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जानिए ! क्या है मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया?

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का प्रदर्शन तेज: क्या सड़क पर विरोध से हटाया जा सकता है CEC? जानें संवैधानिक प्रक्रिया”

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठाए गए सवालों के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार विपक्ष के निशाने पर आ गए हैं।

‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (SIR) के जरिए मतदाता सूची से नाम काटे जाने और सत्तारूढ़ दल को कथित फायदा पहुंचाने के आरोपों को लेकर राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्ष का सड़क पर प्रदर्शन जारी है।

इसी क्रम में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (KJP) ने भी 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़े धरने की चेतावनी दी है।

हाल ही में हुए विरोध-प्रदर्शनों के बाद केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के घटनाक्रम से उत्साहित विपक्षी खेमे को उम्मीद है कि दबाव बनाकर CEC का इस्तीफा भी लिया जा सकता है।

हालांकि, भारतीय संविधान और कानून के तहत किसी मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाना बेहद जटिल प्रक्रिया है और इसे केवल राजनीतिक दबाव या सड़क पर होने वाले प्रदर्शनों के जरिए अंजाम नहीं दिया जा सकता।

CEC को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया

संविधान निर्माताओं ने चुनाव आयोग की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए CEC को हटाने की प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाने जितना ही कड़ा बनाया है।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324(5) और ‘जजेज़ (इन्क्वायरी) एक्ट, 1968’ के तहत इस प्रक्रिया को निम्नलिखित पांच कड़े चरणों से गुजरना पड़ता है:

  • वैध आधार: किसी CEC को केवल राजनीतिक मतभेद या अलोकप्रिय फैसलों के कारण नहीं हटाया जा सकता।

  • संविधान के तहत इसके केवल दो आधार हैं—साबित हुआ दुर्व्यवहार (Proved Misbehaviour) या काम करने में असमर्थता (Incapacity)।

  • संसद में प्रस्ताव: इस प्रक्रिया की शुरुआत संसद में एक औपचारिक प्रस्ताव से होती है। इसके लिए लोकसभा में कम से कम 100 सांसदों या राज्यसभा में कम से कम 50 सांसदों के हस्ताक्षर आवश्यक हैं।

  • लोकसभा अध्यक्ष या राज्यसभा सभापति इसे स्वीकार या अस्वीकार करने का अधिकार रखते हैं।

  • स्वतंत्र न्यायिक जांच: प्रस्ताव स्वीकार होने पर आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति बनती है।

  • इसमें सुप्रीम कोर्ट के एक सिटिंग जज, किसी हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस और एक प्रख्यात कानून विशेषज्ञ शामिल होते हैं।

  • यदि यह समिति जांच में CEC को निर्दोष पाती है, तो प्रक्रिया वहीं समाप्त हो जाती है।

  • विशेष बहुमत से मतदान: यदि समिति CEC को दोषी मानती है, तो प्रस्ताव पर दोनों सदनों में वोटिंग होती है।

  • इसे पारित करने के लिए सदन के कुल सदस्यों के 50% से अधिक का समर्थन (पूर्ण बहुमत) और उपस्थित व मतदान करने वाले सदस्यों का कम से कम दो-तिहाई बहुमत आवश्यक होता है।

  • राष्ट्रपति का आदेश: दोनों सदनों से एक ही सत्र में विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित होने के बाद ही इसे अंतिम रूप से राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है, जो आधिकारिक रूप से पद से हटाने का आदेश जारी करते हैं।

चुनाव आयुक्तों को प्राप्त कानूनी सुरक्षा

हटाने की इस जटिल प्रक्रिया के अतिरिक्त, ‘मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023’ की धारा 16 के तहत CEC और अन्य चुनाव आयुक्तों को विशेष कानूनी सुरक्षा (Immunity) भी प्राप्त है।

इसके तहत, किसी भी वर्तमान या पूर्व CEC/EC को उनके आधिकारिक और ‘नेक नीयत’ से किए गए कार्यों (जैसे वोटर लिस्ट तैयार करना, चुनाव कराना या परिसीमन) के लिए किसी भी सिविल या आपराधिक अदालती कार्यवाही से छूट मिलती है।

यह सुरक्षा पद छोड़ने के बाद भी लागू रहती है, ताकि वे बिना किसी राजनीतिक प्रतिशोध के स्वतंत्र रूप से काम कर सकें।

विपक्ष और अन्य दलों द्वारा सड़कों पर किए जा रहे प्रदर्शन राजनीतिक नैरेटिव सेट करने और दबाव बनाने का हिस्सा जरूर हैं,

लेकिन संवैधानिक ढांचे के भीतर बिना संसदीय विशेष बहुमत और न्यायिक जांच के मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाना वर्तमान राजनीतिक समीकरणों में एक अत्यंत कठिन और जटिल चुनौती है।