महाराष्ट्र विधान परिषद के स्थानीय निकाय चुनावों में 17 में से 16 सीटों पर जीत हासिल कर सत्ताधारी महायुति गठबंधन ने अपना दबदबा कायम रखा है।
महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव: 17 में से 16 सीटों पर ‘महायुति’ का क्लीन स्वीप, नागपुर में कांग्रेस विधायकों ने की क्रॉस वोटिंग”
मुंबई/नागपुर: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
महाराष्ट्र विधान परिषद (Vidhan Parishad) के स्थानीय निकाय चुनाव के नतीजे घोषित हो गए हैं, जिसमें सत्ताधारी ‘महायुति’ (Mahayuti) गठबंधन ने एकतरफा और शानदार जीत दर्ज की है।
महायुति ने कुल 17 सीटों में से 16 सीटों पर अपना कब्जा जमा लिया है। विपक्षी गठबंधन महाविकास अघाड़ी (MVA) को इस चुनाव में बड़ा झटका लगा है, खासकर नागपुर में जहां कांग्रेस को अपनों की ही क्रॉस वोटिंग का शिकार होना पड़ा।
| विवरण | जानकारी |
| कुल सीटें | 17 (स्थानीय निकाय कोटा) |
| महायुति की जीत | 16 सीटें (6 निर्विरोध + 10 मतदान के जरिए) |
| औसत मतदान | 99.02% (भंडारा-गोंदिया में 100%) |
| मतदाता | नगर निगम, नगर पालिका, जिला परिषद व पंचायत समिति के प्रतिनिधि |
महायुति की इस बंपर जीत के बीच नासिक सीट पर एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला। यहाँ बीजेपी के बागी नेता गोकुल गीते ने खेल खराब कर दिया।
उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़कर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना के आधिकारिक उम्मीदवार को करारी शिकस्त दी। 17 में से यही एकमात्र सीट रही जो महायुति के आधिकारिक खाते में नहीं गई।
सबसे दिलचस्प मुकाबला नागपुर सीट पर था, जहाँ कांग्रेस में भारी टूट देखने को मिली।
सीधी टक्कर: बीजेपी (महायुति) के डॉ. राजीव पोद्दार बनाम कांग्रेस (MVA) के अतुल लोंढे।
नतीजा: राजीव पोद्दार को 682 वोट मिले, जबकि अतुल लोंढे महज 130 वोटों पर सिमट गए। (11 वोट अमान्य रहे)।
क्रॉस वोटिंग का सच: नागपुर में कांग्रेस के पास कुल 169 वोटर थे, लेकिन उनके उम्मीदवार को सिर्फ 130 वोट मिले। इसका सीधा अर्थ है कि कांग्रेस के करीब 39 मतदाताओं ने बीजेपी के पक्ष में ‘क्रॉस वोटिंग’ की।
इस चुनाव में नागपुर के कुल 836 वोटरों में से 823 ने मतदान किया था। वहीं, AIMIM, मुस्लिम लीग और BSP ने मतदान प्रक्रिया से तटस्थ रहने का फैसला किया था।
महाराष्ट्र विधान परिषद (उच्च सदन) में कुल 78 सदस्य होते हैं और इनका कार्यकाल 6 वर्ष का होता है। हर दो साल में इसके एक-तिहाई (लगभग 26) सदस्य रिटायर होते हैं। 78 सीटों का गणित इस प्रकार है:
30 सदस्य: विधायकों (MLAs) द्वारा चुने जाते हैं।
22 सदस्य: स्थानीय निकायों (नगर निगम, जिला परिषद आदि) के जन-प्रतिनिधियों द्वारा चुने जाते हैं। (इन्हीं सीटों के लिए यह चुनाव हुआ था)
7 सदस्य: ग्रेजुएट (स्नातक) मतदाताओं द्वारा।
7 सदस्य: शिक्षक मतदाताओं द्वारा।
12 सदस्य: राज्यपाल द्वारा सीधे मनोनीत किए जाते हैं।
इन चुनावी नतीजों ने आगामी महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों से पहले सत्ताधारी महायुति गठबंधन के हौसले बुलंद कर दिए हैं, वहीं विपक्ष को अपनी रणनीति पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है।
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