उन्होंने एआई के नैतिक उपयोग (Ethical Use) पर किसी भी तरह का समझौता न करने की बात कही।
भारत बनेगा ‘ग्लोबल हब’: प्रधानमंत्री ने सीईओ से अपील की कि वे भारत को वैश्विक एआई प्रयासों के लिए एक ‘उपयुक्त केंद्र’ (Hub) बनाने की दिशा में काम करें।
उनका मानना है कि भारत की विशालता, विविधता और लोकतंत्र का अनूठा संगम दुनिया को हमारे डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर भरोसा करने की वजह देता है।
स्वदेशी तकनीक पर जोर: पीएम ने प्रमुख क्षेत्रों में विदेशी तकनीक पर निर्भर रहने के बजाय ‘स्वदेशी प्रौद्योगिकी’ विकसित करने का आह्वान किया। साथ ही, डेटा सुरक्षा (Data Security) को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही।
स्किल डेवलपमेंट: प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का एआई इकोसिस्टम देश के मूल्यों को प्रतिबिंबित करना चाहिए।
इसके लिए युवाओं के कौशल विकास (Skill Development) और टैलेंट बिल्डिंग पर फोकस करना जरूरी है।
AI इम्पैक्ट समिट: आगामी ‘AI इम्पैक्ट समिट’ का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा कि यह कंपनियों और व्यक्तियों के लिए नए अवसरों को तलाशने का एक बड़ा मंच होगा।
कौन-कौन हुआ शामिल?
इस राउंडटेबल कॉन्फ्रेंस में भारत की टॉप टेक कंपनियों के प्रमुख मौजूद रहे। इनमें विप्रो (Wipro), टीसीएस (TCS), एचसीएल टेक (HCL Tech), जोहो कॉर्पोरेशन (Zoho), एलटीआई माइंडट्री, जियो प्लेटफॉर्म्स (Jio), अदानीकॉनेक्स और नेटवेब टेक्नोलॉजीज के सीईओ शामिल थे।
इसके अलावा, अकादमिक जगत से IIIT हैदराबाद, IIT मद्रास और IIT बॉम्बे के विशेषज्ञों ने भी अपने विचार रखे। बैठक में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और राज्य मंत्री जितिन प्रसाद भी मौजूद थे।
प्रधानमंत्री का यह विजन साफ करता है कि सरकार एआई को केवल एक तकनीक नहीं, बल्कि भारत के विकास के अगले बड़े हथियार के रूप में देख रही है।
अब देखना यह होगा कि भारतीय कंपनियां इस ‘मेड इन इंडिया एआई’ के सपने को कितनी जल्दी हकीकत में बदल पाती हैं।











