Manipur News: मणिपुर से हटेगा राष्ट्रपति शासन, फिर बनेगी BJP सरकार! तरुण चुग बने ऑब्जर्वर, दिल्ली में ‘फॉर्मूला’ तय
“पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में करीब एक साल से जारी राष्ट्रपति शासन (President’s Rule) जल्द ही खत्म हो सकता है”
नई दिल्ली ‘The Politics Again’ संतोष सेठ की रिपोर्ट
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने राज्य में दोबारा लोकप्रिय सरकार बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मंगलवार को दिल्ली में होने वाली अहम बैठक के लिए पार्टी ने तरुण चुग को ‘नेशनल ऑब्जर्वर’ नियुक्त किया है।
सूत्रों की मानें तो राज्य में शांति बनाए रखने के लिए बीजेपी मैतेयी और कुकी समुदाय के बीच सत्ता का संतुलन बनाने (Power Sharing) के फॉर्मूले पर विचार कर रही है।
मंगलवार को होगी विधायक दल की बैठक
मणिपुर में सरकार गठन की सुगबुगाहट के बीच एनडीए (NDA) के तमाम विधायक दिल्ली पहुंच चुके हैं। करीब 20 विधायक रविवार रात ही राजधानी आ गए थे, जबकि बाकी सोमवार को पहुंचे।
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अहम बैठक: मंगलवार को सभी विधायकों की रायशुमारी के बाद विधायक दल के नेता का चुनाव किया जा सकता है।
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पर्यवेक्षक: इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए भाजपा ने तरुण चुग को जिम्मेदारी सौंपी है। भाजपा नेतृत्व यह तय करेगा कि मौजूदा हालात में सरकार बनाना कितना अनुकूल रहेगा।
मैतेयी-कुकी संतुलन: CM और डिप्टी CM पर नजर
मणिपुर में जातीय हिंसा के चलते पिछले साल सरकार गिर गई थी। अब जब हालात सुधरे हैं, तो बीजेपी कोई जोखिम नहीं लेना चाहती।
कयास लगाए जा रहे हैं कि दोनों समुदायों (मैतेयी और कुकी) को साधने के लिए एक समुदाय से मुख्यमंत्री और दूसरे से उप-मुख्यमंत्री (Deputy CM) बनाया जा सकता है। इस फॉर्मूले से राज्य में लंबे समय तक शांति और संतुलन बनाए रखने की उम्मीद है।
क्यों लगा था राष्ट्रपति शासन?
मणिपुर में 13 फरवरी, 2025 को मैतेयी और कुकी समुदायों के बीच भीषण जातीय हिंसा भड़कने के बाद राष्ट्रपति शासन लगाया गया था।
अगस्त 2025 में इसे 6 महीने के लिए और बढ़ाया गया था, जिसकी अवधि अगले सप्ताह पूरी हो रही है।
दिल्ली पहुंचे प्रमुख नेताओं में पूर्व सीएम एन. बीरेन सिंह, विधानसभा अध्यक्ष सत्यब्रता सिंह, पूर्व मंत्री वाई. खेमचंद सिंह और प्रदेश अध्यक्ष ए. शारदा देवी शामिल हैं।
केंद्रीय नेतृत्व ने पिछले कुछ महीनों में एनपीएफ (NPF), एनपीपी (NPP) और निर्दलीय विधायकों के साथ कई दौर की बातचीत की है।
“मणिपुर में लोकतंत्र की बहाली की यह कोशिश न केवल राजनीतिक दृष्टि से, बल्कि राज्य की सामाजिक स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण है। अब सबकी निगाहें दिल्ली में होने वाली बैठक पर टिकी हैं कि सीएम की कुर्सी पर कौन विराजमान होगा”











