केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने नई दिल्ली में हिमालयी राज्यों के साथ GLOF और हिमस्खलन से निपटने की तैयारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा की।
GLOF और हिमस्खलन के बढ़ते खतरे पर केंद्र मुस्तैद: गृह सचिव ने की हिमालयी राज्यों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक, दिए ये अहम निर्देश”
नई दिल्ली : संतोष सेठ की रिपोर्ट : THE POLITICS AGAIN
हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियर फटने और हिमस्खलन के बढ़ते खतरों के बीच केंद्र सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गई है।
केन्द्रीय गृह सचिव श्री गोविंद मोहन ने नई दिल्ली में हिमालयी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) और हिमस्खलन के जोखिमों से निपटने की तैयारियों की समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की।
इस महत्वपूर्ण बैठक में हिमालयी राज्यों—उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिवों और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों (SDMA) के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
इसके अलावा, गृह मंत्रालय (MHA), राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA), केंद्रीय जल आयोग (CWC), भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और रक्षा भू-सूचना विज्ञान अनुसंधान प्रतिष्ठान (DGRE) के शीर्ष अधिकारी भी मौजूद रहे।
बैठक के दौरान हिमालयी क्षेत्र में GLOF के उभरते जोखिमों की गहन समीक्षा की गई। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अपनी तैयारियों का ब्यौरा साझा किया। बैठक में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर जोर दिया गया:
संवेदनशील ग्लेशियल झीलों और बर्फ से ढके क्षेत्रों की निरंतर व सक्रिय निगरानी।
उच्च जोखिम वाले स्थानों की पहचान और संभावित जल-प्रवाह मार्गों (Water Flow Paths) का निर्धारण।
प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों (Early Warning Systems) को मजबूत करना और चेतावनियों को अंतिम छोर तक समयबद्ध तरीके से पहुंचाना।
निकासी की तैयारियों और जमीनी स्तर पर प्रतिक्रिया तंत्र (Response Mechanism) को और अधिक सुदृढ़ करना।
केंद्रीय गृह सचिव ने राज्यों को स्पष्ट निर्देश दिए कि GLOF और हिमस्खलन से निपटने की तैयारियां केवल ‘प्रतिक्रिया-केंद्रित’ (आपदा आने के बाद की कार्रवाई) नहीं होनी चाहिए।
इसे ‘जोखिम-सूचित योजना’ (Risk-informed Planning), निवारक शमन (Preventive Mitigation) और सामुदायिक स्तर की तैयारियों में बदला जाना चाहिए।
गृह सचिव ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2024 में स्वीकृत GLOF शमन परियोजना के कार्यान्वयन में तेजी लाई जाए।
उन्होंने राज्यों को सलाह दी कि वे राज्य की एजेंसियों, जिला प्रशासन और वैज्ञानिक संस्थानों के बीच निकट समन्वय बनाए रखें।
बैठक का समापन इस निर्देश के साथ हुआ कि संवेदनशील हिमालयी क्षेत्रों में जनहानि और संपत्ति के नुकसान को न्यूनतम करने के लिए अंतर-एजेंसी समन्वय और जोखिम संबंधी सूचनाओं का नियमित आदान-प्रदान अत्यंत आवश्यक है।
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