भारत की ‘AI हेल्थ क्रांति’: टीबी के गंभीर मामलों में 27% की गिरावट, अब 16 फरवरी से दिल्ली में दुनिया देखेगी ‘डिजिटल शक्ति’
“भारत ने स्वास्थ्य सेवाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को शामिल कर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है’
नई दिल्ली: THE POLITICS AGAIN : संतोष सेठ की रिपोर्ट
जहां दुनिया अभी एआई के खतरों और फायदों पर बहस कर रही है, वहीं भारत ने इसका इस्तेमाल कर टीबी (Tuberculosis) जैसी जानलेवा बीमारी के गंभीर मामलों में 27% की कमी ला दी है।
शुक्रवार को जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, भारत अब ग्लोबल साउथ के पहले अंतरराष्ट्रीय एआई शिखर सम्मेलन (International AI Summit) की मेजबानी करने जा रहा है, जो 16 से 20 फरवरी 2026 तक नई दिल्ली में आयोजित होगा।
हेल्थकेयर में एआई का कमाल: आंकड़े गवाह हैं
सरकार ने डॉक्टरों की कमी को पूरा करने और दूर-दराज के इलाकों तक इलाज पहुंचाने के लिए ‘नेशनल टीबी एलिमिनेशन प्रोग्राम’ और ‘डिजीज सर्विलांस सिस्टम’ में एआई टूल्स तैनात किए हैं। इसके नतीजे चौंकाने वाले हैं:
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टीबी में गिरावट: एआई की मदद से समय पर पहचान होने के कारण टीबी के गंभीर मामलों में 27% की कमी आई है।
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बीमारी की चेतावनी: एआई सिस्टम ने अब तक 4,500 से ज्यादा बीमारी फैलने के अलर्ट समय रहते जारी किए, जिससे महामारी को रोकने में मदद मिली।
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ई-संजीवनी (e-Sanjeevani): इस टेली-मेडिसिन सेवा के जरिए 28.2 करोड़ से ज्यादा लोगों को इलाज मिला है, जिसमें एआई डॉक्टर की तरह बीमारी पहचानने में मदद कर रहा है।
कैंसर से लेकर आयुर्वेद तक एआई की घुसपैठ
भारत का एआई मॉडल सिर्फ एलोपैथी तक सीमित नहीं है।
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कैंसर और रेटिनोपैथी: ‘डायबिटिक रेटिनोपैथी’ और कैंसर की शुरुआती जांच में एआई सटीक परिणाम दे रहा है।
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आयुर्वेद: पारंपरिक चिकित्सा को आधुनिक बनाने के लिए एआई का उपयोग किया जा रहा है।
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कुपोषण: ‘उदयोगयंत्र’ (Udyogyantra) एआई सिस्टम के जरिए बच्चों में कुपोषण पर नजर रखी जा रही है।
16 फरवरी से दिल्ली में महाकुंभ
आने वाले सोमवार (16 फरवरी) से नई दिल्ली में ‘ग्लोबल साउथ AI समिट’ शुरू हो रहा है। इसमें दुनिया भर के नेता, टेक कंपनियां और नीति निर्माता शामिल होंगे।
भारत दुनिया को दिखाएगा कि कैसे ₹10,372 करोड़ के ‘IndiaAI Mission’ (जिसे मार्च 2024 में पीएम मोदी ने मंजूरी दी थी) ने देश की तस्वीर बदल दी है।











