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भारत की कूटनीतिक जीत: ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भारतीय टैंकरों को दी राह | The Politics Again

“भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत: ईरान ने ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ से भारतीय तेल टैंकरों को दी सुरक्षित राह, ‘पुष्पक’ और ‘परिमल’ को मिली हरी झंडी “

नई दिल्ली (The Politics Again): संतोष सेठ की रिपोर्ट 

पश्चिम एशिया में 12 दिनों से चल रहे अमेरिका-इजराइल और ईरान के विनाशकारी युद्ध के बीच भारत को एक बहुत बड़ी कूटनीतिक सफलता (Diplomatic Success) हाथ लगी है।

इस भीषण युद्ध और समुद्री नाकेबंदी के बीच, ईरान ने रणनीतिक रूप से दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) से भारतीय झंडे वाले तेल टैंकरों को सुरक्षित गुजरने की विशेष अनुमति दे दी है।

यह बड़ी राहत भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर (S. Jaishankar) और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास आराघची (Abbas Araghchi) के बीच हुई उच्च-स्तरीय वार्ता के ठीक बाद मिली है।

इस कदम से भारत की ऊर्जा आपूर्ति और कच्चे तेल के आयात को लेकर मंडरा रहा बड़ा संकट फिलहाल टल गया है।

‘पुष्पक’ और ‘परिमल’ सहित इन टैंकरों को मिली राह

जहां एक तरफ अमेरिका, यूरोप और इजराइल से जुड़े जहाजों पर ईरान ने कड़े प्रतिबंध लगा रखे हैं और समुद्री यातायात लगभग ठप है, वहीं भारतीय जहाजों को यह ‘वीआईपी’ ट्रीटमेंट भारत की स्वतंत्र विदेश नीति का परिणाम है।

  • भारतीय टैंकर: कम से कम दो बड़े भारतीय तेल टैंकर— ‘पुष्पक’ (Pushpak) और ‘परिमल’ (Parimal)— सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे हैं।

  • भारतीय कप्तान वाला विदेशी जहाज

  • इससे पहले सऊदी अरब का कच्चा तेल लेकर आ रहा लाइबेरिया के झंडे वाला एक तेल टैंकर भी दो दिन पहले सुरक्षित मुंबई बंदरगाह पहुंच चुका है।

  • खास बात यह है कि इस जहाज की कमान एक ‘भारतीय कप्तान’ के हाथों में थी। यह मौजूदा संकट के बीच भारत पहुंचने वाला पहला जहाज माना जा रहा है।

क्यों इतना अहम है ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’?

होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित करीब 55 किलोमीटर चौड़ा एक ‘चोकपॉइंट’ (समुद्री संकरा मार्ग) है। युद्ध के समय ईरान इसका इस्तेमाल एक बड़े हथियार के रूप में करता है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के मुख्य तथ्य (Key Facts) विवरण
भौगोलिक स्थिति फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है (ईरान-ओमान के बीच)।
चौड़ाई लगभग 55 किलोमीटर।
वैश्विक तेल आपूर्ति प्रतिदिन करीब 1.3 करोड़ बैरल (वैश्विक आपूर्ति का 31%)।
प्रभावित देश इराक, कुवैत, सऊदी अरब, UAE और ईरान का निर्यात इसी पर निर्भर।
ईरान की ताकत एंटी-शिप मिसाइल, ड्रोन, फास्ट-अटैक बोट्स और समुद्री बारूदी सुरंगों का जाल।

 

भारत के लिए इसके क्या मायने हैं?

दुनिया के कई देशों के जहाज इस समय फँसे हुए हैं, लेकिन भारत को मिला यह सुरक्षित मार्ग नई दिल्ली की शानदार कूटनीति (Independent Diplomacy) का सीधा प्रमाण है।

इससे युद्ध और नाकेबंदी के इन मुश्किल हालात में भी भारत की ऊर्जा आपूर्ति शृंखला (Energy Supply Chain) बिना रुके चलती रहेगी, जिससे देश में पेट्रोल-डीजल और गैस के दामों में अचानक होने वाली बढ़ोतरी को रोकने में मदद मिलेगी।

Santosh SETH

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