Central government released 1178 crore rupees Post-Matric scholarship funds for SC students in Karnataka.

कर्नाटक: SC छात्रों की पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए 1178 करोड़ जारी

कर्नाटक: SC छात्रों की पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए केंद्र ने खोले खजाने, 3 साल में दिए 1,178 करोड़ रुपये”

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

केंद्र सरकार ने कर्नाटक में अनुसूचित जाति (SC) के विद्यार्थियों की शिक्षा और उनके उज्ज्वल भविष्य को सुनिश्चित करने के लिए खजाने खोल दिए हैं।

सरकार ने राज्यसभा में आधिकारिक तौर पर सूचित किया है कि पिछले तीन वित्त वर्षों के दौरान कर्नाटक में केंद्र प्रायोजित ‘पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना’ के अंतर्गत कुल 1,178.20 करोड़ रुपये की केंद्रीय हिस्सेदारी जारी की गई है।

सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री श्री रामदास अठावले ने राज्यसभा में अनुसूचित जाति कल्याण के लिए कर्नाटक को जारी की गई केंद्रीय निधि से जुड़े एक प्रश्न (अतारांकित प्रश्न संख्या 2050) का उत्तर देते हुए यह विस्तृत जानकारी साझा की।

तीन वर्षों में जारी राशि का विस्तृत ब्यौरा:

मंत्री श्री रामदास अठावले द्वारा सदन में रखे गए आंकड़ों के अनुसार, कर्नाटक के SC विद्यार्थियों के लिए इस छात्रवृत्ति योजना के तहत साल-दर-साल लगातार निधि जारी की गई है:

  • वर्ष 2023-24: 421.08 करोड़ रुपये

  • वर्ष 2024-25: 422.90 करोड़ रुपये

  • वर्ष 2025-26: 334.22 करोड़ रुपये कुल केंद्रीय हिस्सेदारी: 1,178.20 करोड़ रुपये

सीधे छात्रों के बैंक खाते में जा रही राशि (DBT)

सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग इस केंद्र प्रायोजित योजना को राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनों के माध्यम से लागू करता है।

  • पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए वर्ष 2021-22 से इस योजना को ‘प्रत्यक्ष लाभ अंतरण’ (DBT) के माध्यम से लागू किया जा रहा है, जिससे बिचौलियों की भूमिका खत्म हो गई है।

  • केंद्र सरकार अपना हिस्सा तभी जारी करती है जब राज्य सरकारें अपने हिस्से का भुगतान कर देती हैं और अंतिम रूप से सत्यापित डेटा को ‘राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल’ (NSP) पर साझा करती हैं।

मांग पर आधारित है यह योजना

सरकार ने स्पष्ट किया कि यह छात्रवृत्ति योजना देश भर में मान्यता प्राप्त संस्थानों में पढ़ने वाले सभी योग्य SC छात्रों के लिए खुली है और यह पूरी तरह से ‘मांग’ (Demand-driven) पर आधारित है।

इसके साथ ही, सरकार ने बताया कि नीति आयोग के 2017 के दिशानिर्देशों के अनुसार, अनुसूचित जातियों के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए ‘विकास कार्य योजना’ (DAPSC) के तहत हर संबंधित मंत्रालय अपनी-अपनी योजनाओं के माध्यम से निधि आवंटित करता है, जिसका लाभ राज्यों को मिलता है।