बसपा प्रमुख मायावती ने भतीजे आकाश आनंद को एक बार फिर से बहुजन समाज पार्टी का राष्ट्रीय संयोजक (नेशनल कोऑर्डिनेटर) नियुक्त कर दिया है।
बसपा में बड़ा उलटफेर: मायावती ने आकाश आनंद को फिर बनाया नेशनल कोऑर्डिनेटर, ससुर अशोक सिद्धार्थ के संन्यास के बाद हुई वापसी”
लखनऊ/नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों (UP Assembly Election) से पहले बहुजन समाज पार्टी (BSP) की प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने एक बड़ा सियासी फैसला लिया है।
अपने पुराने फैसले को पलटते हुए मायावती ने भतीजे आकाश आनंद (Akash Anand) को एक बार फिर से पार्टी का नेशनल कोऑर्डिनेटर (राष्ट्रीय संयोजक) नियुक्त कर दिया है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर एक लंबे पोस्ट के जरिए उन्होंने इस बड़े संगठनात्मक बदलाव और आकाश के ससुर अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास लेने की जानकारी भी साझा की।
कुछ समय पहले ही मायावती ने अनुशासन का हवाला देते हुए आकाश आनंद को पार्टी के इस अहम पद से हटा दिया था।
अपने ताज़ा बयान में मायावती ने स्पष्ट किया, “मेरा निजी नहीं बल्कि पूरा ‘बहुजन समाज’ ही मेरा विराट परिवार है। अनुशासन बनाए रखने के लिए मैंने पिछले दिनों कई सख्त फैसले लिए, जिनमें मेरे भाई-बहन और उनके परिवार भी अपवाद नहीं रहे।”
उन्होंने बताया कि आकाश आनंद का व्यक्तित्व काफी हद तक ठीक रहा है, लेकिन कुछ कारणों से पार्टी संगठन में बदलाव करने पड़े और अंततः आकाश के ससुर अशोक सिद्धार्थ को राजनीति से संन्यास (Retirement from Politics) लेने के लिए मजबूर होना पड़ा।
अशोक सिद्धार्थ के संन्यास के बाद, आकाश आनंद की कार्यशैली और व्यवहार में आए सकारात्मक बदलाव को उनकी वापसी का मुख्य कारण माना जा रहा है।
मायावती ने कहा कि आकाश द्वारा ‘एक्स’ पर किए गए हालिया पोस्ट की काफी चर्चा है, जिससे उनकी निष्ठा प्रमाणित होती है।
पार्टी के अधिकांश नेताओं और कार्यकर्ताओं की मांग पर, तथा आकाश के पिता (आनंद कुमार) और छोटे भाई ईशान आनंद की सहमति के बाद, आकाश के अनुरोध को स्वीकार किया गया है।
मायावती ने यह भी बताया कि ईशान आनंद ने बिना किसी पद के निस्वार्थ भाव से पार्टी के लिए काम करने की इच्छा जताई है।
मायावती ने स्पष्ट किया कि, “पार्टी व मूवमेंट के हित में काफी सोच-विचार के बाद आकाश आनंद को पुनः नेशनल कन्वेनर बनाया जा रहा है।”
उन्होंने उम्मीद जताई कि अशोक सिद्धार्थ के संन्यास के बाद अब पार्टी में सब कुछ सुचारू रूप से चलेगा और बार-बार बदलाव की जरूरत नहीं पड़ेगी।
हालांकि, उन्होंने एक चेतावनी भरे लहजे में यह भी जोड़ा कि “यह काफी कुछ आकाश आनंद के ऊपर भी निर्भर करेगा।”
इस फैसले के साथ मायावती ने आकाश, ईशान और उनके पिता आनंद कुमार को अपना आशीर्वाद दिया और हर परिस्थिति में साथ खड़े ‘बहुजन समाज’ और शुभचिंतकों का आभार व्यक्त किया।
यह कदम यूपी विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी के युवा कैडर को एकजुट करने और बसपा को नई ऊर्जा देने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
| विषय / घटनाक्रम | महत्वपूर्ण जानकारी |
| नई जिम्मेदारी (पुनर्बहाली) | आकाश आनंद फिर बने बसपा के नेशनल कोऑर्डिनेटर (राष्ट्रीय संयोजक)। |
| वापसी का मुख्य कारण | कार्यशैली में सुधार और पार्टी नेताओं/कार्यकर्ताओं का भारी अनुरोध। |
| बड़ा राजनीतिक बदलाव | आकाश के ससुर अशोक सिद्धार्थ का राजनीति से संन्यास। |
| मायावती का कड़ा संदेश | “अनुशासन सर्वोपरि, परिवार के सदस्य भी अपवाद नहीं।” |
| ईशान आनंद की भूमिका | बिना किसी पद के पार्टी के दिशा-निर्देशों पर काम करने का संकल्प। |
| भविष्य की चेतावनी | पार्टी सुचारू चलेगी, लेकिन यह आकाश आनंद के काम पर भी निर्भर करेगा। |
| राजनीतिक प्रभाव | आगामी यूपी विधानसभा चुनावों के लिए युवा कैडर को मजबूत करना। |
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