JAUNPUR

जौनपुर: फाइलेरिया मरीजों के लिए विशेष स्वास्थ्य कैंप, बांटी गई MMDP किट

जौनपुर : धर्मापुर में फाइलेरिया मरीजों के लिए विशेष स्वास्थ्य कैंप, 15 मरीजों को बांटी गई MMDP किट और दी गई ट्रेनिंग”

जौनपुर/संवाददाता : द पॉलिटिक्स अगेन 

फाइलेरिया जैसी गंभीर और संक्रामक बीमारी से ग्रसित मरीजों को राहत देने और उन्हें उचित देखभाल के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से जौनपुर के धर्मापुर ब्लॉक में एक विशेष स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया।

मंगलवार, 26 मई 2026 को ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिर’ पिलखिनी में फाइलेरिया (लिम्फोडिमा) मरीजों के लिए ‘रुग्णता प्रबंधन एवं दिव्यांगता रोकथाम’ (MMDP) कैंप लगाया गया।

इस महत्वपूर्ण कैंप का नेतृत्व जिला मलेरिया अधिकारी सुनील कुमार यादव ने किया। इस दौरान स्वास्थ्य कर्मियों ने मरीजों को बीमारी के प्रबंधन और बचाव के विस्तृत तरीके सिखाए, जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार लाया जा सके।

कैंप में मरीजों को दी गई विशेष ट्रेनिंग

इस शिविर में सीएचओ श्रीमती लक्ष्मी विश्वकर्मा, क्षेत्रीय आशाओं और डीओ पाथ अमरेश कुमार की उपस्थिति में मरीजों को फाइलेरिया से होने वाली शारीरिक परेशानियों को कम करने का प्रशिक्षण दिया गया।

  • साफ-सफाई और व्यायाम: मरीजों को अपने प्रभावित हाथ-पैर की नियमित रूप से साफ-सफाई करने, धोने और हल्के व्यायाम (Exercise) करने के तरीके सिखाए गए।

  • पहनावा और बचाव: उन्हें उचित आकार के चप्पल या सैंडल पहनने की सलाह दी गई, ताकि कटने, जलने या चोट लगने से बचा जा सके।

  • एक्यूट अटैक प्रबंधन: अचानक दर्द या सूजन (एक्यूट अटैक) बढ़ने पर क्या त्वरित कदम उठाने चाहिए, इसके बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई।

15 मरीजों के चेहरे पर आई मुस्कान, मिली MMDP किट

प्रशिक्षण और जागरूकता सत्र के उपरांत कैंप में उपस्थित सभी 15 फाइलेरिया (लिम्फोडिमा) मरीजों को स्वास्थ्य विभाग की ओर से निःशुल्क एमएमडीपी (MMDP) किट प्रदान की गई।

बीमारी के उचित प्रबंधन की वैज्ञानिक जानकारी और राहत सामग्री (किट) पाकर मरीजों ने काफी खुशी और संतोष व्यक्त किया।

क्या है फाइलेरिया और कैसे करें बचाव?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कैंप में बताया कि फाइलेरिया (हाथीपांव) एक गंभीर संक्रामक रोग है, जो मादा ‘क्यूलेक्स’ (Culex) मच्छर के काटने से फैलता है। इसका परजीवी ‘वुचरेरिया बैंकराफ्टी’ होता है।

  • मच्छरों का पनपना: इस बीमारी को फैलाने वाले मच्छर मुख्य रूप से रुके हुए गंदे पानी में पैदा होते हैं।

  • प्रमुख लक्षण: फाइलेरिया में मुख्यतः हाथ, पैर, स्तन और अंडकोष में भारी सूजन आ जाती है। इसके अलावा पेशाब का रंग दूधिया हो जाता है, जिसे ‘काईलुरिया’ रोग कहा जाता है।

  • समय पर इलाज है जरूरी: यदि समय पर इसकी जांच और उपचार न मिले तो यह बीमारी लाइलाज हो जाती है।

अतः विशेषज्ञों ने अपील की है कि नियमित रूप से एक्सरसाइज, योग, साफ-सफाई और मच्छरों से बचाव (मच्छरदानी का प्रयोग, घर के आसपास पानी न जमा होने देना) करके फाइलेरिया संक्रमण और इसके गंभीर दुष्प्रभावों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

Santosh SETH

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