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महिला आरक्षण: बिना परिसीमन लागू करने पर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई

महिला आरक्षण तुरंत लागू करने पर आज सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई, बिना परिसीमन कानून लागू करने की है मांग

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : श्रीमती शिल्पा की रिपोर्ट 

संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के मुद्दे पर देशभर में सियासी घमासान तेज हो गया है।

एक तरफ जहां 16 अप्रैल से संसद का विशेष सत्र बुलाया गया है, वहीं दूसरी ओर ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को बिना देरी के तुरंत लागू करने की मांग वाली याचिका पर आज (सोमवार, 13 अप्रैल) सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होने जा रही है।

बिना परिसीमन और जनगणना लागू हो कानून

यह महत्वपूर्ण याचिका कांग्रेस नेत्री जया ठाकुर द्वारा दाखिल की गई है। याचिका में सुप्रीम कोर्ट से यह मांग की गई है कि महिलाओं को आरक्षण देने वाले ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए और इसे आगामी जनगणना व परिसीमन की प्रक्रिया से न जोड़ा जाए।

वर्तमान कानून में यह प्रावधान है कि महिलाओं को 33% आरक्षण का लाभ तभी मिलेगा, जब नई जनगणना होगी और उसके आधार पर सीटों के परिसीमन की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।

लेकिन, याचिकाकर्ता का तर्क है कि सीटों की कुल संख्या पहले से ही तय है। ऐसे में देश की लगभग आधी आबादी होने के बावजूद महिलाओं को पर्याप्त राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा है, इसलिए जनगणना और परिसीमन की शर्त को हटा दिया जाना चाहिए।

जस्टिस बीवी नागरत्ना की बेंच करेगी सुनवाई

इस संवेदनशील और महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच करेगी।

गौरतलब है कि इससे पहले वर्ष 2023 में शीर्ष अदालत ने टिप्पणी की थी कि संसद द्वारा बनाए गए कानून के इस प्रावधान को रद्द करना बहुत मुश्किल होगा।

आज की यह सुनवाई इसलिए भी बेहद अहम मानी जा रही है क्योंकि केंद्र सरकार 16 अप्रैल से संसद का विशेष सत्र शुरू करने जा रही है, जिसमें 2029 चुनाव से पहले महिला आरक्षण लागू करने के लिए संशोधन बिल लाया जा सकता है।

पीएम मोदी की अपील और कांग्रेस का कड़ा विरोध

इस विशेष सत्र से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी राजनीतिक दलों के नेताओं को पत्र लिखकर इस संशोधन कानून को सर्वसम्मति से पास करने की अपील की है।

पीएम ने जोर दिया है कि भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए नीति-निर्माण में महिलाओं की ज्यादा भागीदारी अत्यंत आवश्यक है।

हालांकि, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस विशेष सत्र को बुलाने के समय पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस का कहना है कि वर्तमान में तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव चल रहे हैं।

ऐसे समय में विशेष सत्र बुलाकर बड़ा फैसला लेना सीधे तौर पर चुनाव आचार संहिता (Model Code of Conduct) का उल्लंघन हो सकता है।

पार्टी ने यह भी मांग की है कि आरक्षण और परिसीमन जैसे गंभीर विषय पर आगे बढ़ने से पहले सरकार को सभी दलों की एक सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए।

Santosh SETH

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