छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सरकारी स्कूलों में बच्चों को हिंदू प्रार्थनाओं के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। इस फैसले के बाद ओवैसी ने आरएसएस के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद पर तीखा हमला बोला है।
छत्तीसगढ़ HC की अहम टिप्पणी: ‘सरकारी स्कूलों में छात्रों को हिंदू प्रार्थना के लिए नहीं कर सकते मजबूर’; फैसले के बहाने ओवैसी का RSS पर करारा हमला”
नई दिल्ली/बिलासपुर: कृष्णा सोनी की रिपोर्ट
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने राज्य के शिक्षा विभाग के एक हालिया सर्कुलर पर सुनवाई करते हुए एक बेहद अहम टिप्पणी की है।
अदालत ने साफ कर दिया है कि किसी भी सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों को हिंदू प्रार्थनाएं या वैदिक मंत्रोच्चार करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
अदालत की इस टिप्पणी के सामने आते ही सियासत भी गरमा गई है। एआईएमआईएम (AIMIM) चीफ और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने हाई कोर्ट के इस निर्देश को आधार बनाते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और बीजेपी पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है।
दरअसल, बीजेपी शासित छत्तीसगढ़ सरकार के प्रदेश शिक्षा विभाग ने 12 जून को एक प्रशासनिक सर्कुलर जारी किया था।
इस निर्देश में कहा गया था कि अगले शैक्षणिक सत्र से राज्य के सभी सरकारी स्कूलों में रोजाना वैदिक मंत्रों की प्रार्थना अनिवार्य होगी, जिसमें ‘गायत्री मंत्र’ और ‘सरस्वती वंदना’ भी शामिल है।
राज्य सरकार के इस निर्देश के बाद विवाद शुरू हो गया और एक याचिकाकर्ता ने इस सर्कुलर की संवैधानिक वैधता (Constitutional Validity) को हाई कोर्ट में चुनौती दी।
गुरुवार को जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की पीठ ने इस रिट याचिका पर सुनवाई की।
सरकार की दलील: सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को सूचित किया कि इस प्रशासनिक सर्कुलर को अभी तक किसी भी स्कूल में तामील (लागू) नहीं किया गया है और न ही किसी बच्चे को प्रार्थना के लिए मजबूर किया गया है।
अदालत का फैसला: सरकार के इस जवाब को संज्ञान में लेते हुए जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद ने याचिका का निपटारा कर दिया।
हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि बच्चों को सरकारी स्कूलों में हिंदू प्रार्थनाएं करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
याचिकाकर्ता को छूट: अदालत ने याचिकाकर्ता को यह कानूनी छूट भी दी है कि अगर भविष्य में किसी भी बच्चे को धार्मिक प्रार्थनाओं के लिए मजबूर किया जाता है, तो वे दोबारा हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं।
हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर एक रिपोर्ट टैग करते हुए संघ परिवार को निशाने पर लिया।
ओवैसी ने आरएसएस के ‘सांस्कृतिक राष्ट्रवाद’ की आलोचना करते हुए लिखा:
“यह संघ परिवार के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, जो कि हिंदुत्व राष्ट्रवाद है, उसका एक और नमूना है। संघ जिस सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की बात करता है, वह असल में भारतीय राष्ट्रवाद के बिल्कुल उलट (विपरीत) है।”
इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब शिक्षा और धर्म के मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।
देश की नजरें अब इस बात पर होंगी कि छत्तीसगढ़ सरकार अपने स्कूलों में प्रार्थना को लेकर आगे क्या कदम उठाती है।
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