अल नीनो का प्रभाव: 2026 में सामान्य से कम होगी मानसूनी बारिश
अल नीनो का साया: 2026 में सामान्य से कम होगी मानसूनी बारिश, लोकसभा में सरकार ने बताया पूरा प्लान”
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
भारतीय ग्रीष्मकालीन मानसून पर इस साल ‘अल नीनो’ (El Nino) का असर देखने को मिल सकता है, जिससे बारिश के सामान्य से कम रहने के आसार हैं।
पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने सोमवार को लोकसभा में एक लिखित जवाब में भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की तैयारियों और 2026 के मानसून पूर्वानुमान की विस्तृत जानकारी साझा की।
अल नीनो और भारतीय मानसून का इतिहास
लोकसभा में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, अल नीनो की घटना के दौरान अक्सर भारतीय मानसून कमजोर पड़ जाता है।
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साल 1950 के बाद से अब तक 16 बार अल नीनो की स्थिति बनी है।
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इनमें से 7 बार भारतीय मानसून की बारिश पर सीधा असर पड़ा और बारिश सामान्य से काफी कम दर्ज की गई।
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हालांकि, मौसम विभाग के अनुसार मानसून के आखिरी हिस्से (खासकर सितंबर) में अल नीनो और बारिश के बीच एक मजबूत उल्टा संबंध भी देखा गया है।
2026 के लिए IMD का पूर्वानुमान: 90% बारिश का अनुमान
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के लिए ‘सामान्य से कम’ बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है।
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पहला चरण: 13 अप्रैल 2026 को जारी पहले पूर्वानुमान में मौसमी बारिश ‘लॉन्ग पीरियड एवरेज’ (LPA) का 92% रहने का अनुमान जताया गया था।
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दूसरा चरण: इसके बाद पूर्वानुमान को संशोधित करते हुए इसे LPA का 90% कर दिया गया।
आईएमडी ने पहले ही अल नीनो की स्थिति बनने की संभावना का संकेत दे दिया था, ताकि किसानों और संबंधित विभागों को तैयारी करने का पर्याप्त समय मिल सके।
किसानों और कृषि के लिए विशेष निगरानी
मौसम विभाग मानसून की बारिश का रोजाना और अल नीनो की स्थितियों का हर महीने अपडेट जारी कर रहा है।
कृषि मंत्रालय (MoAFW) की ‘क्रॉप वेदर वॉच’ के तहत, IMD हर हफ्ते बारिश का अनुमान बता रहा है।
इसके अलावा, भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) कृषि और बांध प्रबंधन (Dam Management) विभागों के साथ मिलकर काम कर रहा है, ताकि जल प्रबंधन को सुचारू रूप से चलाया जा सके।
क्या राज्यों के लिए जारी हुए हैं कोई विशेष दिशानिर्देश?
डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने 2026 में अल नीनो के असर से निपटने के लिए राज्यों को जिले-वार जोखिम का कोई अलग अध्ययन या दिशानिर्देश जारी नहीं किया है।
हालांकि, मौसम विभाग नियमित रूप से मौसम, बारिश, हीटवेव (लू) और अन्य चरम मौसम की घटनाओं को लेकर ‘शुरुआती चेतावनियां’ (Early Warnings) जारी कर रहा है, जो सभी केंद्रीय मंत्रालयों और राज्य सरकारों तक पहुंचाई जा रही हैं ताकि वे सही समय पर बचाव के कदम उठा सकें।











