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फेक न्यूज़ पर सरकार का एक्शन: FCU, IT नियम और मीडिया रेगुलेशन लागू

फेक न्यूज़ पर सरकार का कड़ा प्रहार: भ्रामक खबरों को रोकने के लिए लागू किया ‘बहुस्तरीय तंत्र’ 

नई दिल्ली : द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

सोशल मीडिया और डिजिटल युग में तेजी से फैल रही भ्रामक और फर्जी खबरों (Fake News) पर नकेल कसने के लिए केंद्र सरकार ने एक सख्त ‘बहुस्तरीय तंत्र’ (Multi-tier Mechanism) लागू किया है।

सूचना की विश्वसनीयता बनाए रखने के उद्देश्य से सरकार ने फैक्ट चेक यूनिट (FCU), आईटी नियम (IT Rules) और मीडिया विनियमों को पूरी तरह से सक्रिय कर दिया है।

सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह अहम जानकारी साझा की।

FCU की सक्रियता और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में बड़ी कार्रवाई

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के अंतर्गत कार्यरत फैक्ट चेक यूनिट (FCU) केंद्र सरकार से जुड़ी गलत सूचनाओं की पहचान कर उनके असली तथ्यों को जनता तक पहुंचा रही है।

हाल ही में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान FCU ने ऑनलाइन प्रसारित हो रही भारत-विरोधी और सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील झूठी सामग्री की पहचान की।

इसके बाद सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69A के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के हित में डिजिटल मीडिया पर 1,400 से अधिक URL को ब्लॉक कर दिया गया। इनमें से अधिकांश सामग्री पाकिस्तान स्थित सोशल मीडिया खातों से फैलाई जा रही थी।

विभिन्न मीडिया प्लेटफार्मों के लिए सख्त नियम:

सरकार ने भ्रामक खबरों को रोकने के लिए सभी मीडिया माध्यमों पर वैधानिक तंत्र को मजबूत किया है:

  • प्रिंट मीडिया: समाचार पत्रों को प्रेस परिषद (PCI) के “पत्रकारिता आचरण के मानदंडों” का पालन करना अनिवार्य है। इसके तहत भ्रामक या मानहानिकारक खबरें छापने पर पीसीआई कड़ी कार्रवाई (चेतावनी या निंदा) कर सकती है।

  • टेलीविजन (TV): केबल टेलीविजन नेटवर्क अधिनियम, 1995 के तहत टीवी चैनलों को ‘कार्यक्रम संहिता’ का पालन करना होता है। अश्लील, झूठे और भ्रामक संकेत वाली सामग्री दिखाने पर त्रि-स्तरीय शिकायत निवारण प्रक्रिया के तहत सख्त एक्शन लिया जाता है।

  • डिजिटल मीडिया: वेब पोर्टल्स और ऑनलाइन सामग्री के लिए ‘आईटी नियम, 2021’ लागू हैं। इसके तहत प्रकाशकों के लिए आचार संहिता और शिकायतों के निवारण के लिए एक मजबूत तीन-स्तरीय संस्थागत तंत्र बनाया गया है।

  • सामुदायिक रेडियो (CRS): सीमावर्ती और ग्रामीण इलाकों में अफवाहें रोकने के लिए सामुदायिक रेडियो स्टेशनों को स्थानीय भाषाओं में प्रामाणिक जानकारी प्रसारित करने की जिम्मेदारी दी गई है।

सरकार के इन कदमों का मुख्य उद्देश्य देश की संप्रभुता, अखंडता और सुरक्षा को अक्षुण्ण रखते हुए आम जनता तक केवल सटीक और प्रामाणिक खबरें पहुंचाना है।

Santosh SETH

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