चुनाव आयोग पर संग्राम : हिरासत से रिहा हुए राहुल-प्रियंका
चुनाव आयोग पर संग्राम: हिरासत से छूटे राहुल-प्रियंका, पवन खेड़ा की चेतावनी- ‘मोदी-शाह को नींद नहीं आएगी’; EC और BJP ने किया पलटवार”
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (SIR) प्रक्रिया में गड़बड़ियों के आरोप और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर मंगलवार को देश की राजधानी में दिनभर चला राजनीतिक हाई-वोल्टेज ड्रामा देर रात किंग्सवे कैंप से विपक्षी नेताओं की रिहाई के साथ समाप्त हुआ।
दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा सहित 50 से अधिक सांसदों को आकाशवाणी भवन के पास से हिरासत में लिया था, जिन्हें करीब दो घंटे बाद रिहा कर दिया गया।
इस पूरे घटनाक्रम पर जहां कांग्रेस और विपक्षी दलों ने सरकार पर ‘लोकतंत्र को कुचलने’ का आरोप लगाया है, वहीं चुनाव आयोग (ECI) और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने विपक्ष के दावों को झूठा और ‘राजनीतिक ड्रामा’ करार दिया है।
किंग्सवे कैंप पर प्रियंका गांधी का ‘गेट ड्रामा’
देर शाम जब पुलिस ने हिरासत में लिए गए नेताओं को किंग्सवे कैंप पहुंचाया, तो वहां का माहौल तनावपूर्ण हो गया।
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा किंग्सवे कैंप के मेन गेट पर चढ़ गईं, जिसके बाद पुलिस को गेट खोलना पड़ा और कांग्रेस कार्यकर्ता व अन्य प्रदर्शनकारी परिसर के अंदर दाखिल हो गए।
कुछ देर के गतिरोध के बाद पुलिस ने राहुल-प्रियंका सहित सभी 50 सांसदों और करीब 250 अन्य नेताओं को रिहा कर दिया।
राहुल और पवन खेड़ा के तीखे तेवर: ‘देशद्रोही बख्शे नहीं जाएंगे’
हिरासत से छूटने के तुरंत बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पुलिस कार्रवाई का वीडियो साझा करते हुए कड़ा संदेश दिया।
उन्होंने लिखा, “लोकतंत्र के गद्दारों को बचाने के लिए बचे-खुचे लोकतंत्र को घसीटा गया है। हिसाब होगा – एक भी देशद्रोही बख्शा नहीं जाएगा।”
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने भी केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “नरेंद्र मोदी, ज्ञानेश कुमार, मोहन भागवत और अमित शाह आज रात सो नहीं पाएंगे और न ही आगे कभी चैन की नींद सो पाएंगे, क्योंकि उन्होंने देश के साथ विश्वासघात किया है।
जनता अहंकार के घोड़े पर सवार लोगों को सत्ता से उतार देगी। यह केवल शुरुआत है, कुछ भी खत्म नहीं हुआ है।”
चुनाव आयोग का स्पष्टीकरण: ‘किसी ने मिलने का औपचारिक समय नहीं मांगा’
विपक्ष के इन आरोपों के बीच, भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने एक विस्तृत बयान जारी कर अपनी स्थिति स्पष्ट की है।
आयोग ने कहा कि शाम 4 बजे तक किसी भी राजनीतिक दल ने औपचारिक रूप से मिलने का समय नहीं मांगा था।
-
असामान्य मांग: चुनाव आयोग ने कहा कि जब डीसीपी के माध्यम से सूचना मिली कि 240 सांसद संसद भवन एनेक्सी में मिलना चाहते हैं, तो इसे अस्वीकार कर दिया गया, क्योंकि प्रोटोकॉल के तहत ऐसी बैठकें ईसीआई परिसर में होती हैं।
-
ज्ञापन लेने से इनकार: ईसीआई ने अपना एक वरिष्ठ अधिकारी धरना स्थल पर भेजकर ज्ञापन लेने का प्रस्ताव रखा, लेकिन सांसदों ने उसे भी अस्वीकार कर दिया। आयोग ने स्पष्ट किया कि मिलने की एक निर्धारित प्रक्रिया है, जिसका पालन होना चाहिए।
भाजपा का पलटवार: ‘राहुल गांधी कर रहे झूठों का प्रपंच’
इस सियासी रस्साकशी पर भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन पर चौतरफा हमला बोला।
त्रिवेदी ने कहा, “झूठों के सरताज और नाटकीय प्रस्तुतीकरण में माहिर राहुल गांधी का दिनभर का ड्रामा ईसीआई की प्रेस रिलीज से बेनकाब हो गया है।”
उन्होंने कांग्रेस पर तीन बड़े झूठ बोलने का आरोप लगाया:
-
पहला झूठ: चुनाव आयोग से मिलने नहीं दिया जा रहा (जबकि उन्होंने समय ही नहीं मांगा था)।
-
दूसरा झूठ: 300 सांसदों के साथ जाने की जिद (जो इतिहास में कभी नहीं हुआ और न ही इसी जगह है)।
-
तीसरा झूठ: ज्ञापन सौंपने का दावा (जब ईसी अधिकारी को भेजा गया, तो उन्होंने ज्ञापन नहीं दिया)।
त्रिवेदी ने कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य केवल ‘राजनीतिक ड्रामा’ करना था, चुनाव आयोग के सामने अपनी बात रखना नहीं।
चुनाव आयोग पर संग्राम: आरोप-प्रत्यारोप और घटनाक्रम
| पहलू / पक्ष | प्रमुख बयान और घटनाक्रम |
| पुलिस कार्रवाई | राहुल-प्रियंका गांधी सहित 50 सांसद हिरासत में (किंग्सवे कैंप ले जाए गए), 2 घंटे बाद रिहाई। |
| प्रियंका गांधी वाड्रा | किंग्सवे कैंप के गेट पर चढ़ीं, समर्थकों को अंदर दाखिल कराया। |
| राहुल गांधी का बयान | “लोकतंत्र के गद्दारों को बचाया जा रहा है, एक भी देशद्रोही बख्शा नहीं जाएगा।” |
| पवन खेड़ा का प्रहार | “मोदी, शाह, भागवत और ज्ञानेश कुमार चैन की नींद नहीं सो पाएंगे।” |
| चुनाव आयोग (ECI) का पक्ष | “मिलने का औपचारिक समय नहीं मांगा गया। वरिष्ठ अधिकारी को ज्ञापन देने से इनकार किया।” |
| भाजपा (सुधांशु त्रिवेदी) | “राहुल गांधी का झूठ बेनकाब। यह केवल एक राजनीतिक ड्रामा था, मिलने का कोई उद्देश्य नहीं।” |
| विरोध का मूल कारण | SIR (मतदाता सूची) में गड़बड़ी और CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग। |











