सीजेपी पार्टी की अहम बैठक आज, राजनीतिक दल बनने की अटकलें खारिज
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की अहम बैठक: राजनीतिक दल बनने से किया इनकार, राष्ट्रव्यापी विस्तार की तैयारी”
मुंबई: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके के आवास पर बुधवार को एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक आयोजित होने जा रही है।
इस बैठक का मुख्य एजेंडा हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन की व्यापक समीक्षा करना, संगठन के विस्तार पर चर्चा करना और भविष्य की रूपरेखा तैयार करना है।
हालांकि, दिपके ने स्पष्ट कर दिया है कि उनके संगठन को राजनीतिक पार्टी (Political Party) में बदलने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है और CJP पूरी तरह से एक सामाजिक आंदोलन के रूप में ही काम करता रहेगा।
जंतर-मंतर प्रदर्शन की होगी समीक्षा
अभिजीत दिपके ने बताया कि बैठक की शुरुआत जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन की समीक्षा से की जाएगी।
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प्रदर्शन में शामिल हुए कार्यकर्ताओं और प्रतिभागियों से सीधा फीडबैक लिया जाएगा ताकि भविष्य के कार्यक्रमों की रूपरेखा को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
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इसके अलावा, संगठन की मुख्य टीम का दायरा बढ़ाने और महाराष्ट्र से बाहर देश के विभिन्न राज्यों में CJP की मौजूदगी को मजबूत करने की रणनीति पर गहन चर्चा होगी।
राजनीतिक पार्टी बनने की अटकलें खारिज
दिपके ने स्पष्ट किया कि CJP का यह सामाजिक आंदोलन अब केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार देने की दिशा में तेजी से काम किया जाएगा।
उन्होंने संगठन के राजनीतिक दल बनने की सभी अटकलों को खारिज करते हुए कहा,
“संगठन के भीतर फिलहाल ऐसी कोई चर्चा नहीं है। सभी सदस्यों की सर्वसम्मति है कि CJP को एक गैर-राजनीतिक सामाजिक आंदोलन के रूप में ही आगे बढ़ाया जाए और बेबाकी से जनहित के मुद्दों पर आवाज उठाई जाए।”
संघ प्रमुख के ‘Gen Z’ से संवाद पर प्रतिक्रिया
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत द्वारा ‘जेन जेड’ (Gen Z – नई पीढ़ी) से संवाद करने की पहल पर प्रतिक्रिया देते हुए दिपके ने इसे एक सकारात्मक शुरुआत बताया।
उन्होंने दावा किया कि युवाओं के बढ़ते आंदोलन ने ही वरिष्ठ नेताओं को नई पीढ़ी से संवाद करने के लिए मजबूर किया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मोहन भागवत और बीजेपी सांसदों जैसे दिग्गज नेताओं को भी अब ‘जेन जेड’ से बात करने की जरूरत महसूस हो रही है।
हालांकि, उन्होंने सुझाव दिया कि युवाओं से बेहतर और सहज संवाद स्थापित करने के लिए पार्टियों को नए, युवा और शिक्षित चेहरों को आगे लाना चाहिए, क्योंकि नई पीढ़ी पुराने और वरिष्ठ नेताओं से खुद को आसानी से नहीं जोड़ पाती।
“बातचीत से ही निकलता है समाधान”
केंद्रीय मंत्री एस.पी. सिंह बघेल की इस टिप्पणी से पूरी तरह सहमति जताते हुए कि ‘बातचीत से ही समस्याओं का समाधान निकलता है’, दिपके ने कहा कि संवाद ही आगे बढ़ने का एकमात्र प्रभावी रास्ता है।
उन्होंने जंतर-मंतर के अनुभव का उदाहरण देते हुए कहा,
“हम जंतर-मंतर पर भी बातचीत के लिए ही बैठे थे। जैसे ही हमारी जेपी नड्डा जी से बातचीत हुई, समाधान तुरंत निकल आया और इस्तीफे की नौबत आ गई।”











