हिमाचल: आपदा में अनाथ हुई मासूम को मिली 21 लाख की FD
“राजनीति के गलियारों में अक्सर आंकड़ों और बजट की चर्चा होती है, लेकिन कभी-कभी शासन मानवीय संवेदनाओं की ऐसी मिसाल पेश करता है जो इतिहास बन जाती है”
मंडी/शिमला | शनिवार, 10 जनवरी 2026 संतोष सेठ की रिपोर्ट
हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने सराज क्षेत्र की मासूम नितिका के आंसुओं को पोंछते हुए उसे 21 लाख रुपये की आर्थिक सुरक्षा प्रदान की है।
मुख्यमंत्री का वादा, प्रशासन ने पहुँचाया घर-द्वार
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आपदा राहत वितरण कार्यक्रम के दौरान इस मासूम बच्ची के लिए 21 लाख रुपये की सहायता राशि की घोषणा की थी।
इस वादे को निभाते हुए मंडी के उपायुक्त (DC) अपूर्व देवगन स्वयं दुर्गम सराज क्षेत्र के गांव शिकावरी (तहसील थुनाग) पहुंचे। उन्होंने वहां नितिका की बुआ और उसकी कानूनी संरक्षक किरण देवी को 21 लाख रुपये की FD (फिक्स्ड डिपॉजिट) के दस्तावेज सौंपे।
कुदरत का कहर और नन्ही नितिका की दास्तान
30 जून की उस काली तारीख को सराज में आई विनाशकारी बाढ़ ने सब कुछ तबाह कर दिया था। मात्र 11 माह की उम्र में नितिका ने अपने माता-पिता और पूरे परिवार को खो दिया।
उस समय वह इतनी छोटी थी कि उसे अपने जीवन में आए इस महाशून्य का अहसास तक नहीं था। आज वह एक साल चार महीने की हो चुकी है और प्रदेश सरकार ‘परिवार’ बनकर उसकी उंगली थामे हुए है।
सुख आश्रय योजना: केवल FD नहीं, मासिक सहारा भी
नितिका को केवल भविष्य के लिए ही सुरक्षित नहीं किया गया है, बल्कि उसके वर्तमान पालन-पोषण के लिए भी सरकार गंभीर है:
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मासिक सहायता: ‘सुख आश्रय योजना’ के तहत नितिका को प्रतिमाह 4,000 रुपये की आर्थिक मदद दी जा रही है।
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भविष्य की सुरक्षा: 21 लाख की FD उसके बड़े होने पर उसकी शिक्षा और अन्य जरूरतों के लिए मील का पत्थर साबित होगी।
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संरक्षण: सरकार ने सुनिश्चित किया है कि नितिका के पालन-पोषण में कोई कमी न आए।
प्रशासनिक उपस्थिति
इस भावुक क्षण के दौरान एसडीएम थुनाग रमेश कुमार, नितिका की बुआ किरण कुमारी, तारा देवी और अनमंत्रण सिंह भी उपस्थित रहे। ग्रामीणों ने सरकार के इस कदम की सराहना करते हुए इसे ‘संवेदनशील शासन’ का प्रतीक बताया है।
The Politics Again का नजरिया: हिमाचल सरकार का यह कदम सिद्ध करता है कि सच्चा नेतृत्व वही है जो मानवीय पीड़ा को समझे। मुख्यमंत्री सुक्खू ने यह संदेश दिया है कि प्रदेश का हर अनाथ बच्चा अब ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ है और सरकार उनके अभिभावक के रूप में खड़ी है।











