भारत का मेगा प्लान: ओमान से गुजरात तक अंडरवाटर गैस पाइपलाइन
होरमुज संकट का ‘मास्टरस्ट्रोक’ समाधान: ओमान से गुजरात तक बिछेगी ₹40 हजार करोड़ की अंडरवाटर गैस पाइपलाइन; जानें PM मोदी का मेगा प्लान”
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
पश्चिम एशिया में ईरान युद्ध और होरमुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने के संकट के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर एक बेहद महत्वाकांक्षी और ऐतिहासिक कदम उठाया है।
भारत सरकार लगभग 40 हजार करोड़ रुपये की लागत वाली एक विशाल ‘डीप-सी’ (गहरे समुद्र की) गैस पाइपलाइन परियोजना को तेजी से आगे बढ़ा रही है।
यह परियोजना न केवल भारत की ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित करेगी, बल्कि बदलते वैश्विक हालात में यह मोदी सरकार की दूरदर्शी कूटनीति का भी सबसे बड़ा प्रतीक बनने जा रही है।
क्या है मिडिल ईस्ट-इंडिया डीपवॉटर पाइपलाइन प्रोजेक्ट?
भारत अपनी तेल और गैस की दो-तिहाई जरूरतों के लिए खाड़ी देशों और होरमुज जलडमरूमध्य मार्ग पर निर्भर है।
ईरान संकट के कारण इस मार्ग पर आई रुकावटों से निपटने के लिए अब ओमान से सीधे गुजरात तक गहरे समुद्र के नीचे पाइपलाइन बिछाने की योजना तैयार की गई है:
लंबाई और गहराई: लगभग 2000 किलोमीटर लंबी यह पाइपलाइन अरब सागर के नीचे से गुजरेगी।
इसे समुद्र तल से करीब 3450 मीटर की गहराई में बिछाया जाएगा, जो इसे दुनिया की सबसे गहरी समुद्री पाइपलाइन परियोजनाओं में से एक बनाएगा।
सप्लाई क्षमता: इस पाइपलाइन के जरिए प्रतिदिन लगभग 31 मिलियन मानक घन मीटर प्राकृतिक गैस की निर्बाध आपूर्ति संभव हो सकेगी।
किसके पास है जिम्मेदारी: साउथ एशिया गैस एंटरप्राइज (SAGE) की रिपोर्ट पर आधारित इस प्रोजेक्ट की विस्तृत रिपोर्ट (DPR) तैयार करने का जिम्मा जल्द ही GAIL, IOCL और इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड (EIL) को सौंपा जा सकता है। अंतिम मंजूरी मिलने पर इसे 5 से 7 साल में पूरा कर लिया जाएगा।
भारत को मिलेंगे 2500 ट्रिलियन घन फीट के गैस भंडार
विशेषज्ञों के अनुसार, इस पाइपलाइन के पूरा होते ही भारत को ओमान, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, ईरान, कतर और तुर्कमेनिस्तान जैसे गैस संपन्न देशों के विशाल भंडार (करीब 2500 ट्रिलियन घन फीट) तक सीधी पहुंच मिल जाएगी।
PM मोदी का UAE दौरा: ऊर्जा कूटनीति को मिलेगी नई धार
इस मेगा प्रोजेक्ट के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संयुक्त अरब अमीरात (UAE) यात्रा भी भारत की ऊर्जा रणनीति का अहम हिस्सा है।
नए समझौते: इस यात्रा के दौरान रसोई गैस (LPG) और ‘रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार’ से जुड़े दो महत्वपूर्ण समझौतों पर मुहर लग सकती है।
बता दें कि UAE भारत के लिए कच्चे तेल का चौथा और तरल प्राकृतिक गैस (LNG) का दूसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता देश है।
PM मोदी और UAE के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नहयान के बीच होने वाली यह वार्ता खाड़ी देशों के साथ भारत की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगी।
बढ़ रही है भारत की गैस डिमांड
भारत में प्राकृतिक गैस की मांग तेजी से बढ़ रही है। वर्तमान में जो खपत 190-195 मिलियन मानक घन मीटर प्रतिदिन है, वह 2030 तक बढ़कर 300 मिलियन के करीब पहुंचने का अनुमान है।
तनाव के बावजूद भारतीय नौसेना की निगरानी में 41 जहाजों वाली विशेष आपूर्ति योजना के तहत ‘एनवी सनशाइन’ और ‘सिमी’ जैसे टैंकर सुरक्षित रूप से भारत पहुंच रहे हैं।
लेकिन लंबी अवधि की सुरक्षा और अस्थिर बाजार से बचने के लिए यह ‘अंडरवाटर पाइपलाइन’ भारत के लिए एक गेमचेंजर साबित होगी।
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