मालदा बॉर्डर: हजारों बांग्लादेशियों की घुसपैठ नाकाम, BSF का कड़ा एक्शन
मालदा बॉर्डर पर 7 हजार बांग्लादेशियों की घुसपैठ का प्रयास, BSF ने फहराया लाल झंडा; ‘ड्रैगन’ की चाल से गरमाई राजनीति”
मालदा/कोलकाता: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
पश्चिम बंगाल की सीमा पर शनिवार को घटी एक भयावह घटना ने पूरे देश की सुरक्षा एजेंसियों और आम जनता को झकझोर कर रख दिया है।
मालदा सीमा पर जब सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने भारत में अवैध रूप से घुस रहे बांग्लादेशी नागरिकों को खदेड़ने की कोशिश की, तो बांग्लादेश सीमा रक्षक बल (BGB) और हजारों की उग्र भीड़ ने भारतीय जवानों की कार्रवाई को रोकने का दुस्साहस किया।
यह घटना केवल एक घुसपैठ का मामला नहीं है, बल्कि भारत की सुरक्षा और संप्रभुता को दी गई एक खुली चुनौती है।
मालदा सीमा पर असल में क्या हुआ?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मालदा के सुखदेवपुर गांव से सटी सीमा पर 5,000 से 7,000 बांग्लादेशी नागरिकों ने ‘नो मैन्स लैंड’ (No Man’s Land) पर भारी हंगामा खड़ा कर दिया।
करीब 15 घुसपैठियों ने भारतीय गांव में जबरन घुसने का प्रयास किया, जिसे मुस्तैद BSF जवानों ने विफल कर दिया।
स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि सुरक्षा बलों को स्थानीय ग्रामीणों से सीमा क्षेत्र से दूर रहने की अपील करनी पड़ी और खतरे का संकेत देते हुए ‘लाल झंडा’ तक फहराना पड़ा।
खौफ में ग्रामीण: ‘कंटीली बाड़ लगाओ, सुरक्षा दो’
सीमावर्ती इलाकों के नागरिक खौफ और असुरक्षा के साये में जीने को मजबूर हैं।
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पीयुष मंडल (स्थानीय निवासी): पीयुष ने बताया कि हजारों की भीड़ ने हंगामा किया। उन्होंने सरकार से मांग की है कि 1200 मीटर के खुले सीमा हिस्से में तुरंत कंटीली बाड़ लगाई जाए।
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चपला मंडल (ग्रामीण महिला): चपला का बयान स्थिति की भयावहता को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि घुसपैठिए गांवों में घुसकर महिलाओं और बच्चों को प्रताड़ित करते हैं। यह सीधे तौर पर स्थानीय नागरिकों के सम्मान और सुरक्षा पर हमला है।
सियासी उबाल और ‘घुसपैठ मुक्त बंगाल’ की दिशा में कदम
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नेता / मंत्री |
बयान और प्रतिक्रिया |
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कौस्तव बागची (भाजपा नेता) |
सीएम ममता बनर्जी पर तीखा हमला। कहा- जब अपनों ने साथ नहीं दिया, तो विभाजनकारी ताकतों से मदद मांगी। |
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सुकांत मजूमदार (केंद्रीय मंत्री) |
ग्रामीणों से घबराने के बजाय BSF और सुरक्षा बलों पर पूरा भरोसा रखने की अपील की। |
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शांतनु ठाकुर (सांसद) |
स्पष्ट किया कि बांग्लादेश की अपने नागरिकों को भारत में धकेलने की साजिश कभी सफल नहीं होगी। |
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सीएम शुभेन्दु अधिकारी (प्रस्तावित एक्शन) |
कैबिनेट की पहली बैठक में सीमा पर बाड़ लगाने के लिए जमीन सौंपने का निर्णय लेकर कड़ा संदेश दिया। |
ड्रैगन की चाल और बदलती कूटनीति का खतरा
इस सीमा विवाद के पीछे बदलती भू-राजनीति भी एक बड़ा कारण है। बांग्लादेश का झुकाव अब भारत से हटकर चीन (ड्रैगन) की तरफ तेजी से बढ़ रहा है।
बांग्लादेश के नए नेतृत्व ने अपने पहले विदेशी दौरे के लिए भारत को नजरअंदाज करते हुए चीन और मलेशिया को चुना।
चीन के साथ 17 समझौतों की तैयारी, मोंगला बंदरगाह का आधुनिकीकरण और विशेष रूप से ‘तीस्ता नदी परियोजना’ में चीनी घुसपैठ भारत के अति-संवेदनशील ‘सिलीगुड़ी कॉरिडोर’ (चिकन नेक) के लिए एक गंभीर रणनीतिक खतरा बन गई है।
नया भारत: घुसपैठियों को सख्त संदेश
इस पूरी घटना के बाद भारत ने जो कड़ा रुख अपनाया है, वह स्पष्ट करता है कि भारत की सीमा कोई ‘खुला दरवाजा’ नहीं है।
एक-एक घुसपैठिए को यह समझ लेना चाहिए कि अवैध प्रवेश पर सुरक्षा बलों की कठोर कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
भीड़ जुटाकर डराने की कोशिशें अब सफल नहीं होंगी। देश की सुरक्षा और संप्रभुता से खिलवाड़ अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।











