उत्तर भारत की जेलों में खालिस्तानी आतंकी नेटवर्क की घुसपैठ?
उत्तर भारत की जेलों में पनप रहा खालिस्तानी नेटवर्क: पन्नू के गुर्गे कर रहे नई भर्तियां, ‘डेड ड्रॉप’ से पहुंच रहे हथियार; एक्शन में ‘प्रहार’
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
उत्तर भारत की जेलें अब केवल अपराधियों की सजा काटने का स्थान नहीं रह गई हैं, बल्कि वे आतंकवाद और अलगाववाद की नई नर्सरी में तब्दील हो रही हैं।
खुफिया एजेंसियों ने एक गंभीर चेतावनी जारी करते हुए खुलासा किया है कि ‘सिख्स फॉर जस्टिस’ (SFJ) जैसे खालिस्तान समर्थक संगठन अब जेलों के भीतर से अपने आतंकी नेटवर्क के लिए नए गुर्गे तैयार कर रहे हैं।
हाल ही में गिरफ्तार किए गए आरोपी प्रीतपाल सिंह से पूछताछ में इस खतरनाक ‘जेल-टेरर नेक्सस’ का पर्दाफाश हुआ है, जिसके तार सीधे विदेश में बैठे खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू से जुड़े हैं।
जेल में हुआ ब्रेनवॉश, बाहर आते ही पन्नू से मिला फंड
जांच एजेंसियों के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी प्रीतपाल सिंह (जो 2023 में भी ऐसी ही गतिविधियों में पकड़ा गया था) ने खुलासा किया है कि जेल में सजा काटने के दौरान ही उसे खालिस्तान समर्थकों ने अपने प्रभाव में लेकर कट्टरपंथी बना दिया था।
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जेल के भीतर ही उसे आतंकी पन्नू का फोन नंबर मुहैया कराया गया।
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जेल से बाहर आते ही उसने पन्नू से संपर्क साधा और उसे देश विरोधी गतिविधियों के लिए विदेशी फंड मिला।
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इसी फंड के दम पर उसने अपने साथियों के साथ मिलकर दिल्ली और पंजाब में ब्रिक्स (BRICS) विरोधी और खालिस्तान समर्थक नारे लिखे, उनके वीडियो बनाए और पन्नू तक पहुंचाए।
टारगेट पर कमजोर कैदी, हथियारों के लिए ‘डेड ड्रॉप’ का इस्तेमाल
जांच का सबसे खौफनाक पहलू यह है कि आतंकी संगठन जेल में ऐसे कैदियों को निशाना बना रहे हैं जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं, जिन्हें कानूनी मदद नहीं मिल रही या जो पहली बार छोटे-मोटे अपराधों में जेल पहुंचे हैं।
उन्हें पैसे और कानूनी सहायता का लालच देकर कट्टरपंथी गतिविधियों में धकेला जा रहा है। इसके साथ ही, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी (ISI) समर्थित गुटों ने हथियार और नकदी पहुंचाने का तरीका भी बदल दिया है।
अब सीधे संपर्क (Face-to-Face) के बजाय ‘डेड ड्रॉप’ (Dead Drop) तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है।
सीमा पार से ड्रोन के जरिए सूनसान राजमार्गों और सीमावर्ती इलाकों में हथियार व नकदी गिराई जाती है और सुरक्षित मैसेजिंग एप्स (Secure Messaging Apps) के जरिए स्थानीय गुर्गों को उसकी लोकेशन भेज दी जाती है। इससे एजेंसियों के लिए नेटवर्क को ट्रैक करना बेहद मुश्किल हो जाता है।
आतंकी नेटवर्क को नेस्तनाबूद करेगा ऑपरेशन ‘प्रहार’
वर्ष 2016 की कुख्यात नाभा जेल ब्रेक घटना के बाद से ही जेलों में अपराधी-आतंकी गठजोड़ सुरक्षा एजेंसियों के लिए सिरदर्द बना हुआ है।
इस उभरते खतरे से निपटने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा निर्देशित ‘प्रहार’ (Prahaar) अभियान की भूमिका अहम हो गई है।
इस 360-डिग्री आतंकवाद-रोधी कार्रवाई का उद्देश्य केवल आतंकियों को पकड़ना नहीं है, बल्कि उनकी भर्ती प्रक्रिया, फंडिंग, हथियारों की सप्लाई, डिजिटल नेटवर्क और विदेशी आकाओं तक पूरी चेन को ध्वस्त करना है।
एजेंसियों ने साफ कर दिया है कि जेलों में सख्त निगरानी, राज्य और केंद्रीय एजेंसियों के बीच सटीक समन्वय और कमजोर कैदियों के लिए सुधारात्मक (काउंसलिंग) कार्यक्रमों के जरिए ही इस नेटवर्क को शुरुआती स्तर पर कुचला जा सकता है।











