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चेन्नई में भारत-EFTA TEPA पर चिंतन शिविर, सीफूड निर्यात पर चर्चा

चेन्नई में भारत-EFTA TEPA पर ‘चिंतन शिविर’: सीफूड निर्यातकों के लिए खुलेंगे नए दरवाजे, टैरिफ में मिली भारी छूट”

चेन्नई : THE POLITICS AGAIN डेस्क: संतोष सेठ की रिपोर्ट 

भारत सरकार के वाणिज्य विभाग ने 3 जुलाई 2026 को चेन्नई व्यापार केंद्र (Chennai Trade Centre) में “भारत-यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते (TEPA) के तहत समुद्री खाद्य (Seafood) क्षेत्र के लिए अवसर” विषय पर एक उच्च स्तरीय ‘चिंतन शिविर’ का आयोजन किया।

यह महत्वपूर्ण विचार-मंथन सत्र ‘सीफूड एक्सपो भारत 2026’ के दौरान आयोजित किया गया था।

भारत-EFTA TEPA का महत्व और 100 अरब डॉलर का निवेश लक्ष्य

TEPA, यूरोपीय आर्थिक समूह (EFTA) के चार सदस्य देशों—आइसलैंड, लिकटेंस्टीन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड—के साथ भारत का पहला व्यापार समझौता है।

  • EFTA देशों का कुल सकल घरेलू उत्पाद (GDP) लगभग 1.79 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर है, जो इन्हें वैश्विक व्यापार में एक प्रमुख ताकत बनाता है।

  • इस ऐतिहासिक समझौते का मुख्य लक्ष्य भारत में 15 वर्षों के भीतर 100 अरब डॉलर का विदेशी निवेश लाना और 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजित करना है।

  • तटीय राज्यों (जैसे तमिलनाडु) के मछुआरों और सीफूड से जुड़े हितधारकों के लिए यह समझौता निर्यात के भारी अवसर लेकर आया है।

सीफूड निर्यातकों को मिलेगी बंपर टैरिफ छूट

TEPA ने भारतीय समुद्री खाद्य निर्यातकों के लिए सबसे बड़ी बाधा यानी ‘टैरिफ’ को खत्म कर दिया है। इससे यूरोपीय बाजारों में भारतीय उत्पादों की पहुंच और प्रतिस्पर्धा दोनों बढ़ेंगी।

  • आइसलैंड: मछली के आहार (Fish Feed) सहित पशु आहार पर लगने वाले 55% आयात शुल्क को पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है।

  • स्विट्जरलैंड: मछली के वसा और तेल (लिवर ऑयल को छोड़कर) पर आयात शुल्क को 18.05% से घटाकर शून्य (Zero) कर दिया गया है।

  • नॉर्वे: मछली और झींगा (Shrimp) के आहार सहित पशु आहार पर अपने 13.16% आयात शुल्क को खत्म कर दिया है।

मुख्य लाभ: इन रियायतों के बाद EFTA बाजारों में भारतीय सीफूड और एक्वाकल्चर फीड की मांग में भारी उछाल आने की उम्मीद है।

हितधारकों के साथ मंथन और ओपन हाउस सत्र

इस महत्वपूर्ण चिंतन शिविर में वाणिज्य विभाग के संयुक्त सचिव श्री मोहित यादव ने शिरकत की। उनके साथ ‘इन्वेस्ट इंडिया’, विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) के चेन्नई क्षेत्रीय कार्यालय, निर्यात निरीक्षण परिषद (EIC) और भारतीय निर्यात संगठन महासंघ (FIEO) के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया।

सत्र की प्रमुख चर्चाएं:

  • ‘इन्वेस्ट इंडिया’ के प्रतिनिधि ने भारतीय सीफूड वैल्यू चेन में उभरते हुए नए निवेश अवसरों पर विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया।

  • DGFT ने व्यापार सुगमता (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देने और भारतीय निर्यातकों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए लागू की गई निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं की जानकारी दी।

  • EIC और FIEO ने अंतरराष्ट्रीय नियामक आवश्यकताओं (Regulatory Requirements), सख्त गुणवत्ता मानकों और TEPA के तहत मिलने वाले लाभों का सही इस्तेमाल करने की रणनीतियां साझा कीं।

शिविर का सबसे बड़ा आकर्षण ‘ओपन हाउस संवादात्मक सत्र’ रहा, जहां सीफूड निर्यातकों को नीति निर्माताओं और सरकारी अधिकारियों से सीधे सवाल-जवाब करने का मौका मिला।

चर्चा के अंत में सरकार और उद्योग जगत ने TEPA के फायदों को अधिकतम करने और EFTA बाजारों में भारत के सीफूड निर्यात का विस्तार करने के लिए मिलकर काम करने का संकल्प लिया।

Santosh SETH

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