Operation Ghazab Lil Haq

पाकिस्तान-अफ़ग़ानिस्तान में ‘खुली जंग’: पाक का ‘ऑपरेशन गजब लिल हक’, 133 तालिबानी लड़ाकों के खात्मे का दावा | The Politics Again

“महायुद्ध की आहट! पाकिस्तान ने अफ़ग़ानिस्तान पर छेड़ा ‘ऑपरेशन गजब लिल हक’, काबुल-कंधार में एयरस्ट्राइक, 133 तालिबानियों के खात्मे का दावा “

इस्लामाबाद/काबुल (The Politics Again) :संतोष सेठ की रिपोर्ट 

डूरंड लाइन पर सुलगती चिंगारी अब एक ‘खुली जंग’ में तब्दील हो चुकी है। अफगान तालिबान के हमलों से बौखलाए पाकिस्तान ने अफ़ग़ानिस्तान के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन गजब लिल हक’ (Operation Ghazab Lil Haq) शुरू कर दिया है।

पाकिस्तानी सेना और वायुसेना ने काबुल, कंधार और पकतिया में तालिबान के अहम ठिकानों पर ताबड़तोड़ एयरस्ट्राइक की है, जिसमें 133 से अधिक तालिबानी लड़ाकों के मारे जाने का दावा किया गया है।

ऑपरेशन ‘गजब लिल हक’: तबाही का मंजर

पाकिस्तान के सूचना मंत्री अत्ताउल्लाह तरार ने इस सैन्य अभियान की भयावहता का ब्यौरा देते हुए बताया कि पाक सेना के एक्शन में 133 अफगान तालिबान लड़ाके मारे गए हैं और 200 से अधिक घायल हुए हैं।

पाकिस्तानी वायुसेना ने काबुल में दो ब्रिगेड मुख्यालय और कंधार में एक कोर मुख्यालय को नेस्तनाबूद कर दिया है।

पाक सेना के दावे के अनुसार नुकसान:

  • तालिबान की 27 चौकियां नष्ट और 9 पर कब्जा।
  • 2 कोर मुख्यालय, 3 ब्रिगेड मुख्यालय और 3 बटालियन मुख्यालय तबाह।
  • 2 गोला-बारूद डिपो और 1 लॉजिस्टिक बेस खाक।
  • 80 से अधिक टैंक, तोपें और बख्तरबंद वाहन नष्ट।

‘अब युद्ध छिड़ गया है, तालिबान भारत का मोहरा बन गया’: रक्षा मंत्री

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इसे ‘खुली जंग’ करार दिया है। उन्होंने एक बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, “तालिबान ने अफ़ग़ानिस्तान को भारत की कॉलोनी (उपनिवेश) बना दिया है और वहां दुनियाभर के आतंकियों को इकट्ठा कर रहा है। तालिबान भारत का मोहरा बन गया है, अब हमारा धैर्य खत्म हो चुका है।”

वहीं, पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी, पीएम शहबाज शरीफ और गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने एक सुर में कहा है कि देश की अखंडता से समझौता नहीं होगा और इस आक्रामकता का गंभीर परिणाम भुगतना होगा।

अफ़ग़ानिस्तान का पलटवार: दावों को किया खारिज, तेज किए हमले

पाकिस्तान के इन दावों के बीच अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल में कम से कम तीन भीषण धमाकों की आवाज सुनी गई।

तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबिहुल्लाह मुजाहिद ने पाकिस्तानी हवाई हमलों की पुष्टि तो की, लेकिन 133 लड़ाकों की मौत के दावे को सिरे से खारिज कर दिया।

इसके जवाब में अफ़ग़ानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने सीमा पर ‘बड़े पैमाने पर आक्रामक अभियान’ की घोषणा कर दी है।

जमीनी झड़पों में अफ़ग़ानिस्तान के 8 सैनिकों की जान गई है, जबकि तोरखम सीमा के पास पाकिस्तानी गोलाबारी में कई अफगान नागरिक घायल हुए हैं।

क्या है 132 साल पुराना ‘डूरंड लाइन’ विवाद?

इस खूनी जंग की जड़ 132 साल पुराना सीमा विवाद है।

  • इतिहास: 1893 में ब्रिटिश भारत के विदेश सचिव सर हेनरी मोर्टिमर डूरंड और अफ़ग़ानिस्तान के अमीर अब्दुर रहमान खान के बीच 2430 किमी लंबी सीमा रेखा खींची गई थी।

  • विवाद की वजह: यह रेखा पश्तून समुदाय को दो हिस्सों (पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान) में बांटती है। अफ़ग़ानिस्तान (और अब तालिबान) ने इसे कभी मान्यता नहीं दी और इसे मनमाना मानता है।

  • ताजा तनाव: पाकिस्तान द्वारा सीमा पर की जा रही बाड़बंदी (जो 2025 के मध्य तक 90% पूरी हो गई थी) को तालिबान अपना क्षेत्रीय अतिक्रमण मानता है और लगातार बाड़ उखाड़ रहा है, जिसने इस महायुद्ध की नींव रखी।

दोनों परमाणु और हथियारों से लैस पड़ोसियों के बीच छिड़ी इस जंग ने पूरे दक्षिण एशिया की शांति को खतरे में डाल दिया है।

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