सरकार का बड़ा फैसला: प्रेगाबालिन (Pregabalin) दवा 'शेड्यूल H1' में शामिल
नशे के लिए दवा के दुरुपयोग पर सरकार का बड़ा एक्शन: ‘प्रेगाबालिन’ (Pregabalin) अब ‘शेड्यूल H1’ में शामिल, बिना पर्ची बिक्री पर लगी रोक”
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
युवाओं में दर्द निवारक और तंत्रिका रोग की दवा ‘प्रेगाबालिन’ (Pregabalin) के नशे के तौर पर बढ़ते दुरुपयोग को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने एक बेहद सख्त और अहम कदम उठाया है।
सरकार ने इस दवा की आसान पहुंच पर अंकुश लगाने के लिए इसे ‘औषधि नियम, 1945’ की ‘अनुसूची एच1’ (Schedule H1) के सख्त प्रावधानों के अंतर्गत डाल दिया है। 20 मई 2026 को भारत के राजपत्र में इसकी आधिकारिक अधिसूचना भी जारी कर दी गई है।
क्या है प्रेगाबालिन और क्यों हो रहा था दुरुपयोग?
प्रेगाबालिन मुख्य रूप से पुराने दर्द, तंत्रिका रोग (Neuropathy), फाइब्रोमायल्जिया और कुछ विशेष तंत्रिका संबंधी स्थितियों के उपचार के लिए डॉक्टरों द्वारा लिखी जाती है।
दुरुपयोग: स्वास्थ्य मंत्रालय को कई राज्यों से रिपोर्ट मिली थी कि युवा इस दवा का इस्तेमाल शीघ्रता से दर्द दूर करने, ‘मूड’ (मनोस्थिति) ठीक रखने और अवसाद (Depression) दूर करने के लिए नशे के रूप में कर रहे हैं।
अवैध तस्करी: हाल ही में देश के कई हिस्सों से अवैध रूप से भंडारित और अनधिकृत रूप से बेची जा रही प्रेगाबालिन की बड़ी खेपें भी जब्त की गई थीं।
अब लागू होंगे ‘अनुसूची H1’ के सख्त नियम
इस नई अधिसूचना के बाद प्रेगाबालिन अब सामान्य (Schedule H) दवा की तरह नहीं बिकेगी। इसके लिए निम्नलिखित सख्त नियम अनिवार्य कर दिए गए हैं:
डॉक्टर की पर्ची अनिवार्य: इस दवा की खुदरा बिक्री (Retail Sale) केवल एक पंजीकृत चिकित्सा व्यवसायी (RMP) द्वारा जारी वैध पर्चे के आधार पर ही की जा सकेगी। बिना डॉक्टरी सलाह के इसका सेवन खतरनाक माना गया है।
केमिस्टों को बनाना होगा रजिस्टर: दवा विक्रेताओं (खुदरा और थोक) को इस दवा की बिक्री का पूरा रिकॉर्ड और डॉक्टर के नुस्खे का विवरण दर्ज करने के लिए एक अलग रजिस्टर मेंटेन करना होगा।
पैकेजिंग पर ‘चेतावनी’: दवा निर्माताओं को अब उत्पाद की पैकेजिंग (पत्ते या डिब्बे) पर प्रमुखता से “अनुसूची एच1 दवा चेतावनी” (Schedule H1 Drug Warning) का लेबल लाल रंग से प्रदर्शित करना होगा।
उल्लंघन करने पर होगी दंडात्मक कार्रवाई
मंत्रालय ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि कोई भी निर्माता, वितरक, थोक विक्रेता या फार्मासिस्ट इन नए नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ ‘औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम, 1940’ (Drugs and Cosmetics Act, 1940) के तहत सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य सप्लाई चेन की जवाबदेही तय करना, नुस्खे की निगरानी बढ़ाना, अवैध तस्करी पर अंकुश लगाना और मादक पदार्थों के दुरुपयोग से देश के युवाओं और सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा करना है।
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