“कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के क्षेत्र में भारत अब पूरी दुनिया का नेतृत्व करने के लिए तैयार है”
नई दिल्ली : THE POLITICS AGAIN : संतोष सेठ की रिपोर्ट
दिल्ली में आयोजित ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट-2026’ में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए 70 से अधिक देशों ने साझा घोषणापत्र पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।
केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार को इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि यह आंकड़ा जल्द ही 80 को पार कर जाएगा।
इस भव्य आयोजन में 5 लाख से अधिक आगंतुकों ने हिस्सा लिया और भारत के बुनियादी ढांचे में 250 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक के भारी-भरकम निवेश की प्रतिबद्धता देखी गई।
सेमीकंडक्टर और नवाचार में भारत की धमक
मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि दुनिया अब भारत को सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला के लिए एक ‘विश्वसनीय भागीदार’ के रूप में देख रही है।
उन्होंने नवाचार (Innovation) के लाभों को गिनाते हुए स्पष्ट किया कि एआई के उपयोग से चिप निर्माण और बिजली की लागत में 50 प्रतिशत तक की कटौती की जा सकेगी।
भारत अपने डिजाइन और सेमीकंडक्टर यात्रा की शुरुआत ही इस अत्याधुनिक स्तर से कर रहा है।
रक्षा क्षेत्र में AI: सेना ने दिखाया दम
समिट में भारतीय सेना और नौसेना ने एआई-संचालित कई उन्नत रक्षा उपकरणों का प्रदर्शन किया। इनमें जलवायु विज्ञान, आपदा पूर्वानुमान और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए ‘चालक की थकान’ (Driver Fatigue) का पता लगाने वाले सिस्टम शामिल रहे।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सेना के पवेलियन का दौरा किया और कहा कि पीएम मोदी का एआई विजन मानवता को एक सुरक्षित और भविष्य के लिए तैयार दुनिया की ओर ले जा रहा है।
भारत-अमेरिका ‘पैक्स सिलिका’ समझौता और गूगल की पहल
समिट में भारत और अमेरिका के बीच बहुचर्चित ‘पैक्स सिलिका’ (Pax Silica) घोषणापत्र पर चर्चा हुई।
गूगल और अल्फाबेट इंक के सीईओ सुंदर पिचाई ने इसे एक मजबूत अमेरिकी-भारतीय तकनीकी साझेदारी की नींव बताया।
पिचाई ने ‘भारत-अमेरिका कनेक्ट इनिशिएटिव’ की घोषणा की, जिसके तहत दोनों देशों के बीच नए सब-सी (Sub-sea) केबल रूट बनाए जाएंगे।
उन्होंने भारत के आधार (Aadhar) और यूपीआई (UPI) जैसे डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को वैश्विक एआई विकास का आधार बताया।
वहीं, व्हाइट हाउस के साइंस एंड टेक्नोलॉजी पॉलिसी विभाग के निदेशक माइकल क्रैट्सियोस ने जोर देकर कहा कि पूरी तकनीकी आत्मनिर्भरता के बजाय देशों को अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी करनी चाहिए।
अमेरिका ‘नेशनल चैंपियन्स इनिशिएटिव’ और विश्व बैंक के फंड के जरिए पार्टनर देशों की एआई कंपनियों की मदद करेगा।
‘डिजिटल उपनिवेश’ बनने से बचने के लिए स्वदेशी AI जरूरी
समिट में स्वदेशी एआई (Indigenous AI) की वकालत भी पुरजोर तरीके से हुई। सर्वम एआई (Sarvam AI) के सह-संस्थापक विवेक राघवन ने चेतावनी दी कि यदि भारत ने अपनी खुद की बुनियादी एआई प्रौद्योगिकियां विकसित नहीं कीं, तो विदेशी प्रणालियों पर निर्भर होकर हम एक ‘डिजिटल उपनिवेश’ बन जाएंगे।
उन्होंने भारत की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता को देश की सबसे बड़ी ताकत बताया।
सबके लिए किफायती कंप्यूटिंग
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के सचिव डॉ. सौरभ गर्ग ने स्पष्ट किया कि भारत का लक्ष्य सरकार और निजी क्षेत्र के सहयोग से सभी को किफायती कंप्यूटिंग क्षमताएं उपलब्ध कराना है।
एआई का असली लाभ तभी है जब इसका उपयोग स्वास्थ्य, शिक्षा और कृषि जैसे क्षेत्रों में जनहितकारी लक्ष्यों को हासिल करने के लिए किया जाए।
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