Lok Sabha: राहुल गांधी ने पढ़ा पूर्व आर्मी चीफ की ‘अप्रकाशित किताब’ का पन्ना, भड़के राजनाथ-शाह! 46 मिनट के हंगामे की पूरी कहानी
“सोमवार को लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान भारी हंगामा देखने को मिला”
नई दिल्ली ‘The Politics Again’ संतोष सेठ की रिपोर्ट
विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अपने भाषण के दौरान पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल एम.एम. नरवणे की एक ‘अप्रकाशित किताब’ (Unpublished Book) का हवाला दिया, जिस पर सत्ता पक्ष ने तीखा विरोध जताया।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह ने इसे नियमों का उल्लंघन बताते हुए कहा कि सदन को गुमराह किया जा रहा है।
वहीं, स्पीकर ओम बिरला ने भी राहुल को नियमों का पाठ पढ़ाया। हंगामे के चलते कार्यवाही दोपहर 3 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।
‘4 चीनी टैंक हमारी तरफ आ रहे थे’
राहुल गांधी ने अपने भाषण की शुरुआत में जनरल नरवणे के संस्मरणों का जिक्र करते हुए कहा, “आप सब ध्यान से सुनें कि मैं क्या पढ़ रहा हूं, इससे पता चल जाएगा कि कौन देशभक्त है।”
उन्होंने दावा किया कि डोकलाम में 4 चीनी टैंक भारत की तरफ बढ़ रहे थे और वे महज 100 मीटर दूर थे। राहुल ने कहा कि सरकार चीन के मुद्दे पर डरी हुई है।
राजनाथ और शाह की कड़ी आपत्ति
राहुल के इस बयान पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तुरंत हस्तक्षेप किया। उन्होंने कहा, “विपक्ष के नेता जिस किताब का जिक्र कर रहे हैं, वह अभी पब्लिश ही नहीं हुई है। किसी अप्रकाशित स्रोत का हवाला देकर सदन को गुमराह नहीं किया जा सकता।”
गृह मंत्री अमित शाह ने भी कड़े शब्दों में आपत्ति जताते हुए कहा कि बिना प्रमाणन के ऐसी बातें रिकॉर्ड में नहीं जा सकतीं। संसदीय कार्य मंत्री ने भी स्पीकर के पुराने फैसलों का हवाला दिया।
‘मैं आपका सलाहकार नहीं हूँ’
जब स्पीकर ओम बिरला ने राहुल गांधी को नियमों का पालन करने की नसीहत दी, तो राहुल ने पूछ लिया, “स्पीकर सर, आप ही बता दीजिए कि मुझे क्या बोलना चाहिए।”
इस पर ओम बिरला ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, “मैं आपका सलाहकार नहीं हूं, लेकिन स्पीकर के तौर पर यह मेरी जिम्मेदारी है कि सदन नियमों से चले।”
अखिलेश यादव आए समर्थन में
इस तकरार के बीच सपा सांसद अखिलेश यादव ने राहुल गांधी का बचाव किया। उन्होंने कहा कि चीन का मामला बेहद संवेदनशील है और विपक्ष के नेता को अपनी बात रखने की पूरी अनुमति मिलनी चाहिए। हालांकि, हंगामे और नारेबाजी के बीच कार्यवाही को स्थगित कर दिया गया।
“यह पूरा विवाद ‘राष्ट्रवाद’ और ‘संसदीय नियमों’ के इर्द-गिर्द सिमट गया है। जहां विपक्ष सरकार पर चीन के मुद्दे को छिपाने का आरोप लगा रहा है, वहीं सरकार का कहना है कि संसद में तथ्यों के बिना बात नहीं रखी जा सकती”











