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पीएम मोदी इंडोनेशियाई संसद में : ‘हमारा विजन विस्तार नहीं विकास है’

इंडोनेशिया की संसद में गूंजी पीएम मोदी की आवाज: कहा- ‘हमारा विजन विस्तार नहीं विकास है, समुद्र हमें बांटता नहीं जोड़ता है”

जकार्ता : THE POLITICS AGAIN डेस्क:  संतोष सेठ की रिपोर्ट

अपनी तीन देशों की महत्वपूर्ण यात्रा के पहले चरण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (7 जुलाई 2026) को इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में एक ऐतिहासिक पल को जिया।

 

इंडोनेशिया के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘बिंतंग आदिपूर्णा’ से सम्मानित होने के ठीक बाद, पीएम मोदी ने इंडोनेशिया की संसद को संबोधित किया।

संसद में उनका संबोधन भारत और इंडोनेशिया के सदियों पुराने सभ्यतागत रिश्तों, लोकतांत्रिक मूल्यों और साझा समुद्री विरासत पर केंद्रित रहा।

‘लोकतंत्र की जननी’ के नागरिक के तौर पर दी शुभकामनाएं

इतने बड़े मंच से बोलते हुए पीएम मोदी ने सबसे पहले 140 करोड़ भारतीयों की ओर से इंडोनेशिया के लोगों को शुभकामनाएं दीं।

उन्होंने कहा, “यहाँ आना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। 140 करोड़ भारतीयों का प्रतिनिधित्व करते हुए और ‘लोकतंत्र की जननी’ (Mother of Democracy) के एक गर्वित नागरिक के तौर पर, मैं आप सभी को शुभकामनाएं देता हूं।”

पीएम मोदी ने सुबह मिले भव्य स्वागत और सर्वोच्च सम्मान के लिए राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो और वहां की जनता का विनम्रतापूर्वक आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा, “आज सुबह इंडोनेशिया के लोगों ने जो प्यार और गर्मजोशी भरा स्वागत किया, उसे मैं कभी नहीं भूल सकता।”

भारत का विजन: विस्तार नहीं, विकास है

संसद को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने पूरी दुनिया को भारत की विदेश नीति का स्पष्ट संदेश दिया।

उन्होंने कहा कि भारत का वैश्विक नजरिया क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं या विस्तारवाद (Expansionism) पर आधारित नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह से समावेशी विकास पर केंद्रित है।

उन्होंने अपने मूल मंत्र “सबका साथ, सबका विकास” पर जोर देते हुए कहा कि यह सोच सहयोग और सामूहिक भागीदारी के जरिए तरक्की के प्रति भारत की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

उन्होंने इंडोनेशियाई सांसदों से कहा कि वे आज इसी साझेदारी और सामूहिक विकास का संदेश लेकर उनके बीच आए हैं।

“समुद्र भारत और इंडोनेशिया को जोड़ता है, अलग नहीं करता”

भौगोलिक निकटता का बेहद खूबसूरती से जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भले ही दोनों देशों की राजधानियां हजारों किलोमीटर दूर हों, लेकिन हमारे बीच का समुद्री फासला (अंडमान और निकोबार से) सिर्फ 150 किलोमीटर के आसपास ही है।

  • उन्होंने कहा, “दुनिया के कई हिस्सों में समुद्र ने जहां दूरियां पैदा की हैं, वहीं इसने भारत और इंडोनेशिया को हमेशा एक-दूसरे से जोड़े रखा है।”

  • प्रधानमंत्री ने बताया कि दोनों देशों के नाम भी ‘हिंद महासागर’ के साथ गहरे ऐतिहासिक जुड़ाव को दर्शाते हैं। पीढ़ियों से दोनों देशों के बंदरगाह व्यापार, संस्कृति और सभ्यताओं के मिलन के सबसे बड़े केंद्र रहे हैं।

मजबूत रणनीतिक और समुद्री साझेदारी का आह्वान

अपने संबोधन के अंत में, प्रधानमंत्री मोदी ने इसी साझा विरासत को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। विशाल हिंद महासागर से प्रेरणा लेते हुए उन्होंने इंडोनेशिया से आग्रह किया कि वह भारत के साथ मिलकर अपनी समुद्री साझेदारी (Maritime Partnership) की अपार संभावनाओं का पूरा लाभ उठाए।

पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि दोनों देशों को सहयोग, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय समृद्धि के नए रास्ते बनाने चाहिए, जिससे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक सुरक्षित और समृद्ध भविष्य का निर्माण हो सके।

Santosh SETH

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