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रेलवे ट्रैक पर हाथियों की मौत रोकने का मेगा प्लान: बनेंगे 705 अंडरपास/ओवरपास | The Politics Again

“हाथियों को बचाने के लिए ‘प्रोजेक्ट एलिफेंट’ का मेगा प्लान: रेलवे ट्रैक पर मौतों को रोकने के लिए बनेंगे 705 क्रॉसिंग और AI करेगा निगरानी “

देहरादून (The Politics Again): संतोष सेठ की रिपोर्ट 

भारत में रेलवे पटरियों पर कटकर होने वाली हाथियों की दर्दनाक मौतों को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा और वैज्ञानिक कदम उठाया है।

देहरादून स्थित भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) में 10-11 मार्च 2026 को आयोजित एक उच्च स्तरीय राष्ट्रीय कार्यशाला में ‘प्रोजेक्ट एलिफेंट’ और रेल मंत्रालय ने मिलकर एक विस्तृत ‘शमन योजना’ (Mitigation Plan) तैयार की है।

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) की इस पहल के तहत अब देश भर के संवेदनशील वन क्षेत्रों में रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को ‘वन्यजीवों के अनुकूल’ (Wildlife-friendly) बनाया जाएगा।

देश के 77 संवेदनशील रेलवे खंडों की हुई पहचान

भारत में दुनिया के 60% से अधिक एशियाई हाथी पाए जाते हैं। असम, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, ओडिशा, तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों में रेलवे लाइनों के विस्तार से हाथियों के प्राकृतिक आवास प्रभावित हुए हैं।

  • वन्यजीव विशेषज्ञों और रेलवे की संयुक्त टीमों ने 3,452.4 किमी में फैले 127 रेलवे खंडों का विस्तृत सर्वेक्षण किया।

  • इनमें से 14 राज्यों में फैले 1,965.2 किमी के 77 सबसे संवेदनशील खंडों को हाथियों की सुरक्षा के लिए प्राथमिकता पर रखा गया है।

हाथियों के सुरक्षित सफर के लिए बनेंगी 705 नई संरचनाएं

इन प्राथमिकता वाले 77 हिस्सों में ट्रेन दुर्घटनाओं को रोकने के लिए कुल 705 शमन संरचनाएं (Mitigation Structures) बनाने की सिफारिश की गई है। इनमें शामिल हैं:

  • 503 रैंप और लेवल क्रॉसिंग
  • 65 नए अंडरपास (Underpass)
  • 22 ओवरपास (Overpass)
  • 72 पुलों का विस्तार और संशोधन
  • 39 बाड़ या खाई संरचनाएं और 4 निकास रैंप

हाथियों की जान बचाएगी AI और ‘सेंसर’ तकनीक (IDS & DAS)

स्ट्रक्चरल बदलावों के साथ-साथ अब हाथियों को बचाने के लिए अत्याधुनिक तकनीक का भी इस्तेमाल किया जा रहा है:

  1. घुसपैठ पहचान प्रणाली (IDS): डिस्ट्रीब्यूटेड एकॉस्टिक सिस्टम (DAS) पर आधारित यह सेंसर तकनीक पटरियों के पास हाथियों की आहट पहचान लेती है। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (असम) में इसके सफल पायलट प्रोजेक्ट के बाद अब इसे उत्तर बंगाल और ओडिशा में लागू किया जा रहा है।

  2. AI-आधारित थर्मल कैमरे: तमिलनाडु के मदुक्कराई में थर्मल और मोशन-सेंसिंग तकनीक से लैस 12 टावर-माउंटेड कैमरों का नेटवर्क लगाया गया है। यह 100 मीटर के दायरे में हाथी को देखते ही रेलवे अधिकारियों को अलर्ट भेजता है, जिससे ट्रेन की गति तुरंत धीमी कर दी जाती है।

नई रेल परियोजनाओं में बदलाव

कार्यशाला में इस बात पर जोर दिया गया कि अब से नई रेलवे लाइनों में वन्यजीवों की सुरक्षा का ध्यान पहले से रखा जाएगा।

उदाहरण के लिए, असम में अजारा-कामाख्या रेलवे लाइन के 3.5 किलोमीटर लंबे संवेदनशील हिस्से को ऊंचा (Elevated) किया जाएगा, ताकि रानी-गरभंगा-दीपोर बील कॉरिडोर से हाथी सुरक्षित नीचे से गुजर सकें। इसी तरह छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में भी अहम बदलाव किए जा रहे हैं।

Santosh SETH

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