Mani Shankar Aiyar controversial statement

कांग्रेस में फिर ‘मणिशंकर बम’: अय्यर बोले- ‘मैं राजीव-वादी हूं, राहुल-वादी नहीं’; केरल में विपक्षी सीएम की तारीफ से पार्टी में हड़कंप

“कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और अक्सर अपने बयानों से विवादों में रहने वाले मणिशंकर अय्यर ने एक बार फिर अपनी ही पार्टी के लिए मुसीबत खड़ी कर दी है:

नई दिल्ली/तिरुवनंतपुरम: THE POLITICS AGAIN : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

केरल विधानसभा चुनाव (2026) सिर पर हैं, और ऐसे नाजुक वक्त में अय्यर ने सीधे पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधा है।

अय्यर ने एक बयान में साफ कहा है कि वे ‘राहुलवादी’ (Rahul-vadi) नहीं हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने केरल में कांग्रेस की मुख्य प्रतिद्वंद्वी पार्टी (CPIM/LDF) के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन की शान में कसीदे पढ़े हैं, जिससे कांग्रेस आलाकमान असहज हो गया है।

“राहुल भूल गए कि मैं पार्टी में हूं”

मीडिया से बातचीत के दौरान मणिशंकर अय्यर ने अपना दर्द और नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा, “डॉ. अंबेडकर की एक जीवनी है जिसका नाम है ‘ए पार्ट बट अपार्ट’ (हिस्सा हूं, लेकिन अलग हूं)।

मेरे बारे में बस इतना ही कह सकता हूं। राहुल गांधी यह भूल गए हैं कि मैं पार्टी का सदस्य हूं। इसलिए, मैं गांधीवादी हूं, नेहरूवादी हूं, राजीववादी हूं, लेकिन राहुलवादी नहीं हूं।”

अय्यर का यह बयान ऐसे समय आया है जब कांग्रेस केरल में सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही है, और पार्टी के भीतर गुटबाजी पहले से ही चरम पर है।

दुश्मन की तारीफ: ‘विजयन फिर बनेंगे सीएम’

अय्यर ने कांग्रेस की मुश्किलें तब और बढ़ा दीं, जब उन्होंने एक सेमिनार में लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) सरकार और मुख्यमंत्री पिनरई विजयन की जमकर तारीफ की।

‘विजन 2031’ कॉन्फ्रेंस में अय्यर ने कहा, “मुख्यमंत्री (विजयन) की मौजूदगी में, जिनके बारे में मुझे यकीन है कि वे अगले मुख्यमंत्री होंगे, मैं केरल को देश का सबसे अच्छा पंचायती राज राज्य बनाने की अपील करता हूं।”

कांग्रेस, जो केरल में LDF को सत्ता से उखाड़ फेंकने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है, उसके लिए अपने ही वरिष्ठ नेता द्वारा विपक्षी सीएम की जीत की भविष्यवाणी करना किसी झटके से कम नहीं है।

पार्टी ने किया किनारा

हमेशा की तरह, कांग्रेस ने मणिशंकर अय्यर के बयानों से पल्ला झाड़ लिया है। पार्टी प्रवक्ताओं का कहना है कि ये अय्यर के ‘निजी विचार’ हैं और पार्टी का इनसे कोई लेना-देना नहीं है।

लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि चुनाव से ठीक पहले यह ‘सेल्फ गोल’ कांग्रेस को भारी पड़ सकता है।

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