Uttar Pradesh

कानपुर में अंतरराष्ट्रीय किडनी रैकेट का भंडाफोड़, डॉक्टर गिरफ्तार

कानपुर में अंतरराष्ट्रीय किडनी रैकेट का भंडाफोड़: 3 बड़े अस्पतालों पर STF का छापा, 60 लाख में सौदा ! 

कानपुर : द पॉलिटिक्स अगेन : मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 

कानपुर में स्वास्थ्य विभाग, विजिलेंस और एसटीएफ (STF) की संयुक्त टीम ने एक बड़ी और ऐतिहासिक कार्रवाई करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर के किडनी तस्करी रैकेट का भंडाफोड़ किया है।

शहर के तीन प्रमुख अस्पतालों में एक साथ की गई इस छापेमारी से स्वास्थ्य महकमे और इस काले कारोबार से जुड़े लोगों में हड़कंप मच गया है।

संयुक्त टीम ने कल्याणपुर के मेड लाइफ हॉस्पिटल, रावतपुर स्थित आहूजा हॉस्पिटल और पनकी रोड के प्रिया हॉस्पिटल में ताबड़तोड़ कार्रवाई कर इस पूरे नेटवर्क की जड़ें हिला दी हैं।

डॉक्टर दंपत्ति और दलाल गिरफ्तार, खुला ‘लखनऊ कनेक्शन’

छापेमारी के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। पुलिस ने आहूजा हॉस्पिटल की मालकिन डॉ. प्रीति आहूजा, उनके पति डॉ. सुरजीत सिंह आहूजा और इस रैकेट के एक बेहद सक्रिय दलाल शिवम अग्रवाल उर्फ ‘काना’ को हिरासत में लिया है। जांच में इस रैकेट का एक बड़ा ‘लखनऊ कनेक्शन’ भी उजागर हुआ है।

एसटीएफ की जांच में पता चला है कि किडनी ट्रांसप्लांट जैसी जटिल और गैर-कानूनी सर्जरी को अंजाम देने के लिए राजधानी लखनऊ से डॉक्टरों की एक विशेष टीम चोरी-छिपे कानपुर आती थी।

यह टीम सर्जरी के लिए आहूजा हॉस्पिटल के ऑपरेशन थिएटर (OT) का इस्तेमाल करती थी। इसके एवज में इन बाहरी डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन को लाखों रुपये का मोटा कमीशन मिलता था।

मरीज से 60 लाख की वसूली, डोनर को मिले सिर्फ 9.5 लाख

इस क्रूर काले कारोबार में मरीजों की मजबूरी का पूरा फायदा उठाया जा रहा था। जांच में सामने आया कि किडनी लेने वाले मरीज से 60 लाख रुपये तक की भारी-भरकम रकम वसूली गई।

जबकि अपनी जान जोखिम में डालकर किडनी देने वाले गरीब युवक (डोनर) को महज 9.5 लाख रुपये ही थमाए गए। बाकी की पूरी रकम दलाल, अस्पताल संचालकों और डॉक्टरों के बीच बंट जाती थी।

पुलिस को प्रिया हॉस्पिटल में भर्ती उत्तराखंड का रहने वाला आयुष (किडनी रिसीवर) मिला है। वहीं, अपनी किडनी बेचने को मजबूर हुआ मेरठ का रहने वाला डोनर मेड लाइफ हॉस्पिटल में भर्ती पाया गया है।

कई सफेदपोश और बड़े अस्पतालों के नाम आने की आशंका

फिलहाल, सीएमओ (CMO), विजिलेंस और एसटीएफ की टीमें इन तीनों अस्पतालों के दस्तावेजों, रजिस्टरों और कंप्यूटरों को खंगाल रही हैं।

प्रशासन यह पता लगाने में गंभीरता से जुटा है कि अब तक कितने मजबूर लोगों को इस अंतरराष्ट्रीय रैकेट का शिकार बनाया जा चुका है।

आशंका जताई जा रही है कि जांच आगे बढ़ने पर इस मामले में कई सफेदपोश चेहरों, नेताओं और शहर व बाहर के अन्य बड़े अस्पतालों के नाम भी सामने आ सकते हैं।

इस सनसनीखेज खुलासे ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था और उसकी निगरानी पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं।

Santosh SETH

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