किसानों के विरोध को देखते हुए गुजरात सरकार ने पुरानी नीति में बदलाव किया है। अब पारेषण लाइनों और टावरों के लिए किसानों को उनकी जमीन के मौजूदा बाजार मूल्य का दोगुना एकमुश्त भुगतान किया जाएगा।
गुजरात के किसानों को भूपेंद्र पटेल सरकार की बड़ी सौगात: बिजली टावर और लाइन के लिए जमीन अधिग्रहण पर अब मिलेगा बाजार मूल्य का दोगुना मुआवजा, एकमुश्त होगा भुगतान”
गांधीनगर: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
गुजरात सरकार ने राज्य के किसानों को एक बहुत बड़ी राहत देते हुए भूमि अधिग्रहण मुआवजे की नीति में ऐतिहासिक बदलाव किया है।
अब राज्य में बिजली पारेषण (Transmission) लाइनों और टावरों के लिए जिन किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा, उन्हें भारी-भरकम मुआवजा मिलेगा।
शुक्रवार को जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, सरकार ने फैसला किया है कि अब प्रभावित किसानों को उनकी जमीन के मौजूदा बाजार मूल्य का दोगुना (200%) भुगतान किया जाएगा, जिससे उन्हें उचित और बाजार-आधारित मुआवजा मिलना सुनिश्चित हो सके।
दरअसल, राज्य के कई हिस्सों में किसान अपनी कृषि भूमि पर बिजली लाइनों और टावरों की स्थापना के लिए मिल रहे कम मुआवजे को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे।
क्या थी पुरानी व्यवस्था: वर्तमान नीति के तहत, कृषि भूमि से गुजरने वाले बिजली के खंभों और पारेषण लाइनों के लिए मुआवजे का भुगतान ‘जंत्री मूल्य’ (Jantri Rate – सरकार द्वारा निर्धारित भूमि का न्यूनतम मूल्य) के 200 प्रतिशत पर किया जाता था, जो बाजार मूल्य से काफी कम होता था।
किसानों की मांग को मानते हुए सरकार ने नई नीति में कई अहम बदलाव किए हैं:
1. बाजार मूल्य पर दोगुना भुगतान: मुआवजे का भुगतान अब पुरानी ‘जंत्री दर’ के बजाय जमीन के मौजूदा ‘बाजार मूल्य’ (Market Value) के दोगुने पर किया जाएगा।
2. टावर क्षेत्र के मुआवजे में भी वृद्धि: पहले मुआवजे की गणना केवल टावर के वास्तविक आधार क्षेत्र (बेस एरिया) पर की जाती थी।
संशोधित नीति के तहत, अब टावर के आधार क्षेत्र में सभी चारों दिशाओं में 1-1 मीटर अतिरिक्त जगह जोड़ी जाएगी, जिससे मुआवजे योग्य क्षेत्र बढ़ जाएगा और किसानों को ज्यादा पैसा मिलेगा।
3. किस्तों का झंझट खत्म, मिलेगा एकमुश्त पैसा: सरकार ने पुरानी किस्तों वाली भुगतान प्रणाली को पूरी तरह समाप्त कर दिया है।
पहले मुआवजा तीन किस्तों में (40% नींव के समय, 40% टावर लगने पर, 20% लाइन बिछने पर) मिलता था। अब काम शुरू होने से पहले ही 100 प्रतिशत मुआवजे का एकमुश्त भुगतान कर दिया जाएगा।
जमीन की कीमत तय करने में कोई भेदभाव न हो, इसके लिए राज्य सरकार एक बाजार दर समिति (Market Rate Committee – MRC) का गठन करेगी।
इस समिति में जिला कलेक्टर, प्रभावित किसानों के प्रतिनिधि, किसानों द्वारा नामित एक अधिकृत बाजार मूल्यांकक (Valuer) और पारेषण सेवा कंपनी के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
पारेषण लाइनों के राइट ऑफ वे (RoW) के तहत मुआवजे का भुगतान इसी समिति द्वारा तय बाजार मूल्य से जुड़ा होगा।
पारेषण लाइनों के गुजरने वाले कॉरिडोर (RoW) के लिए अलग-अलग क्षेत्रों के आधार पर मुआवजे की दरें इस प्रकार तय की गई हैं:
ग्रामीण क्षेत्रों में: किसानों को बाजार मूल्य का 30 प्रतिशत हिस्सा मुआवजे के रूप में मिलेगा।
नगर पालिकाओं वाले क्षेत्रों में: किसानों को बाजार मूल्य का 45 प्रतिशत मुआवजा दिया जाएगा।
नगर निगमों की सीमा (शहरी क्षेत्र) में: किसानों को अनुमानित बाजार मूल्य का 60 प्रतिशत मुआवजा मिलेगा।
गुजरात सरकार के इस फैसले से राज्य के लाखों किसानों को सीधा आर्थिक लाभ पहुंचने की उम्मीद है और इससे बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर के काम में भी तेजी आएगी।
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