रबी फसलों के एमएसपी में वृद्धि, किसानों को मोदी सरकार का तोहफा
मोदी कैबिनेट का किसानों को बड़ा तोहफा: 2027-28 के लिए रबी फसलों के MSP में भारी वृद्धि”
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने देश के किसानों के हित में एक बड़ा फैसला लिया है।
सरकार ने विपणन सीजन 2027-28 के लिए गेहूं, चना, सरसों और मसूर सहित सभी प्रमुख रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में शानदार वृद्धि को मंजूरी दे दी है।
इस कदम का मुख्य उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करना और देश में फसल विविधीकरण (Crop Diversification) को मजबूती देना है।
कुसुम और सरसों के एमएसपी में सबसे बड़ा उछाल
सरकार द्वारा जारी नई दरों के अनुसार, एमएसपी में सबसे अधिक 675 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि कुसुम (Safflower) के लिए की गई है, जिससे इसका नया मूल्य 7,215 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है।
तिलहन किसानों को राहत देते हुए रेपसीड और सरसों के एमएसपी में भी 413 रुपये प्रति क्विंटल का बड़ा इजाफा किया गया है।
इसके अलावा मसूर के दाम में 390 रुपये, जौ में 136 रुपये, चना में 83 रुपये और प्रमुख खाद्य फसल गेहूं के एमएसपी में 25 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
लागत के मुकाबले बंपर मुनाफा
सरकार की यह मूल्य वृद्धि केंद्रीय बजट 2018-19 में की गई उस घोषणा के अनुरूप है, जिसमें एमएसपी को अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत के कम से कम 1.5 गुना (150%) तय करने का लक्ष्य रखा गया था।
नए एमएसपी के लागू होने से किसानों को गेहूं की खेती पर उनकी लागत का 106 प्रतिशत शुद्ध मुनाफा मिलेगा।
इसी तरह, सरसों पर 96 प्रतिशत, मसूर पर 92 प्रतिशत, चना पर 59 प्रतिशत, जौ पर 58 प्रतिशत और कुसुम पर 50 प्रतिशत का मार्जिन सुनिश्चित किया गया है।
रिकॉर्ड खरीद और किसानों को ऐतिहासिक भुगतान
सरकार अनाज के साथ-साथ दलहन और तिलहन फसलों पर उच्च एमएसपी देकर लगातार इन्हें बढ़ावा दे रही है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, यूपीए सरकार (2004-14) की तुलना में मोदी सरकार (2014-26) में रबी फसलों की खरीद में ऐतिहासिक उछाल आया है।
2004-14 के दौरान जहां गेहूं की खरीद 2254 लाख मीट्रिक टन (LMT) थी, वहीं 2014-26 में यह बढ़कर 3715 LMT के पार पहुंच गई है।
भुगतान के मोर्चे पर भी किसानों को भारी लाभ हुआ है। 2014-15 से 2025-26 के बीच गेहूं उत्पादक किसानों को एमएसपी के रूप में 7.31 लाख करोड़ रुपये का भुगतान किया गया, जो पिछले 10 वर्षों (2004-14) के 2.56 लाख करोड़ रुपये की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक है।
छह प्रमुख रबी फसलों का कुल एमएसपी भुगतान भी 2.65 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 8.36 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया है, जो कृषि क्षेत्र में ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाता है।
| फसल (रबी 2027-28) | नया MSP (रुपये/क्विंटल) | एमएसपी में वृद्धि | लागत पर मार्जिन (%) |
| गेहूं (Wheat) | ₹2610 | + ₹25 | 106% |
| जौ (Barley) | ₹2286 | + ₹136 | 58% |
| चना (Gram) | ₹5958 | + ₹83 | 59% |
| मसूर (Lentil) | ₹7390 | + ₹390 | 92% |
| रेपसीड और सरसों | ₹6613 | + ₹413 | 96% |
| कुसुम (Safflower) | ₹7215 | + ₹675 | 50% |











