सरकार और सेना ने स्पष्ट किया है कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के वीर शहीदों को समय-समय पर सर्वोच्च सैन्य सम्मान दिया गया है, उनके बलिदान को छिपाने के दावे पूरी तरह भ्रामक और तथ्यहीन हैं।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ के शहीदों पर सरकार का बड़ा पलटवार: कहा- वीर जवानों का बलिदान कभी नहीं छिपाया गया, सोशल मीडिया के दावों को बताया ‘भ्रामक’
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
‘ऑपरेशन सिंदूर’ (Operation Sindoor) में शहीद हुए 6 वीर जवानों के सम्मान को लेकर देश में छिड़ी सियासी बहस के बीच केंद्र सरकार और भारतीय सेना ने एक विस्तृत और कड़ा आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया है।
प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के माध्यम से जारी किए गए इस बयान में उन सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया गया है, जिनमें कहा जा रहा था कि इन सैनिकों के सर्वोच्च बलिदान को पहली बार सार्वजनिक किया गया है या उसे छिपाया गया था। सरकार ने इन दावों को पूरी तरह भ्रामक और तथ्यात्मक रूप से गलत बताया है।
बयान में स्पष्ट किया गया है कि राष्ट्र ने इन शहीद वीरों को सोशल मीडिया पर चल रही हालिया खबरों के सामने आने से बहुत पहले ही श्रद्धांजलि अर्पित कर दी थी। सरकार ने सिलसिलेवार तरीके से बताया कि जवानों को कब और कैसे सम्मानित किया गया:
11 मई, 2025: तत्कालीन डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशन्स (DGMO) ने एक आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन वीर सैनिकों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी थी और स्पष्ट रूप से बताया था कि जवानों ने कर्तव्य निभाते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया है।
14 अगस्त, 2025: एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से इन बहादुर सैनिकों को उनके अद्वितीय साहस के लिए ‘वीरता पुरस्कारों’ से सम्मानित किए जाने की सार्वजनिक घोषणा की गई थी।
देश लगातार इन वीर नायकों का सम्मान करता रहा है।
8 अक्टूबर, 2025: एक विशेष समारोह के दौरान वायु सेना प्रमुख (Air Chief) ने संबंधित वीर सैनिक के परिजनों को वीरता सम्मान प्रदान किया था।
15 जनवरी, 2026: जयपुर में आयोजित ‘आर्मी डे परेड’ के भव्य समारोह के दौरान सेना प्रमुख (Army Chief) ने तीन शहीद सैनिकों के परिजनों को व्यक्तिगत रूप से सेना मेडल (वीरता) प्रदान किया था।
राष्ट्रीय समर स्मारक (National War Memorial) पर शहीदों के नाम देर से अंकित किए जाने के आरोपों पर भी मंत्रालय ने स्थिति साफ की है।
स्पष्ट किया गया है कि स्मारक पर शहीद सैनिकों के नाम अंकित करने की प्रक्रिया एक व्यवस्थित और स्पष्ट प्रोटोकॉल के तहत की जाती है।
भारतीय सशस्त्र बल इस निर्धारित प्रक्रिया का पूरी गरिमा और सम्मान के साथ पालन करते हैं। इसलिए, यह कहना कि प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया, तथ्यात्मक रूप से बिल्कुल गलत है।
सरकार ने इस पूरे मामले पर राजनीति होने पर गहरा खेद व्यक्त किया है। बयान में कहा गया है कि, “इस तरह की तथ्यहीन बहस और दावे न केवल भ्रम फैलाते हैं, बल्कि देश की सेवा में प्राण न्योछावर करने वाले वीरों के शोकाकुल परिवारों को अनावश्यक पीड़ा भी देते हैं। यह वीर सैनिकों के सम्मान को भी ठेस पहुंचाने का जोखिम पैदा करता है।”
सभी संबंधित पक्षों और मीडिया से आग्रह किया गया है कि शहीदों से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग करते समय पूरी जिम्मेदारी और संयम बरतें।
भारतीय सशस्त्र बलों ने दोहराया है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के ये छह वीर सैनिक राष्ट्र के नायक हैं और उनकी स्मृति का सम्मान हमेशा उसी गरिमा और श्रद्धा के साथ किया जाएगा, जिसके वे वास्तविक हकदार हैं।
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