शिवसेना यूबीटी हार
भाजपा बनी ‘मुंबई की नई बॉस’, 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी; मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का ‘विकास मॉडल’ पड़ा भारी
विशेष संवाददाता | मुंबई
अरब सागर के किनारे बसी देश की आर्थिक राजधानी मुंबई ने अपनी सियासत की दिशा बदल दी है। बीएमसी चुनाव 2026 के नतीजों ने न केवल तीन दशकों से चले आ रहे ठाकरे परिवार के वर्चस्व को समाप्त कर दिया है, बल्कि महाराष्ट्र में भाजपा को शहरी राजनीति का ‘असली किंग’ घोषित कर दिया है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे की जोड़ी वाली ‘महायुति’ ने 227 सीटों वाली बीएमसी में 118 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है, जबकि बहुमत का जादुई आंकड़ा 114 था।
चुनाव आयोग द्वारा जारी अंतिम नतीजों के अनुसार, भाजपा ने अकेले दम पर 89 सीटों पर कब्जा जमाया, जो उसकी अब तक की सबसे बड़ी जीत है।
वहीं, शिंदे गुट की शिवसेना ने 29 सीटें जीतकर गठबंधन को बहुमत के पार पहुँचाया। दूसरी ओर, उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) महज 65 सीटों पर सिमट गई, जो उनके लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुंबईकरों ने इस बार ‘भावनात्मक अपील’ और ‘मराठी अस्मिता’ की पारंपरिक राजनीति के बजाय मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के विकास एजेंडे पर मुहर लगाई है।
कोस्टल रोड, मेट्रो नेटवर्क का विस्तार और एअरपोर्ट जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स ने मतदाताओं, विशेषकर युवाओं और मध्यम वर्ग को आकर्षित किया। महायुति ने विकास के दम पर पहचान की राजनीति (Identity Politics) को पीछे छोड़ दिया है।
इस चुनाव में महाविकास अघाड़ी (MVA) की कमजोरी खुलकर सामने आई। शरद पवार और उद्धव ठाकरे जैसे दिग्गजों का साथ आना भी वोटरों को नहीं लुभा पाया।
मराठवाड़ा के वैभव को वापस पाने का क्षेत्रीय नरेटिव पूरी तरह ‘फुस्स’ साबित हुआ। हैरान करने वाले नतीजों में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम (AIMIM) का प्रदर्शन रहा, जिसने 8 सीटें जीतकर तथाकथित सेक्युलर वोटों में सेंध लगाई।
जिसका सीधा नुकसान कांग्रेस और यूबीटी सेना को हुआ। कांग्रेस (24) और शरद पवार की एनसीपी (1) हाशिए पर चले गए हैं।
यह जीत मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की रणनीतिक कुशलता का प्रमाण है। उन्होंने न केवल शिंदे गुट के साथ मिलकर मराठी वोटों का सफल बंटवारा किया, बल्कि राज्य के अन्य 25 नगर निकायों में भी (कुल 29 में से) भाजपा का परचम लहराया।
इस जीत के साथ ही राज्य में ‘ट्रिपल इंजन’ सरकार का रास्ता और चौड़ा हो गया है। अब बीएमसी पर नियंत्रण होने से केंद्र, राज्य और निकाय—तीनों स्तरों पर एक ही विचारधारा की सरकार होगी, जिससे मुंबई के विकास और शहरी नियोजन (Urban Planning) में तेजी आने की उम्मीद है।
हालांकि, गठबंधन की जीत में शिंदे गुट की 29 सीटें महत्वपूर्ण हैं, जिससे एकनाथ शिंदे की बार्गेनिंग पावर बढ़ेगी, लेकिन 89 सीटों के साथ भाजपा “बड़े भाई” की भूमिका में स्थापित हो चुकी है।
यह परिणाम विपक्ष के लिए एक चेतावनी है कि क्षेत्रीय दलों का विभाजन और बिखरता जनाधार उनके अस्तित्व के लिए खतरा बन चुका है।
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