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पेरिस स्पेस समिट: PM मोदी ने अंतरिक्ष में ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का दिया संदेश

पेरिस स्पेस समिट में PM मोदी का ग्लोबल संदेश: “अंतरिक्ष में भी ‘वसुधैव कुटुंबकम’, टकराव नहीं सहयोग का रास्ता चुने दुनिया”

पेरिस (वर्चुअल) : संतोष सेठ की रिपोर्ट : THE POLITICS AGAIN

फ्रांस की राजधानी पेरिस में आयोजित अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष शिखर सम्मेलन को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत का स्पष्ट और दूरदर्शी अंतरिक्ष दृष्टिकोण दुनिया के सामने रखा।

 

पीएम मोदी ने कहा कि अंतरिक्ष की बढ़ती भीड़ और नई एजेंसियों के प्रवेश से चुनौतियां बढ़ रही हैं। ऐसे में हमें टकराव के बजाय सहयोग और सबको साथ लेकर चलने का रास्ता चुनना होगा।

धरती से अंतरिक्ष तक ‘वसुधैव कुटुंबकम’

पीएम मोदी ने भारत की विदेश नीति के मूल सिद्धांत ‘वसुधैव कुटुंबकम’ (एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य) का जिक्र करते हुए कहा कि अब इस भावना को धरती से आगे अंतरिक्ष तक ले जाने का समय आ गया है।

  • भारत अंतरराष्ट्रीय कानूनों पर आधारित एक सुरक्षित और टिकाऊ अंतरिक्ष व्यवस्था का समर्थन करता है।

  • पीएम ने जोर दिया कि वैज्ञानिक आंकड़ों को पूरी पारदर्शिता के साथ सभी की भलाई के लिए साझा किया जाना चाहिए।

ISRO: दुनिया का भरोसा और जनकल्याण

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की पीठ थपथपाते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि अपनी कम लागत और सटीक उड़ानों से इसरो ने वैश्विक स्तर पर सम्मान कमाया है।

  • इसरो की क्षमताएं आज सीधे किसानों और मछुआरों के जीवन को आसान बना रही हैं (मौसम, आपदा प्रबंधन, नेविगेशन)।

  • भारत अब तक 34 देशों के 430 से अधिक उपग्रहों को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में भेज चुका है।

भविष्य के महा-संकल्प: 2035 का स्पेस स्टेशन, 2040 का मून मिशन

पीएम मोदी ने चंद्रयान-3 (चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर ऐतिहासिक लैंडिंग) और आदित्य एल-1 (सूर्य मिशन) की सफलताओं का जिक्र करते हुए भविष्य के दो बड़े लक्ष्यों का ऐलान किया:

  1. 2035 तक भारत अपना खुद का अंतरिक्ष स्टेशन (Space Station) स्थापित करेगा।

  2. 2040 तक किसी भारतीय को चंद्रमा की सतह पर भेजने का संकल्प लिया गया है।

निजी क्षेत्र और फ्रांस के साथ साझेदारी

भारत के तेजी से बढ़ते निजी अंतरिक्ष क्षेत्र (Private Space Sector) का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा कि भारतीय उद्यमों की ऊर्जा इसरो को नई ऊंचाइयां दे रही है।

1960 के दशक से ही फ्रांस को एक भरोसेमंद साझेदार बताते हुए मोदी ने अर्थ ऑब्जर्वेशन (Earth Observation) और आधुनिक तकनीकों में दोनों देशों के मजबूत संबंधों की सराहना की।

अंत में, उन्होंने फ्रांस और पूरी दुनिया को भारत के अगले अंतरिक्ष सफर में ‘हमसफर’ बनने का खुला न्योता दिया।

Santosh SETH

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