लखनऊ – विधानभवन के सामने युवक ने किया आत्मदाह, 50 फीसदी झुलसा
“लखनऊ के विधानभवन के गेट नंबर नौ के पास सोमवार शाम को एक युवक ने आत्मदाह कर लिया। सिविल अस्पताल में भर्ती युवक की हालत नाजुक है। पुलिस मामले की जांच कर रही है”
लखनऊ 08 / 10 / 2024 शिवपूजन गुप्ता की रिपोर्ट
यूपी विधानभवन के गेट नंबर नौ के पास सोमवार शाम एक युवक ने पेट्रोल डालकर खुद को आग लगा ली। आनन-फानन पुलिसकमियों ने किसी तरह आग बुझाकर उसे सिविल अस्पताल में भर्ती कराया। युवक की हालत गंभीर है।
पुलिस की तफ्तीश में सामने आया कि टेंट हाउस मालिक पर युवक के सात लाख रुपये बकाये थे। रकम न देने से वह परेशान था।
आलमबाग पुलिस ने शिकायत के बाद भी सुनवाई नहीं की, इसलिए युवक ने आत्मघाती कदम उठाया। मामले में आलमबाग पुलिस के खिलाफ जांच शुरू हो गई है। टेंट हाउस मालिक को हिरासत में लिया गया है।
मिली जानकारी के अनुसार सआदतगंज के झब्बारन टोला निवासी 40 वर्षीय मुन्ना विश्वकर्मा आलमबाग में बंगाली टेंट हाउस में काम करते थे। इसके मालिक रंजीत चक्रवर्ती उन्हें सजावट व बिजली का ठेका देते थे।
मुन्ना के भांजे मनोज ने बताया कि मामा ने टेंट हाउस में वर्ष 2017 से 2019 के बीच काम किया। इस दौरान उनका करीब सात लाख रुपये बकाया था, जो रंजीत लगातार मांगने पर भी नहीं दे रहा था।
मुन्ना ने आलमबाग थाने और मवैया चौकी पर भी कई बार शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। सोमवार शाम करीब चार बजे वह विधान भवन के गेट नंबर नौ के पास पहुंचा।
उनके पास मौजूद पॉलीथीन में कुछ दस्तावेज थे। अचानक मुन्ना ने खुद को आग लगा ली। हजरतगंज इंस्पेक्टर विक्रम सिंह ने बताया कि पुलिसकर्मियों ने उन्हें सिविल में भर्ती कराया है। डॉक्टरों का कहना है कि मुन्ना का करीब 50 फीसदी शरीर झुलसा है।
आर्थिक तंगी का कर रहा था सामना
मुन्ना विश्वकर्मा के आत्मदाह करने की कोशिश के मामले की तफ्तीश में कई तथ्य उजागर हुए हैं। वह आर्थिक तंगी का सामना कर रहे थे। बिल न जमा होने से सप्ताहभर पहले उनके घर का बिजली कनेक्शन काट दिया गया था।
बच्चों की फीस भी नहीं भर पा रहे थे। वहीं आलमबाग पुलिस टेंट हाउस मालिक की कारखास बनकर उल्टा उन्हीं पर दबाव बना रही थी। इसलिए उन्होंने त्रस्त होकर आत्मघाती कदम उठाया।
परिजनों के मुताबिक ई-रिक्शा चालक मुन्ना परिवार का खर्च उठाते थे। लेकिन, उससे खर्च पूरा नहीं हो पा रहा था। वह लगातार टेंट हाउस मालिक रंजीत चक्रवर्ती से सात लाख रुपये वापस मांग रहे थे। वह उनको भगा देता था।
इसलिए वह पुलिस से मदद मांग रहे थे। वह चाहते थे कि पूरी नहीं कुछ रकम मिल जाए, जिससे उनकी माली हालत सुधर सके। लेकिन, पुलिस ने साथ नहीं दिया। बच्चों की स्कूल फीस भी नहीं जमा कर पा रहे थे।
एक अक्तूबर को बिजली विभाग के कर्मचारियों ने बिल बकाया होने पर कनेक्शन भी काट दिया था। तब वह और तनावग्रस्त हो गए थे। परिजनों का कहना है कि अगर पुलिस कार्रवाई करती तो शायद मुन्ना ऐसा कदम न उठाते।











