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कोयला क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधार: उत्पादन 1 बिलियन टन के पार

कोयला क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधार: उत्पादन 1 बिलियन टन के पार, 100% FDI और कमर्शियल माइनिंग को बढ़ावा”

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट

भारत सरकार ने पिछले पांच वर्षों में देश के कोयला क्षेत्र (Coal Sector) की तस्वीर पूरी तरह से बदल दी है।

कोयला आवंटन और खनन को अधिक पारदर्शी, वैज्ञानिक और कुशल बनाने के लिए कई बड़े संरचनात्मक सुधार किए गए हैं।

केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में बताया कि कोयले के आवंटन को अब खुली प्रतिस्पर्धी नीलामी के जरिए किया जा रहा है।

इसका परिणाम यह है कि भारत का घरेलू कोयला उत्पादन अब 1 बिलियन टन (100 करोड़ टन) के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर गया है।

पारदर्शिता और बाज़ार आधारित बड़े सुधार

सरकार ने वर्ष 2020 में बिना किसी प्रतिबंध के वाणिज्यिक (Commercial) कोयला खनन की शुरुआत की थी। इसके तहत उठाए गए प्रमुख कदम निम्नलिखित हैं:

  • 100% FDI की अनुमति: वाणिज्यिक कोयला खनन में बिना किसी तकनीकी या वित्तीय शर्तों के ‘स्वचालित मार्ग’ (Automatic Route) से 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की अनुमति दी गई है।

  • राजस्व-साझाकरण मॉडल: राष्ट्रीय कोयला सूचकांक के आधार पर नीलामी को अब प्रतिशत राजस्व-साझाकरण (Revenue-sharing) मॉडल में बदल दिया गया है।

  • सिंगल विंडो मोड एग्नोस्टिक (SWMA): कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) के गैर-लिंकेज कोयले को एक ही विंडो से बेचने की व्यवस्था की गई है ताकि बाजार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा बढ़ सके।

व्यापार में सुगमता (Ease of Doing Business)

खनन कार्यों में तेजी लाने के लिए सरकार ने ‘परिवेश 2.0’ पोर्टल के जरिए ‘सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम’ लागू किया है।

44 निजी संस्थाओं को अन्वेषण (Exploration) के लिए अधिसूचित किया गया है। इसके अलावा, कोकिंग कोयले को ‘महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज’ घोषित किया गया है, जिससे वन और पर्यावरण मंजूरी तेजी से मिल सकेगी।

तकनीक और ‘क्लीन कोल’ (Clean Coal) की पहल

कोयला इकोसिस्टम को आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए सरकार ने कई तकनीकी कदम उठाए हैं:

  • डिजिटल निगरानी: कोयले के उत्पादन और परिवहन की लाइव ट्रैकिंग के लिए ‘कोयला शक्ति डैशबोर्ड’ और अवैध खनन रोकने के लिए ‘खनन प्रहरी’ मोबाइल ऐप लॉन्च किया गया है।

  • कोयला गैसीकरण: वर्ष 2030 तक 100 मीट्रिक टन गैसीकरण क्षमता हासिल करने के लिए 8,500 करोड़ रुपये और 37,500 करोड़ रुपये की दो प्रमुख योजनाओं को मंजूरी दी गई है।

  • कोयला एक्सचेंज: ऑनलाइन ट्रेडिंग के लिए ‘कोयला विनिमय नियम, 2026’ अधिसूचित किए गए हैं।

कोयला उत्पादन में आया ऐतिहासिक उछाल

सुधारों के दम पर देश के घरेलू कोयला उत्पादन में भारी वृद्धि दर्ज की गई है।

वित्तीय वर्ष

घरेलू कोयला उत्पादन (मीट्रिक टन)

2019-20

लगभग 731 मीट्रिक टन

2024-25

1047.52 मीट्रिक टन

2025-26

1039 मीट्रिक टन

 

लॉजिस्टिक्स को बेहतर बनाने के लिए सरकार ने 139 ‘फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी’ (FMC) परियोजनाएं भी शुरू की हैं, जिनमें से 72 चालू हो चुकी हैं।

ये सुधार न केवल देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा कर रहे हैं, बल्कि औद्योगिक विकास को भी नई रफ्तार दे रहे हैं।

Santosh SETH

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