तेज और हरित इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए एकल अणु का उपयोग करके यांत्रिक रूप से गेटेड ट्रांजिस्टर विकसित किया गया

“यांत्रिक बलों द्वारा नियंत्रित एकल अणुओं का उपयोग करके विकसित किया गया एक अनूठा ट्रांजिस्टर क्वांटम सूचना प्रोसेसिंग, अल्ट्रा-कॉम्पैक्ट इलेक्ट्रॉनिक्स और सेंसिंग अनुप्रयोगों जैसे क्षेत्रों में प्रगति का मार्ग प्रशस्त कर सकता है”

नई दिल्ली 03 / 09 / 2024 विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा जारी 

इलेक्ट्रॉनिक्स में एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए, एस. एन. बोस नेशनल सेंटर फॉर बेसिक साइंसेज, जो कि एक स्वायत संस्थान है, के वैज्ञानिकों ने पारंपरिक विद्युत संकेतों के बजाय यांत्रिक बलों द्वारा नियंत्रित एकल अणुओं का उपयोग करके एक अनूठा ट्रांजिस्टर विकसित किया है।

एक पीजोइलेक्ट्रिक स्टैक का उपयोग करते हुए, शोधकर्ताओं ने एक मैक्रोस्कोपिक धातु के तार को सावधानीपूर्वक तोड़ते हैं, ताकि फेरोसिन जैसे एकल अणु के लिए सटीक आकार का सब-नैनोमीटर गैप बनाया जा सके।

इस तकनीक को यांत्रिक रूप से नियंत्रित ब्रेक जंक्शन (एमसीबीजे) के रूप में जाना जाता है। यह अणु, दो साइक्लोपेंटैडिएनिल (सीपी) रिंगों के बीच एक लोहे के परमाणु से बना है (अणु का आरेख देखें, चित्र 1), यांत्रिक रूप से हेरफेर किए जाने पर परिवर्तित विद्युत व्यवहार प्रदर्शित करता है, जो आणविक स्तर पर इलेक्ट्रॉन परिवहन को नियंत्रित करने में यांत्रिक गेटिंग की क्षमता को दर्शाता है।

प्रयोगों और गणनाओं के माध्यम से, डॉ. अतींद्र नाथ पाल और बिस्वजीत पाबी ने अपनी टीम के साथ मिलकर पाया कि सिल्वर इलेक्ट्रोड के बीच फेरोसिन अणुओं का अभिविन्यास ट्रांजिस्टर के प्रदर्शन को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करता है।

आणविक अभिविन्यास के आधार पर, यह उपकरण जंक्शन के माध्यम से विद्युत चालकता को बढ़ा या घटा सकता है, जो ट्रांजिस्टर डिज़ाइन में आणविक ज्यामिति के महत्व को रेखांकित करता है।

आगे के शोध में कमरे के तापमान पर फेरोसिन के साथ सोने के इलेक्ट्रोड की जांच की गई। इस संयोजन के परिणामस्वरूप आश्चर्यजनक रूप से कम प्रतिरोध हुआ, जो प्रतिरोध की मात्रा (लगभग 12.9 kΩ) से लगभग पाँच गुना था, लेकिन ये आणविक जंक्शन (लगभग 1 MΩ) के सामान्य प्रतिरोध से काफी कम था।

इससे कम-शक्ति वाले आणविक उपकरणों को बनाने की संभावना को बल मिलता है। ये उपकरण कम-शक्ति वाले आणविक उपकरणों, क्वांटम सूचना प्रोसेसिंग और सेंसिंग अनुप्रयोगों जैसे क्षेत्रों में प्रगति का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।

https://doi.org/10.1021/acs.nanolet.3c00043

Santosh SETH

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