Politics

धर्मनिरपेक्षता की मृगतृष्णा: कैसे दम तोड़ रहा इंडिया गठबंधन?

धर्मनिरपेक्षता की मृगतृष्णा में भटकता विपक्ष: कांग्रेस की बेरुखी से कैसे दम तोड़ रहे हैं ‘इंडिया गठबंधन’ के सहयोगी दल?

विशेष विश्लेषण (संपादकीय): द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

भारतीय लोकतंत्र में ‘धर्मनिरपेक्षता’ (Secularism) की अवधारणा मूलतः “सर्वधर्म समभाव” और राज्य की धार्मिक निष्पक्षता पर आधारित रही है।

लेकिन, पिछले कई दशकों से भारतीय राजनीति के एक बड़े हिस्से ने इसे सामाजिक संतुलन और सद्भाव के बजाय “अल्पसंख्यक तुष्टिकरण” के एक राजनीतिक औजार के रूप में इस्तेमाल किया है।

आज इसी तुष्टिकरण की राजनीति का परिणाम है कि कई क्षेत्रीय और राष्ट्रीय दल गहरे वैचारिक संकट के दौर से गुजर रहे हैं।

कड़वा सच तो यह है कि विपक्ष आज धर्मनिरपेक्षता की ‘मृगतृष्णा’ में भटक रहा है और ‘इंडिया (I.N.D.I.A) गठबंधन’ के कई सहयोगी दल, मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस की बेरुखी और वैचारिक उलझन के कारण अपना-अपना सियासी दम तोड़ते जा रहे हैं।

कांग्रेस का पतन और भाजपा का उभार: कैसे बदला राजनीतिक विमर्श?

स्वतंत्रता के बाद कांग्रेस ने लंबे समय तक खुद को धर्मनिरपेक्ष राजनीति की केंद्रीय धुरी के रूप में स्थापित रखा।

परंतु समय के साथ, उस पर यह आरोप मजबूत होता गया कि उसने बहुसंख्यक समाज की सांस्कृतिक और धार्मिक आकांक्षाओं की पूरी तरह अनदेखी की और केवल ‘वोट बैंक’ आधारित राजनीति को प्राथमिकता दी।

कांग्रेस की इसी ऐतिहासिक भूल का परिणाम यह हुआ कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने “सांस्कृतिक राष्ट्रवाद” और “बहुसंख्यक अस्मिता” के प्रश्न को उठाकर उसे देश के मुख्य राजनीतिक विमर्श के केंद्र में ला खड़ा किया।

आज स्थिति यह हो गई है कि जो विपक्षी दल कभी भाजपा के हिंदुत्व विमर्श का तीखा विरोध करते थे, वे भी अब प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से मंदिर जाने लगे हैं और ‘सनातन परंपरा’ और राष्ट्रवाद की भाषा बोलने लगे हैं।

यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि भारतीय मतदाता अब केवल “धर्मनिरपेक्षता” के खोखले पारंपरिक नारों से संतुष्ट नहीं होने वाला।

कांग्रेस के सामने 3 सबसे बड़े वैचारिक संकट और खतरे

कांग्रेस के सामने आज सबसे बड़ा संकट यही है कि वह अभी तक यह तय नहीं कर पाई है कि उसकी राजनीति की मूल दिशा क्या होगी?

क्या वह पारंपरिक अल्पसंख्यक-केंद्रित गठजोड़ पर चलेगी? क्या वह सामाजिक न्याय (जातिगत राजनीति) का नया रास्ता अपनाएगी? या फिर वह भारतीय सांस्कृतिक चेतना के साथ सामंजस्य बिठाएगी?

यदि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने समय रहते अपने इस वैचारिक ढांचे का पुनर्मूल्यांकन नहीं किया, तो उनके सामने तीन बड़े खतरे हमेशा बने रहेंगे:

  1. बहुसंख्यक समाज से बढ़ती दूरी: बहुसंख्यक हिंदू समाज से कांग्रेस की लगातार बढ़ती दूरी उनके लिए सबसे बड़ी सियासी चिंता का सबब बन चुकी है। वहीं, क्षेत्रीय दल पहले ही उनके पारंपरिक अल्पसंख्यक और दलित वोट बैंक में गहरी सेंध लगा चुके हैं।

  2. वैकल्पिक नैरेटिव का अभाव: भाजपा के आक्रामक और स्पष्ट राष्ट्रवादी विमर्श के सामने कांग्रेस के पास कोई ठोस ‘वैकल्पिक नैरेटिव’ (Alternative Narrative) नहीं है।

  3. जनता का बदला हुआ मूड: यह ध्यान रखना होगा कि भारतीय लोकतंत्र अब केवल अल्पसंख्यक राजनीति पर नहीं चलता। जनता विकास, सुशासन, सुरक्षा, सामाजिक न्याय और राष्ट्रीय आत्मविश्वास—इन सभी का एक मजबूत संतुलन चाहती है।

निष्कर्ष: पहचान की राजनीति से ऊपर उठना होगा

भारत का राजनीतिक भविष्य उसी शक्ति का होगा जो केवल ‘पहचान और तुष्टिकरण’ की राजनीति से ऊपर उठकर जनता के सामने एक विश्वसनीय ‘शासन मॉडल’ (Governance Model) प्रस्तुत कर सके।

कांग्रेस के लिए मौजूदा चुनौती केवल चुनाव जीतने भर की नहीं रह गई है, बल्कि अपनी ‘वैचारिक प्रासंगिकता’ (Ideological Relevance) और अस्तित्व बचाने की है।

आने वाले वर्षों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि देश की सबसे पुरानी पार्टी अपने पुराने और जर्जर ढांचे से बाहर निकलकर आज के भारत की कोई नई राजनीतिक भाषा गढ़ पाती है या ‘धर्मनिरपेक्षता की मृगतृष्णा’ में ही अपना अंत खोज लेती है।

Santosh SETH

Recent Posts

यूपी कैबिनेट विस्तार : मनोज पांडे समेत 8 ने ली शपथ

यूपी में योगी सरकार का महा-कैबिनेट विस्तार: मनोज पांडे और भूपेंद्र चौधरी समेत 8 बने…

55 minutes ago

तेल कंपनियों को 1 लाख करोड़ का नुकसान, क्या बढ़ेंगे दाम?

पश्चिम एशिया संकट का भारत पर असर: तेल कंपनियों को रोजाना 1700 करोड़ का नुकसान,…

1 hour ago

यूपी: चलती ट्रेन में युवक की गोली मारकर हत्या, शव फेंका

यूपी में सनसनीखेज वारदात: चलती पैसेंजर ट्रेन में युवक की गोली मारकर हत्या, हत्यारों ने…

1 hour ago

बेंगलुरु: पीएम मोदी ने ‘ध्यान मंदिर’ का किया भव्य लोकार्पण

बेंगलुरु में पीएम मोदी: 'आर्ट ऑफ लिविंग' के 45 साल पूरे, भव्य 'ध्यान मंदिर' का…

2 hours ago

बंगलूरू में पीएम मोदी: ‘देश को स्कैम नहीं, समाधान चाहिए’

बंगलूरू में पीएम मोदी की हुंकार: 'देश को स्कैम नहीं, समाधान चाहिए'; कांग्रेस की हताशा…

2 hours ago

लखनऊ: BJYM नेता चेतन तिवारी पर ताबड़तोड़ फायरिंग, आरोपी गिरफ्तार

"लखनऊ में सनसनी: घर के बाहर BJYM नेता पर ताबड़तोड़ फायरिंग, CCTV में कैद हुई…

2 hours ago