Uttar Pradesh Deputy Chief Minister Keshav Prasad Maurya speaking on madrasas and opposition parties.

केशव प्रसाद मौर्य बोले- मदरसे आतंकवादियों को पैदा करने वाली फैक्ट्रियां

केशव प्रसाद मौर्य का बड़ा बयान: “मदरसे आतंकवादियों को पैदा करने वाली अघोषित फैक्ट्रियां हैं”

लखनऊ:  द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने मदरसों को लेकर एक तीखा और विवादित बयान दिया है।

उन्होंने कहा है कि मदरसे आतंकवादियों को पैदा करने वाली अघोषित फैक्ट्रियां बन गए हैं। उनका यह बयान बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन की उस टिप्पणी के समर्थन में आया है, जिसमें उन्होंने बांग्लादेश में मदरसों को खत्म करने की वकालत की थी।

मौर्य के इस बयान के बाद राज्य और देश की राजनीति में एक नया सियासी भूचाल आ गया है और धार्मिक शिक्षण संस्थानों की भूमिका को लेकर बहस छिड़ गई है।

सीमा पार तक फैली है समस्या: केशव मौर्य

तस्लीमा नसरीन के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि यह मुद्दा किसी एक देश तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी जड़ें सीमाओं के पार तक फैली हुई हैं।

उन्होंने अपनी बात पर जोर देते हुए कहा,

“चाहे मदरसा बांग्लादेश में हो, पाकिस्तान में हो या भारत में, सच्चाई यही है कि मदरसे आतंकवादियों को पैदा करने वाली अघोषित फैक्ट्रियां बन गए हैं।”

उनके इस बयान से राजनीतिक गलियारों में विरोध के स्वर भी उठने लगे हैं।

राहुल गांधी और INDIA गठबंधन पर भी बोला हमला

मदरसों के मुद्दे के अलावा केशव प्रसाद मौर्य ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन पर भी जमकर निशाना साधा।

एक प्रमुख समाचार एजेंसी से बातचीत करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के पास सरकार के खिलाफ कोई ठोस मुद्दा नहीं है, इसलिए वे हर मामले का राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश करते हैं।

  • महिला आरक्षण का विरोध: मौर्य ने कहा कि समाजवादी पार्टी सहित ‘इंडिया’ गठबंधन की तमाम पार्टियों ने अतीत में महिला आरक्षण बिल का विरोध किया था।

  • छात्र आंदोलनों का राजनीतिक फायदा: उन्होंने आरोप लगाया कि नीट (NEET) परीक्षा के पेपर लीक के विरोध प्रदर्शनों के दौरान विपक्ष ने केवल छात्रों के आंदोलन का राजनीतिक फायदा उठाने का काम किया।

डिप्टी सीएम ने तंज कसते हुए कहा कि विपक्ष का काम हर अच्छी और सकारात्मक पहल का विरोध करना है, लेकिन जनता सब समझती है और इससे सरकार के कामकाज पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।