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“SIR रोकते तो लागू कर दिया होता राष्ट्रपति शासन” – ममता बनर्जी

“मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बेरहमपुर की एक सभा से संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर केंद्र सरकार और बीजेपी पर तीखा हमला बोला”

बेरहमपुर 07 / 12 / 2025 संतोष सेठ की रिपोर्ट 

उन्होंने दावा किया कि यदि राज्य सरकार एसआईआर की अनुमति न देती, तो बीजेपी ‘राष्ट्रपति शासन’ लागू करने का बहाना ढूंढ लेता। उन्होंने लोगों को भरोसा दिलाते हुए कहा, एसआईआर से डरें नहीं, दस्तावेज़ तैयार रखें। हम न लड़ाई छोड़ेंगे, न अधिकार।

ममता ने आरोप लगाया कि एसआईआर असल में एनआरसी की तैयारी है। उन्होंने दोहराया, बांग्ला में एनआरसी नहीं होगा। मेरा गला काट दो, फिर भी मैं डिटेंशन कैंप नहीं बनने दूंगी। उन्होंने कहा कि रोहिंग्या प्रवेश का सवाल केंद्र से पूछा जाना चाहिए क्योंकि सीमा, पासपोर्ट, वीज़ा, बीएसएफ — सब केंद्र के नियंत्रण में है।

💥 मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के मुख्य दावे और घोषणाएं

1. SIR और राष्ट्रपति शासन पर आरोप

  • राजनीतिक मंशा: ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि SIR (संक्षिप्त पुनरीक्षण) असल में एनआरसी (National Register of Citizens) की तैयारी है।

  • बहाना: उन्होंने दावा किया कि यदि राज्य सरकार SIR की अनुमति नहीं देती, तो बीजेपी को ‘राष्ट्रपति शासन’ लागू करने का बहाना मिल जाता।

2. एनआरसी और डिटेंशन कैंप पर दृढ़ता

  • एनआरसी का विरोध: उन्होंने स्पष्ट किया कि बंगाल में एनआरसी नहीं होगा।

  • डिटेंशन कैंप: ममता ने दृढ़ता से कहा, “मेरा गला काट दो, फिर भी मैं डिटेंशन कैंप नहीं बनने दूंगी।”

3. जनता को भरोसा और निर्देश

  • भरोसा: उन्होंने लोगों को SIR से न डरने और अपने दस्तावेज़ तैयार रखने का भरोसा दिया। साथ ही कहा, “हम न लड़ाई छोड़ेंगे, न अधिकार।”

  • सीमा सुरक्षा: उन्होंने कहा कि रोहिंग्या प्रवेश का सवाल केंद्र से पूछा जाना चाहिए क्योंकि सीमा, पासपोर्ट, वीज़ा, और बीएसएफ (BSF) सहित सब कुछ केंद्र के नियंत्रण में है।

  • बूथ पर कैंप: उन्होंने मालदा की तरह मुर्शिदाबाद के मंच से भी हर बूथ पर ‘May I Help You’ कैंप लगाने का निर्देश दिया।

4. सहायता राशि की घोषणा

  • मृतकों के लिए: SIR के तनाव के कारण जिन 40 लोगों की मृत्यु हुई, उनके परिवारों को ₹2 लाख की सहायता मिलेगी।

  • घायलों के लिए: अस्पताल में भर्ती लोगों को ₹1 लाख की सहायता राशि प्रदान की जाएगी।

5. पहचान और भाषा का मुद्दा

  • बंगाली पहचान: ममता बनर्जी भाषा और पहचान के मुद्दे पर भावुक हुईं। उन्होंने आरोप लगाया कि बंगालियों को अन्य राज्यों में केवल बांग्ला बोलने के लिए ‘बांग्लादेशी’ कहा जा रहा है।

  • व्यक्तिगत स्टैंड: उन्होंने घोषणा की कि वह खुद अभी तक वोटर सूची में अपना नाम नहीं जोड़ेंगी और कहा, “पहले जनता सुरक्षित हो, फिर मैं नाम जोड़ूंगी।” उन्होंने सोनाली खातून के लिए सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई का भी ज़िक्र किया।

Santosh SETH

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