जम्मू-कश्मीर में टेरर फंडिंग को लेकर पाकिस्तानी ISI और तुर्किये की संस्था TIKA का गठजोड़, शोपियां में 10 गिरफ्तार।

पुराने आतंकी नेटवर्क को जिंदा कर रही ISI, तुर्किये की TIKA कर रही फंडिंग

J&K में पुराने आतंकी नेटवर्क को जिंदा कर रही पाकिस्तानी ISI, तुर्किये की संस्था ‘TIKA’ दे रही फंड; UP चुनाव भी निशाने पर”

The Politics Again डेस्क: संतोष सेठ 

जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के मृतप्राय हो चुके पुराने नेटवर्क को फिर से खड़ा करने की एक बड़ी और अंतरराष्ट्रीय साजिश का पर्दाफाश हुआ है।

भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के हाथ लगी अहम जानकारी के मुताबिक, पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी (ISI) को इस नापाक मंसूबे में तुर्किये (Turkey) की संस्था ‘टर्किश कोऑपरेशन एंड कोऑर्डिनेशन एजेंसी’ (TIKA – टीका) से सीधी मदद मिल रही है।

TIKA के जरिए मिल रहे फंड को पुराने आतंकी संगठनों तक पहुंचाकर ISI उनके नाम और स्लीपर सेल को घाटी में फिर से सक्रिय करने का प्रयास कर रही है।

यूपी विधानसभा चुनाव को प्रभावित करने की साजिश, नेपाल है रूट

यह साजिश केवल जम्मू-कश्मीर तक ही सीमित नहीं है। खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार, ISI नेपाल में सक्रिय तुर्किये के मजबूत नेटवर्क के सहारे उत्तर प्रदेश में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों को भी प्रभावित करने की फिराक में है।

इस गंभीर इनपुट के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को विस्तृत रिपोर्ट भेज दी है और यूपी पुलिस को भी हाई अलर्ट पर रखा गया है।

शोपियां में 10 गिरफ्तार, कठुआ के युवाओं का शामिल होना चिंताजनक

टेरर फंडिंग के इस नए नेटवर्क का शुक्रवार को बड़ा भंडाफोड़ हुआ। शोपियां पुलिस ने 10 ओवरग्राउंड वर्कर्स (OGWs) को गिरफ्तार किया है, जो धन जुटाकर उसे लश्कर-ए-ताइबा (LeT) और द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) के निष्क्रिय नेटवर्क तक पहुंचा रहे थे।

इस पूरी कार्रवाई में सबसे ज्यादा चौंकाने और चिंताजनक बात कठुआ (जम्मू संभाग) के दो युवाओं का इस नेटवर्क में शामिल होना है।

इससे स्पष्ट होता है कि आतंकी संगठन अब घाटी से निकलकर जम्मू के संवेदनशील जिलों में भी पैठ बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

90 के दशक वाले संगठनों को जिंदा करने की कोशिश: पूर्व DGP

जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एसपी वैद के मुताबिक, ISI की रणनीति 1990 के दशक में सक्रिय रहे आतंकी संगठनों को फिर से चर्चा में लाने की है।

इस कड़ी में अल-उमर मुजाहिदीन, अल-बद्र और तहरीक-उल-मुजाहिदीन जैसे संगठनों के पुराने नेटवर्क का इस्तेमाल किया जा रहा है।

मई 2026 में भी अल-बद्र और हिजबुल मुजाहिदीन के पुराने संपर्कों को सक्रिय करने के इनपुट मिले थे।

फंडिंग के नए तरीके और उपराज्यपाल की चेतावनी

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, आतंकी अब पारंपरिक हवाला नेटवर्क से बच रहे हैं। इसके बजाय वे ऑनलाइन भुगतान, स्थानीय स्तर पर छोटी-छोटी रकम जुटाने और ओजीडब्ल्यू (OGW) के जरिए धन पहुंचा रहे हैं।

बांदीपोरा में प्रतिबंधित संगठन ‘इत्तेहाद-उल-मुस्लिमीन’ के खिलाफ हुई कार्रवाई में भी पाकिस्तानी फंडिंग की पुष्टि हो चुकी है।

घाटी में राजनीतिक बयानबाजी से पैदा होने वाले नैरेटिव पर भी सुरक्षा एजेंसियां नजर रखे हुए हैं। इसी कड़ी में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने भी सख्त चेतावनी दी है कि युवाओं को बरगलाकर कट्टरता की ओर धकेलने वालों से प्रशासन पूरी सख्ती से निपटेगा, चाहे वे किसी भी राजनीतिक दल या संगठन से क्यों न जुड़े हों।

टेरर फंडिंग का नया गठजोड़: ISI और तुर्किये (TIKA) का नेक्सस

विषय (Focus Area)

मुख्य बिंदु (Key Highlights)

प्रमुख साजिशकर्ता

पाकिस्तानी ISI और तुर्किये की संस्था TIKA

निशाने पर कौन?

जम्मू-कश्मीर के पुराने आतंकी संगठन और यूपी विधानसभा चुनाव

नेपाल का इस्तेमाल

यूपी चुनावों को प्रभावित करने के लिए नेपाल में स्थित तुर्किये के नेटवर्क का उपयोग।

हालिया गिरफ्तारी

शोपियां पुलिस द्वारा 10 लोगों की गिरफ्तारी (LeT और TRF के मददगार)।

खतरे की घंटी

घाटी से बाहर कठुआ (जम्मू संभाग) के दो युवाओं का नेटवर्क में शामिल होना।

सक्रिय किए जा रहे संगठन

अल-बद्र, अल-उमर मुजाहिदीन, तहरीक-उल-मुजाहिदीन (1990 के दशक के गुट)।

फंडिंग का नया तरीका

हवाला के बजाय ऑनलाइन भुगतान और स्थानीय स्तर पर छोटी रकम का कलेक्शन।

PREMIUM NEWS

अपनी Premium Membership चुनें

Premium articles बिना restriction पढ़ें।

Monthly

₹99/month

30 days Premium access

You have successfully subscribed to the newsletter

There was an error while trying to send your request. Please try again.

The Politics Again will use the information you provide on this form to be in touch with you and to provide updates and marketing.